बिना डिलीवरी बना दिए 250 से ज्यादा बर्थ सर्टिफिकेट, एमपी स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा
Kaushiki | Apr 09, 2026, 08:51 IST
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मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के रामगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 250 से ज्यादा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का मामला सामने आया है। डाटा एंट्री ऑपरेटर समेत 6 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश के राजगढ़ के रामगढ़ स्वास्थ्य केंद्र में फर्जीवाड़ा पकड़ाया है।
- फरवरी 2026 में एक भी डिलीवरी नहीं हुई, फिर भी 137 बर्थ सर्टिफिकेट बन गए।
- कुल 250 से ज्यादा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए, 35 हजार रुपए कमाए।
- साल 1950 से 1980 तक के पुराने और अन्य राज्यों के नाम पर भी दस्तावेज बनाए गए।
- मुख्य आरोपी डाटा एंट्री ऑपरेटर अर्जुन बैरागी समेत 6 लोग गिरफ्तार हुए हैं।
राजगढ़ में बड़ा फर्जीवाड़ा
फरवरी 2026 में इस छोटे से स्वास्थ्य केंद्र पर 137 बच्चों के जन्म का रजिस्ट्रेशन दर्ज किया गया। लेकिन हकीकत ये थी कि उस पूरे महीने वहां एक भी डिलीवरी नहीं हुई थी। पूरा खेल कागजों पर चल रहा था और किसी को भनक तक नहीं लगी।
कब और कैसे खुला राज?
डॉ. सुनील चौरसिया, बीएमओ (Block Medical Officer) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जीरापुर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। धारा 318(4), 338 और 336(3) बीएनएस के तहत केस दर्ज हुआ। शिकायत दर्ज होते ही जांच की गति तेज हो गई।
1950 से लेकर 2026 तक के फर्जी दस्तावेज
इतना ही नहीं, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के नाम पर भी यहीं से डाक्यूमेंट्स जारी किए गए। कुल मिलाकर 250 से ज्यादा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए। ये गिरोह सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं था, इसकी जड़ें देशभर में फैली थीं।
कैसे चलता था यह धंधा
कॉपी सर्टिफिकेट पांच सौ से एक हजार रुपए वसूले जाते थे। इसके बाद सीआरएस पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज स्कैन कर अपलोड किए जाते थे। संबंधित मेडिकल अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं थी क्योंकि पूरा काम अंदर ही अंदर हो रहा था।
6 आरोपी गिरफ्तार, 35 हजार का गबन कबूला
एएसपी केएल बंजारे ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और रामगढ़ स्वास्थ्य केंद्र का कंप्यूटर सिस्टम जब्त किया गया है।
पुलिस की अपील
किसी भी दलाल या बिचौलिए के जरिए दस्तावेज बनवाने से बचें। ये मामला अभी जांच के दायरे में है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह से जुड़े और लोगों की पहचान हो सकती है। अभी जांच जारी है।
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