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INDORE. इंदौर में नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) के जरिए हुए अर्बन डायलॉग कार्यक्रम में कई अहम मुद्दे गरमा गए हैं।
NAREDCO केचेयरमैन डॉ. निरंजन हीरानंदानी, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद शंकर लालवानी और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के सामने ये मुद्दा उठाया गया है।
शुक्रवार, 27 फरवरी को ब्रिलियंटन कन्वेंशन सेंटर में यह आयोजन हुआ था। इसमें नरेडको के एपमी चैप्टर के प्रमुख विवेक दम्मानी, संस्था के सचिव सत्यनारायण पप्पू, मंत्री व रियल एस्टेट सेक्टर के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
नरेडको के चेयरमैन ने यह तीन अहम मुद्दे उठाए
1. जीएसटी की तरह कम हो स्टाम्प ड्यूटी
हीरानंदानी ने मुद्दा उठाया कि मध्यप्रदेश में रजिस्ट्री पर सबसे ज्यादा शुल्क लग रहा है, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पीएम नरेंद्र मोदी ने जीएसटी शुल्क कम किया है, उसी तरह इसे भी कम किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि हर जगह यह अधिकतम 5-6 फीसदी है। वहीं एमपी में नगरीय सीमा में 12.50 फीसदी और ग्रामीण में 9.50 फीसदी है। जरूरत है कि बाजार के हिसाब से गाइडलाइन की जाए और ड्यूटी को कम किया जाए।
उनका मानना है कि इससे ब्लैक मनी का भी खतरा नहीं होगा।
2. एफएआर तो सबसे कम है
दूसरा अहम मुद्दा एफएआर का उठाया गया है। एमपी में यह सबसे कम 1.25 ही है, जबकि हैदराबाद तेलंगाना सरकार ने तो यह प्रावधान ही खत्म कर दिया है। इसे बढ़ाएंगे नहीं तो फिर वर्टिकल ग्रोथ कैसे होगी।
दम्मानी ने बताया कि आज प्लॉटिंग और निर्माण के लिए दूर जाना पड़ता है। इंदौर शहरी सीमा में आए 29 गांवों में ही अभी तक इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं हुआ है, तो फिर आगे कैसे काम होगा। जरूरी है वर्टिकल ग्रोथ के लिए एफएआर बढ़ाया जाए।
3. मास्टर प्लान बिना कैसे काम करेगा निवेशक
तीसरा मुद्दा मास्टर प्लान का उठाया गया है। हीरानंदानी ने साफ कहा कि आज महाराष्ट्र में हर गांव, तालुका का मास्टर प्लान मौजूद है। इसके चलते ही महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा निवेश आ रहा है।
निवेशक को जब आपका विकास प्लान ही क्लीयर नहीं होगा तो वह कैसे निवेश करेगा। इसे तो सबसे पहले जारी किया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विधानसभा में बोल चुके हैं कि यह प्लान बनकर डेढ़ साल से सीएम की मंजूरी के पास है। मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लान के चलते इसे होल्ड किया हुआ है।
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मंत्री बोले- सुझाव पर करेंगे काम
नगरीय प्रशासन मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि हमें ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आगे बढ़ना चाहिए। विकास जरूरी है और इसके लिए सरकार भी समर्थन में है कि लेकिन लोगों को सुविधाएं मिले।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी कहा कि 29 गांवों में अभी इतनी सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ है और निगम काम कर रहा है। स्टाम्प ड्यूटी कम करने के लिए हम भी पत्र लिख चुके हैं। सांसद शंकर लालवानी व अन्य ने भी कहा कि सुझावों पर सरकार काम करेगी।
इस तरह लगता है एमपी में रजिस्ट्री शुल्क
नगरीय सीमा में: पांच फीसदी स्टाम्प ड्यूटी, 1 फीसदी पंचायत ड्यूटी, 3 फीसदी निगम ड्यूटी, तीन फीसदी पंजीयन शुल्क और 0.5 फीसदी उपकर (इस तरह 12.50 फीसदी)
ग्रामीण एरिया में: ग्रामीण एरिया में तीन फीसदी निगम ड्यूटी कम हो जाती है। इस तरह वहां 9.50 फीसदी शुल्क लगता है।
वहीं जवाहरलाल नेहरू मिशन के समय साल 2004 में ही पूरे देश में 5 फीसदी स्टाम्प ड्यूटी तय की थी। वहीं, बाद में एमपी व अन्य सरकारों ने इसमें अपने स्तर पर अलग-अलग ड्यूटी, उपकर जोड़ इसे महंगा कर दिया।
महाराष्ट्र में यह 5 फीसदी ही है। वहीं, वहां पंजीयन से आय अधिक है क्योंकि प्रापर्टी महंगी है। यहां बाजार मूल्य पर रजिस्ट्री होती है। इससे शुल्क अधिक मिलता है।
इसके बावजूद, इंदौर में अभी भी बाजार भाव और गाइडलाइन भाव में काफी अंतर रहता है। इससे पंजीयन आय कम होती है। नरेडको का सुझाव है कि गाइडलाइन को बाजार भाव से किया जाए, और रजिस्ट्री शुल्क को 5-6 फीसदी किया जाए। साथ ही एफएआर को बढ़ाया जाए और मास्टर प्लान को लागू किया जाए।
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