मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण का नया फॉर्मूला! बैंक से कर्ज लेकर बनेंगे 7 मार्ग, टोल से होगा कर्ज का भुगतान

Ramanand Tiwari | Oct 27, 2026, 23:16 IST
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मध्य प्रदेश में 80 हजार करोड़ की सड़क योजना!
मध्य प्रदेश में 80 हजार करोड़ की सड़क योजना!

मध्य प्रदेश में सात बड़ी सड़कें बनाने के लिए सरकार अब पैसों का इंतजाम करने का नया तरीका तलाश रही है। इन सड़कों को बनाने में करीब 80 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का शुरुआती अनुमान है। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार इसके लिए बैंकों से कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। इसके बाद सड़कों पर टोल टैक्स से जो कमाई होगी, उससे बैंकों का कर्ज चुकाया जाएगा।

इन सड़कों के बनने से लोगों का सफर आसान हो सकता है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि टोल टैक्स से इतनी कमाई कैसे होगी कि बैंकों का कर्ज समय पर चुकाया जा सके।

सड़क बनाने के लिए अब बैंकों से पैसा जुटाने की तैयारी

मध्य प्रदेश सरकार बड़ी सड़कें बनाने के लिए पैसों का इंतजाम करने का नया तरीका अपना सकती है। सरकार की कोशिश है कि इन सड़कों को बनाने में शुरुआत में सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ न पड़े।

इसके लिए अलग-अलग कंपनियां बनाकर बैंकों से कर्ज लेने की तैयारी है। जब सड़कें बनकर तैयार हो जाएंगी, तो उन पर चलने वाले वाहनों से टोल टैक्स वसूला जाएगा। इसी कमाई से बैंकों का कर्ज चुकाया जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक, महाराष्ट्र में सड़कें बनाने के लिए जिस तरीके से पैसों का इंतजाम किया गया है, उसका भी अध्ययन किया जा रहा है।

हालांकि, मध्य प्रदेश में इस योजना को लागू करने से पहले सरकार को पैसों और प्रशासन से जुड़े कई जरूरी फैसले लेने होंगे। यानी फिलहाल इस व्यवस्था पर विचार चल रहा है, इसे लागू करने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

भोपाल से ग्वालियर और सागर से सतना तक बनेंगे नए सड़क मार्ग

परियोजना से जुड़ी जानकारी के अनुसार, प्रदेश के सात महत्वपूर्ण मार्गों पर निर्माण की तैयारी चल रही है। इनका उद्देश्य प्रमुख शहरों के बीच बेहतर संपर्क बनाना और यात्रा का समय कम करना है।

इनमें सागर से सतना के बीच 218 किलोमीटर, भोपाल से मंदसौर के बीच 320 किलोमीटर और जबलपुर से आशापुर के बीच 256 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की तैयारी है।

इसके अलावा सागर से जबलपुर तक 135 किलोमीटर और कटनी से सिंगरौली तक 135 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना है।

इसी तरह भोपाल से जबलपुर के बीच 239 किलोमीटर और भोपाल से ग्वालियर के बीच 320 किलोमीटर लंबे सड़क मार्ग पर भी काम करने की तैयारी चल रही है।

हालांकि, ये सभी दूरियां अभी शुरुआती योजना के हिसाब से तय की गई हैं। जब इन सड़कों का अंतिम सर्वे होगा और सरकार से मंजूरी मिलेगी, तब इनकी लंबाई में बदलाव भी हो सकता है।

रास्ते आसान होंगे, व्यापार और आवाजाही को भी मिलेगा फायदा

इन सड़क परियोजनाओं से प्रदेश के कई शहरों के बीच यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। खासतौर पर भोपाल, सागर, जबलपुर, सतना और ग्वालियर आने-जाने वाले यात्रियों को राहत मिल सकती है।
वर्तमान में कई मार्गों पर सफर में ज्यादा समय लगता है। नई सड़कें बनने के बाद यात्रा का समय कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

हालांकि, वास्तविक फायदा कितना होगा, यह निर्माण पूरा होने और यातायात शुरू होने के बाद स्पष्ट होगा।

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अफसरों-नेताओं की पसंदीदा वादी में सड़कों की तैयारी! केरवा-कलियासोत के जंगलों पर मंडराया खतरा
27 Oct 2026 ,
By Aman Vaishnav
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अफसरों और नेताओं की पसंदीदा जगह माने जाने वाले केरवा-कलियासोत के जंगलों में बड़ी सड़कें बनाने की तैयारी है। शहर के मास्टर प्लान में ऐसी जगहों पर भी सड़कें प्रस्तावित कर दी गई हैं, जहां न आबादी है और न ही लोगों की ज्यादा आवाजाही होती है। हैरानी की बात यह है कि कुछ सड़कें बाघों के रहने और प्रजनन वाले इलाकों से गुजरेंगी।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अफसरों और नेताओं की पसंदीदा जगह माने जाने वाले केरवा-कलियासोत के जंगलों में बड़ी सड़कें बनाने की तैयारी है। शहर के मास्टर प्लान में ऐसी जगहों पर भी सड़कें प्रस्तावित कर दी गई हैं, जहां न आबादी है और न ही लोगों की ज्यादा आवाजाही होती है। हैरानी की बात यह है कि कुछ सड़कें बाघों के रहने और प्रजनन वाले इलाकों से गुजरेंगी।

सरकार का खर्च अभी बचेगा, लेकिन कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी रहेगी

नई वित्तीय व्यवस्था में प्रत्येक बड़ी परियोजना के लिए अलग कंपनी बनाने की योजना पर विचार हो रहा है। संबंधित कंपनी बैंक से कर्ज लेकर सड़क निर्माण के लिए जरूरी रकम जुटाने का काम करेगी। इससे सरकार को परियोजनाओं का पूरा खर्च शुरुआती दौर में अपने बजट से नहीं उठाना पड़ेगा।

वहीं, बैंक से लिया गया कर्ज ब्याज सहित लौटाना भी जरूरी होगा। इसके लिए सड़क बनने के बाद टोल से होने वाली कमाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

योजना में सरकारी गारंटी की व्यवस्था की बात भी सामने आई है। इसकी अंतिम शर्तें स्पष्ट होने के बाद ही सरकार की वास्तविक जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

टोल से उम्मीद के मुताबिक पैसा नहीं मिला तो कर्ज कैसे चुकाएंगे?

इन परियोजनाओं का सबसे महत्वपूर्ण सवाल निर्माण के बाद मिलने वाली टोल की कमाई से जुड़ा है। यदि किसी सड़क पर अनुमान से कम वाहन चले, तो टोल से होने वाली आमदनी प्रभावित होगी। ऐसी स्थिति में बैंक का कर्ज चुकाने के लिए दूसरी वित्तीय व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है।

सरकार को यह भी देखना होगा कि सड़क बनाने के बाद रखरखाव और ब्याज का खर्च कैसे निकलेगा। इसलिए प्रत्येक मार्ग पर संभावित वाहनों की संख्या और टोल से होने वाली कमाई का आकलन जरूरी होगा।

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26 Oct 2026 ,
By Arohi Raj
भोपाल में शहर की हरियाली पर एक बार फिर संकट मंडरा रहा है। शिवाजी नगर से चार इमली तक करीब 60 हजार पेड़ों पर खतरा है। यह पूरा क्षेत्र लगभग 500 एकड़ में फैला है। यहां री-डेंसिफिकेशन के तहत योजना बनाई जा रही है। इसके तहत पुरानी बस्तियों और सरकारी आवासों को नए तरीके से विकसित किया जा सकता है। इस योजना में ऊंची इमारतें बनाने की भी तैयारी है।
भोपाल में शहर की हरियाली पर एक बार फिर संकट मंडरा रहा है। शिवाजी नगर से चार इमली तक करीब 60 हजार पेड़ों पर खतरा है। यह पूरा क्षेत्र लगभग 500 एकड़ में फैला है। यहां री-डेंसिफिकेशन के तहत योजना बनाई जा रही है। इसके तहत पुरानी बस्तियों और सरकारी आवासों को नए तरीके से विकसित किया जा सकता है। इस योजना में ऊंची इमारतें बनाने की भी तैयारी है।

मंजूरी के बाद साफ होगी तस्वीर

सातों सड़क परियोजनाओं की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 80 हजार करोड़ रुपए बताई गई है। इतनी बड़ी रकम जुटाने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, फिलहाल इन परियोजनाओं की वित्तीय व्यवस्था को लेकर तैयारी चल रही है। अभी सभी मार्गों पर निर्माण शुरू होने की स्थिति नहीं है। परियोजना की मंजूरी, बैंक कर्ज की शर्तें और निर्माण की समयसीमा तय होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

सड़कें जनता के लिए बनेंगी, तो खर्च का हिसाब भी सामने आना चाहिए

प्रदेश में नई सड़कें बनने से लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। लेकिन इन परियोजनाओं की सफलता केवल सड़क निर्माण पूरा होने से तय नहीं होगी।

सरकार को निर्माण लागत के साथ कर्ज, ब्याज और टोल से होने वाली कमाई का भी ध्यान रखना होगा। लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यह होगी कि बेहतर सड़क सुविधा मिले और भुगतान की व्यवस्था पारदर्शी रहे।

अब असली परीक्षा यही होगी कि सरकार सात सड़कें बनाने के साथ उनका आर्थिक बोझ कैसे संभालती है।
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