MP में रोलिंग बजट का नया खेल! खर्च नहीं करने वाले अफसरों पर नजर
Ramanand Tiwari | Aug 19, 2026, 22:25 IST
MP में रोलिंग बजट का नया खेल
मध्यप्रदेश में 2027-28 के रोलिंग बजट से पहले वित्त विभाग पुराने बजट का हिसाब खंगालेगा। विभागों ने जितना पैसा मांगा, कितना मिला और कितना खर्च हुआ इसका मिलान होगा। कम खर्च और गलत अनुमान वाले मामलों में अफसरों की जवाबदेही पर भी सवाल उठेंगे।
समझें क्या है पूरा मामला
मांग और वास्तविक खर्च का आपस में मिलान होगा।
विभागों के लिए तीन साल का रोलिंग बजट बनेगा।
कम खर्च करने वाले अफसरों से जवाब मांगा जाएगा।
सभी प्रस्ताव 7 सितंबर तक भेजने जरूरी होंगे।
अब बजट नहीं, खर्च का हिसाब
यानी विभागों से सिर्फ नई राशि की मांग नहीं पूछी जाएगी। पुराने बजट में मांगी गई रकम, वास्तविक खर्च और योजना के परिणाम का भी मिलान होगा। यहीं से उन विभागों और अफसरों की मुश्किल बढ़ सकती है, जो बजट तो मांगते रहे, लेकिन उपलब्ध राशि का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाए।
बजट मांगने से पहले देना होगा पुराना हिसाब
बजट की कमी या सिस्टम की कमजोरी?
अगर पैसा उपलब्ध था और फिर भी खर्च नहीं हुआ, तो अगली बार उतनी ही राशि मांगने का आधार क्या होगा? और यदि ऐसा बार-बार हो रहा है तो जवाबदेही किसकी होगी योजना की, विभाग की या जिम्मेदार अफसर की?
समीक्षा के बाद भी पैसा क्यों बचा?
क्या समीक्षा सिर्फ आंकड़े जुटाने तक सीमित रह गई?
दो साल का डेटा बनेगा नई कसौटी
अब प्रस्ताव में रकम के साथ कारण भी
तीन साल आगे का भी देना होगा हिसाब
कार्रवाई हुई तो बदलेगा सिस्टम
एमपी सरकार को यह भी देखना होगा कि पैसा क्यों नहीं खर्च हुआ प्रशासनिक देरी, टेंडर प्रक्रिया, कमजोर मॉनिटरिंग या अफसरों की निर्णय क्षमता? अगर इन कारणों पर जिम्मेदारी तय होती है तो रोलिंग बजट महज नई बजट प्रक्रिया नहीं रहेगा।
वरना खतरा वही है कि समीक्षा बैठकें होती रहेंगी, आंकड़े बनते रहेंगे और बजट कागज पर चलता रहेगा, लेकिन जमीन पर पैसा खर्च कराने की जवाबदेही फिर भी तय नहीं होगी।
ये भी पढ़ें...
एमपी में सरकारी कोचिंग का सच : स्कीम और बजट है, लेकिन 3 साल से क्लासेस नहीं
एमपी में अब ठेके पर चलेंगे सरकारी अस्पताल, पहले चरण में 18 अस्पतालों का चयन
एमपी मुख्यमंत्री हाउस रेंट योजना: Gen Z तलाश लो अपना मकान, किराया भरेगी सरकार
सीकर में ASI ने पंचायती राज चुनाव लड़ने के लिए छोड़ी पुलिस की नौकरी, 13 साल सर्विस थी बाकी
By Ashish Bhardwaj
छत्तीसगढ़ में CAT की स्थायी बेंच बनाने की मांग, हाईकोर्ट ने केंद्र से 3 सप्ताह में मांगा जवाब
By Harrison Masih
पहले मंत्री विजयवर्गीय की बैठक में नहीं गईं विधायक मालिनी गौड़, फिर उनकी ही विधानसभा में उठाया पानी की किल्लत का मुद्दा
By Sanjay Gupta
Rajasthan School Exam: अब 25 नवंबर से 7 दिसंबर तक होंगी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं, CBA भी इसी अवधि में
By Jageshwar prasad
नर्सिंग ऑफिसर की हत्या कर मगरमच्छों वाली नदी में फेंका शव, लिव-इन पार्टनर ने रची साजिश, फिर दर्ज कराई गुमशुदगी
By Manya Jain
MP में गहराया बिजली का संकट: 17 हजार मेगावाट पार डिमांड, किसानों के सामने आई सिंचाई की परेशानी
By Manya Jain
मंत्री झाबर सिंह खर्रा की भाभी का टिकट भाजपा से कटा, बेटे ने पहले ही भर दिया था निर्दलीय पर्चा
By Ashish Bhardwaj