MP में महिलाएं अब रात में सुरक्षित, CCTV से मिलेगी मदद

एमपी सरकार ने सेफ सिटी अभियान के तहत 1.25 लाख AI युक्त CCTV कैमरे लगाने की योजना बनाई है। इन कैमरों से महिलाओं की सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी होगी।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  1. मध्य प्रदेश में 'सेफ सिटी' अभियान के तहत 1.25 लाख AI सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

  2. स्मार्ट कैमरे महिलाओं और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर पुलिस को अलर्ट करेंगे।

  3. पुलों पर आत्महत्या रोकने के लिए कैमरे विशेष रूप से प्रोग्राम किए जाएंगे।

  4. 65 हाई-टेक कंट्रोल रूम से प्रदेश की निगरानी की जाएगी।

  5. निर्भया फंड के तहत पुलिस कर्मियों की ड्यूटी और मूवमेंट की निगरानी होगी।

News In Detail

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय ने सेफ सिटी अभियान (सेफ सिटी इनिसिएटिव) के तहत एक नई योजना तैयार की है। इसके तहत प्रदेश के सभी शहरों के संवेदनशील स्थानों पर लगभग सवा लाख अत्याधुनिक वीडियो एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। यह कदम महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बेहद अहम है।

क्या करेंगे ये स्मार्ट कैमरे?

ये स्मार्ट कैमरे न केवल 24 घंटे निगरानी करेंगे, बल्कि सड़क पर किसी भी संभावित खतरे को भांपकर पुलिस कंट्रोल रूम को तत्काल अलर्ट भी भेजेंगे। इन कैमरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये अकेली महिला या संदिग्ध परिस्थितियों की पहचान कर सकते हैं।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी सुनसान गली में महिला अकेली जा रही है या किसी शैक्षिक संस्थान के बाहर पुरुषों के झुंड के बीच कोई लड़की फंसी है, तो सिस्टम इसे खतरे का संकेत मानकर तुरंत कंट्रोल रूम को सूचित कर देगा।

SMART CAMERA

आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने में भी कारगर

इन स्मार्ट कैमरों का उद्देश्य सिर्फ महिला सुरक्षा अभियान तक सीमित नहीं है। बल्कि महिलाओं को पुलों से कूदकर आत्महत्या करने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए भी विशेष रूप से प्रोग्राम किया गया है।

पुलिस मुख्यालय द्वारा शासन को भेजे गए इस एक हजार करोड़ रुपए के मेगा प्रोजेक्ट में पुराने नेटवर्क को भी अपग्रेड किया जाएगा। इन सवा लाख नए कैमरों के साथ रेलवे स्टेशन, डायल 112 और थानों के लगभग 25 हजार कैमरों को एक ही ग्रिड से जोड़ा जाएगा।

लखनऊ मॉडल पर आधारित होगा सुरक्षा सिस्टम

यह पूरी प्रणाली लखनऊ मॉडल पर आधारित होगी। पूरे प्रदेश में 65 हाई-टेक कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे, जहां से इस सिस्टम की मॉनिटरिंग की जाएगी। इस प्रणाली से न केवल महिला सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं, तेज रफ्तार वाहनों और संदिग्ध गतिविधियों पर भी नियंत्रण किया जा सकेगा। निर्भया फंड के तहत शुरू होने वाला यह प्रोजेक्ट पुलिस कर्मियों के मूवमेंट और ड्यूटी की निगरानी को भी प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करेगा।

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