बनने से पहले ही पानी में डूबा 34 करोड़ का सांदीपनि स्कूल, दतिया में इंजीनियरिंग पर सवाल!
Ramanand Tiwari | Oct 07, 2026, 13:26 IST
34 करोड़ के सांदीपनि स्कूल निर्माण में लापरवाही!
दतिया के बड़ौनी में बच्चों के लिए आधुनिक सांदीपनि स्कूल बन रहा है। स्कूल की अनुमानित लागत 34.29 करोड़ रुपए है। वहीं, यह योजना अपनी निर्माण साइट के कारण सवालों में है। साइट पर जमा पानी की तस्वीरें सामने आई हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि पानी क्यों भरा। असली सवाल यह है कि स्कूल बनाने से पहले बरसाती पानी, जमीन के स्तर और स्थायी ड्रेनेज का आकलन कैसे हुआ।
34 करोड़ का स्कूल, पानी में
यानी यह कोई छोटा निर्माण नहीं है। इस परिसर में आने वाले सालों में बच्चे रोज पढ़ने आएंगे। इसलिए इमारत की गुणवत्ता के साथ जमीन और जल निकासी की उपयुक्तता भी उतनी ही जरूरी है।
इतना पानी आया कहां से?
सिर्फ यह कहना काफी नहीं कि बारिश हुई और गड्ढे भर गए। करोड़ों की सार्वजनिक इमारत में यह भी बताना होगा कि भवन बनने के बाद पानी परिसर में न घुसे, इसके लिए क्या इंजीनियरिंग समाधान तय है।
जे.पी. पस्तोर का पक्ष क्या है?
उनके मुताबिक समस्या ऐसी नहीं है कि निर्माण प्रभावित हो। काम जल्द शुरू और तेज हो जाएगा।
यह पक्ष अहम है। पर इससे अगला सवाल भी खड़ा होता है। यदि साइट में कोई समस्या नहीं है, तो एजेंसी को यह बताने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। स्कूल बनने के बाद तालाब और नालों का बरसाती पानी निकलने का स्थायी रास्ता क्या होगा?
मामले पर विशेषज्ञ ने क्या कहा?
विजय सिंह वर्मा के मुताबिक साइट नदी के किनारे है। इसलिए इस पहलू को तकनीकी रूप से गंभीरता से देखा जाना चाहिए था। उनका कहना है कि तस्वीरों से लगता है कि फाउंडेशन लेवल नदी के लेवल से नीचे रखा गया है। ऐसे में पानी भरने की समस्या का तकनीकी आकलन जरूरी है।
उन्होंने साफ किया कि यह राय सिर्फ तस्वीरें देखकर बनी है। अंतिम निष्कर्ष के लिए साइट की तकनीकी जांच जरूरी होगी।
पांच महीने में 2% काम?
यह आंकड़ा अभी मैदानी जानकारी पर आधारित है। इसकी पुष्टि कॉर्पोरेशन के रिकॉर्ड से होनी चाहिए। यदि प्रगति सच में इतनी पीछे है, तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
कौन से दस्तावेज देंगे जवाब?
इन कागजों से साफ हो जाएगा कि बरसात का जोखिम डिजाइन में पहले से शामिल था या निर्माण शुरू होने के बाद सामने आया है।
सरकार सांदीपनि विद्यालयों को बेहतर शैक्षणिक ढांचे के रूप में विकसित कर रही है। इसलिए बड़ौनी का सवाल राजनीति से ज्यादा इंजीनियरिंग की जवाबदेही का है। यदि जलभराव सिर्फ निर्माण के दौरान का है, तो तकनीकी रिपोर्ट इसे आसानी से साबित कर देगी।
आगे क्या होना चाहिए?
इसका जवाब कॉर्पोरेशन को तकनीकी तौर पर साबित करना होगा। साथ ही निर्माण की धीमी रफ्तार पर भी जवाब देना होगा। क्या कॉर्पोरेशन संबंधित इंजीनियरों और निर्माण एजेंसी से समय पर जवाब मांगेगा? या पानी उतरने के साथ सवाल भी उतर जाएंगे?
फिलहाल सबकी नजर कॉर्पोरेशन के अगले कदम पर रहेगी।
सरिस्का छोड़ थानागाजी की सड़क पर पहुंचा टाइगर, थैंक यू बोर्ड इलाके में देखा गया टाइगर, लोगों में दहशत
By Jyoti Mahender Bhardwaj
टीआई दिनेश वर्मा को 6 साल बाद आरोपपत्र, DIG के आरोपत्र देने पर सवाल, हाईकोर्ट से स्टे
By Sanjay Gupta
पुष्कर मेले में इस बार लगान जैसा क्रिकेट, 60 किमी घोड़ों की रेस,धार्मिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन
By Jyoti Mahender Bhardwaj
आबकारी सहायक आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित के आरोप- राजनीतिक प्रभाव में सरकार ने किया निलंबित
By Sanjay Gupta
स्मृति मंधाना की कहानी में इमोशन भी, जीत भी: कभी बनने वाली थीं इंदौर की बहू, अब संभालेंगी टीम इंडिया की कमान
By Arohi Raj
सुप्रीम कोर्ट की चंबल और केन नदी में रेत खनन पर चिंता, तीन राज्यों को हलफनामा देने का आदेश
By Ashish Bhardwaj
जयपुर व्यापार मंडल गेट लगाएंगे तो निगम से लेनी होगी मंजूरी, दिवाली पर फ्री नहीं होगा विज्ञापन
By Jyoti Mahender Bhardwaj