MP के सरकारी स्कूलों की हालत: बजट बढ़ा, फिर भी 5 हजार भवन जर्जर
Atul Dwivedi | Sept 03, 2026, 19:16 IST
mp government schools poor condition
मध्यप्रदेश में शिक्षा बजट लगातार बढ़ा है, लेकिन सरकारी स्कूलों की हालत चिंताजनक है। हजारों स्कूल भवन जर्जर हैं और बड़ी संख्या में स्कूल बंद या मर्ज हो रहे हैं।
आइए अजब गजब मध्यप्रदेश के स्कूलों की बात करते हैं। उन्हीं स्कूलों की बात जिन्हें संवारने के लिए मध्यप्रदेश शिक्षा बजट तो 9 हजार करोड़ बढ़ चुका है, लेकिन स्कूल घटते जा रहे हैं।
देश में अगर 4 हजार 791 स्कूल बंद हुए हैं, तो इनमें 2 हजार 426 स्कूल तो अकेले मध्यप्रदेश के हैं। दूसरी चिंता की बात ये कि 5 हजार सरकारी स्कूल मध्यप्रदेश के ऐसे हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं।
5 तरह के स्कूलों वाला राज्य है मध्यप्रदेश
ऊपर से वनवासी अंचल में जनजातीय कार्य विभाग के स्कूल अलग। लेकिन नतीजा, बच्चों का भविष्य खंडहर में बैठकर बर्बाद हो रहा है। नेताओं के भाषण और अफसरों के प्रेजेंटेशन में सुनहरे सपनों का महल सजाया जाता है।
दावे किए जाते हैं कि शिक्षा की बुनियाद मजबूत है, प्रदेश में इनोवेशन हो रहा है, लेकिन हकीकत कड़वी है। आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि असली तस्वीर इतनी डरावनी है कि जिसे देख कोई भी माता-पिता अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में भेजने से पहले सोचने पर मजबूर हो जाएंगे।
आंकड़े, जो बताते हैं सच्चाई
udise report school education
67 हजार 34 स्कूल तो ऐसे हैं, जहां बच्चों के बैठने के लिए अदद कुर्सी-बेंच तक नहीं हैं। बच्चे या तो फर्श पर बैठते हैं या जमीन पर। और 15 हजार 651 स्कूलों में बिजली नहीं है। गर्मी के मौसम में पसीने से तरबतर बच्चे अंधेरे में पढ़ने को मजबूर होते हैं।
school education udise report
इस पर जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों का 12 साल का बजट अलग है। इस विभाग के सरकारी स्कूलों पर साल 2015 से 2026 तक कुल 75 हजार 108 करोड़ की भारी भरकम रकम खर्च हो चुकी है। लेकिन जमीन पर नतीजा, खंडहर, जर्जर, बिना बिजली, बिना फर्नीचर के स्कूल।
2021 से 2026 के बीच शिक्षा विभाग सिर्फ स्कूलों के निर्माण के नाम पर 5 हजार 200 करोड़ रुपए बहा चुका है, लेकिन बच्चे अब भी ऐसे कमरों में पढ़ रहे हैं, जिनमें दरारें चौड़ी हो चुकी हैं, छत गिरने को तैयार है और बरसात में क्लासरूम तालाब बन जाते हैं। द सूत्र ने सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत भी बताई थी। हमने भोपाल, विदिशा जैसे जिलों के सरकारी स्कूलों की पड़ताल की थी। जहां देखने में आया कि स्कूल की इमारत खंडहर हो चुकी है। स्कूल तक जाने को रास्ता भी नहीं है। बच्चे कीचड़ के बीच से स्कूल जाते हैं।
पढ़ाई या खंडहर दर्शन?
मध्यप्रदेश में तेजी से घट रहे स्कूल
मर्जर का असर छात्रों पर
ऐसे में सरकारी रिपोर्ट ही सवाल खड़े कर रही हैं कि जब बजट बढ़ रहा है, तो फिर स्कूल बंद क्यों हो रहे हैं।
FAQ
- देशभर में कितने सरकारी स्कूल बंद या मर्ज हुए हैं और इसमें मध्यप्रदेश का हिस्सा कितना है?
यूडाइस प्लस रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में एक साल में कुल 4,791 सरकारी स्कूल बंद या मर्ज हुए हैं। इनमें से आधे यानी 2,426 स्कूल अकेले मध्यप्रदेश के हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है। - मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा का बजट कितना बढ़ा है?
वर्ष 2022-23 की तुलना में मध्यप्रदेश का स्कूल शिक्षा बजट बढ़कर करीब 36,730 करोड़ रुपए हो गया है। यानी तीन साल में इसमें करीब 9 हजार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है, इसके बावजूद स्कूलों की संख्या घटी है। - स्कूलों के मर्जर से बच्चों पर क्या असर पड़ सकता है?
कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज करने से बच्चों को पढ़ाई के लिए पहले से ज्यादा दूरी तय करनी पड़ सकती है। इसका असर खासतौर पर ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों पर ज्यादा पड़ सकता है।
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