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News in Short
स्कूलों को डिजिटल क्लासरूम बनाने और पार्किंग शैड-स्टैंड की आड़ में करोड़ों की हेराफेरी सामने आई है।
लोक शिक्षण संचालनालय इसके लिए 10 हजार 149 इंटरएक्टिव पैनल की खरीदी कर रहा है।
एक पैनल के लिए 44 हजार ज्यादा का भुगतान, तो दूसरी ओर बिना टेंडर शैड-स्टैंड की आड़ में घोटाला किया गया है।
जिस पैनल को डीपीआई 1.14 लाख रुपए में खरीद रहा है, उसे दूसरे राज्यों में 70 से 80 हजार रुपए में खरीदा गया है।
डिजिटल क्लासरूम के नाम पर ज्यादा भुगतान की शिकायत पर स्कूल शिक्षा मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं।
News in Detail
BHOPAL. मध्य प्रदेश में अब गड़बड़ियां स्कूल शिक्षा विभाग की पहचान बन गई हैं। शैक्षणिक व्यवस्था हो या किसी तरह की खरीदारी, विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े हो ही जाते हैं। किचन सामग्री, फर्नीचर खरीदी के 100 करोड़ के टेंडर पर सवाल उठ रहे हैं।
इस बीच डिजिटल क्लासरूम और पार्किंग शैड के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी सामने आई है। लोक शिक्षण संचालनालय 70-80 हजार रुपए कीमत के इंटरएक्टिव पैनल 1.14 लाख रुपए की दर से खरीद रहा है। वहीं स्कूलों में साइकिल स्टैंड और पार्किंग शैड के लिए बिना टेंडर और वर्क ऑर्डर लाखों रुपए का भुगतान कर दिया गया है।
1. पहला कारनामा
दरअसल, केंद्र सरकार ने सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम तैयार करने के लिए 150 करोड़ रुपए दिए हैं। इस बजट से प्रदेश के 10 हजार से ज्यादा स्कूलों में 10,149 इंटरएक्टिव पैनल यानी बहुउद्देश्यीय एलईडी स्क्रीन लगाई जानी है। पिछले सत्र में समग्र शिक्षा अभियान के तहत यही इंटरएक्टिव पैनल 1.10 लाख रुपए प्रति नग की दर से खरीदा था। तब इसमें भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई थी।
स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदयप्रताप सिंह के आदेश पर इसकी विभागीय जांच भी की जा रही है। इस बीच अब यही इंटरएक्टिव पैनल डीपीआई ने 1.14 लाख रुपए प्रति नग में खरीदने की तैयारी कर ली है। चंद महीनों में ही पैनल की कीमत में चार हजार के इजाफे ने इस खरीदी को संदेह में डाल दिया है।
गलत निर्णय से करोड़ों का फटका
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा की जा रही इंटरएक्टिव पैनल की खरीदी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मध्य प्रदेश में जिन पैनल को 1.14 लाख रुपए की दर से खरीदा जा रहा है, वे दूसरे राज्यों में 70 से 80 हजार रुपए की दर से खरीदे गए हैं। इंटरएक्टिव पैनल के लिए बुलाए गए टेंडर में व्यू सोनिक कंपनी और दूसरी कंपनियों ने भी 70 से 80 हजार रुपए की दर ऑफर की थी।
हालांकि इन टेंडरों को कमियां बताकर खारिज कर दिया गया। कम दर को ठुकराने के बाद डीपीआई ने दोबारा टेंडर बुलाना भी जरूरी नहीं समझा। यही नहीं न्यूनतम दर से करीब 44 हजार रुपए अधिक के टेंडर को स्वीकृति दे दी गई।
डीपीआई कमिश्नर ने साधी चुप्पी
मध्य प्रदेश के 10 हजार 149 स्कूलों के लिए खरीदे जा रहे हर पैनल पर 44 हजार रुपए अधिक का भुगतान किया जाएगा। यानी केंद्र से मिले 150 करोड़ में से 40 करोड़ रुपए बेकार ही चुका दिए जाएंगे। जबकि न्यूनतम दर पर यही पैनल 71 करोड़ रुपए खर्च कर खरीदे जा सकते थे।
करोड़ों की इसी बर्बादी को लेकर शिकायत स्कूल शिक्षा विभाग और मुख्य सचिव से भी की गई है। इस खरीदी की शिकायत पूर्व में डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता से भी की जा चुकी है लेकिन वे अब इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
2. दूसरा कारनामा
उधर स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी साइकिल स्टैंड और पार्किंग शैड की आड़ में भी कमाई करने से नहीं चूके। मैहर के सांदीपनी विद्यालय में साइकिल स्टैंड और पार्किंग शैड के नाम पर लाखों रुपए का फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसके बाद प्रशासन ने स्कूलों में कराए गए कामों का भौतिक सत्यापन कराया है।
सरकारी स्कूलों की जांच के लिए एसडीएम, तहसीलदार, बीईओ, बीआरसी, पटवारी सहित छह सदस्यीय टीम बनाई गई है। जांच टीम को स्कूलों में पुताई ही मिली है जबकि साइकिल स्टैंड और पार्किंग शैड गायब हैं जबकि इनमें नाम पर लाखों रुपए का भुगतान दर्शाया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेश के ज्यादातर स्कूलों में काम के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी की आशंका है।
बिना टेंडर करोड़ों का भुगतान
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सांदीपनी विद्यालयों सहित सभी प्रमुख स्कूलों में साइकिल स्टैंड और पार्किंग शैड के लिए राशि दी गई है। इसके तहत स्कूलों में शैड और स्टैंड बनाने की जानकारी विभाग को भेजकर भुगतान भी कर दिया गया है।
इस काम के लिए वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर भोपाल, रुद्र इंटरप्राइजेज और महाकाल ट्रेडर्स को 17 स्कूलों से 3.72 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। कई स्कूलों से शैड और स्टैंड के लिए 21 लाख से भी ज्यादा रुपए के बिल पास किए गए हैं। इतनी अधिक राशि के काम कराने के लिए विभागीय स्तर पर टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और न ही कोई वर्क ऑर्डर जारी किया गया।
एफआईआर और वसूली की तलवार
मैहर जिले में साइकिल स्टैंड और पार्किंग शैड के निर्माण में आर्थिक गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट कलेक्टर रानी बाटड को सौंप दी है। जांच टीम ने पौने चार करोड़ रुपए के भुगतान की अनियमितता पर 14 स्कूल प्राचार्यों की भूमिका संदेहास्पद पाई है। उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी कलेक्टर से की है। जिसके बाद प्राचार्यों से वसूली के साथ ही उनके विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की तलवार भी लटकी हुई है।
कार्रवाई से बच रहे अधिकारी
इंटरएक्टिव पैनल खरीदी में अनियमितता के मामले में डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता का कहना है, खरीदी के लिए टेंडर प्रक्रिया का पालन किया गया है। विभाग की समिति और एक्सपर्ट्स के मार्गदर्शन में खरीदी हो रही है।
वहीं स्कूलों में साइकिल स्टैंड और शैड के निर्माण के बिना ही भुगतान के मामले में जांच टीम के प्रमुख एसडीएम एसपी मिश्रा का कहना है स्कूलों में निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट सौंपी गई है। कुछ गड़बड़ी मिली है जिस पर कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है।
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