शिक्षा के मंदिर में टेंडर का खेल: डीपीआई से छीना काम, अब पाठृयपुस्तक निगम बन रहा भ्रष्टाचार का नया अड्डा
Sanjay Sharma | Feb 04, 2026, 20:24 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग में 100 करोड़ के टेंडर पर घमासान। DPI से काम छीनकर पाठ्यपुस्तक निगम को दिया, पर वहां भी चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के आरोप।
News in Short
- मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के लिए की जानी है शैक्षणिक सामग्री, फर्नीचर और किचन उपकरण की खरीदारी।
- टेंडर में गड़बड़ी से नाराज स्कूल शिक्षा विभाग ने डीपीआई की जगह पाठ्यपुस्तक निगम को सौंपा है टेंडर का जिम्मा।
- 100 करोड़ रुपए से अधिक कीमत के टेंडर चहेती कंपनियों को देने के लिए शर्तों में बदलाव के लग रहे हैं आरोप।
- किचन सामग्री के टेंडर की सूची में अधिकारियों ने फर्नीचर और भारी भरकम उपकरण भी कर लिए हैं शामिल
- छोटे उद्योगों को टेंडर से बाहर करने से मध्य प्रदेश की एमएसएमई नीति के प्रावधान भी हुए हैं प्रभावित।
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News in Detail
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25 करोड़ के टेंडर में सिंगल ऑर्डर की पाबंदी :
वहीं स्कूलों के किचन में उपयोगी उपकरणों की सप्लाई के टेंडर में भी गड़बड़ी सामने आई है। इसमें फर्नीचर और मंहगे उपकरण शामिल किए गए हैं। 23 जनवरी को जारी इस टेंडर के जरिए प्रदेश के 116 स्कूलों को किचन सामग्री और 170 स्कूलों में उपकरण उपलब्ध कराए जाने हैं। इस टेंडर की अनुमानित राशि 25 करोड़ रुपए रखी गई है।
छोटे उद्योगों को बेतुकी शर्तों से किया बाहर :
वहीं प्रतिस्पर्धा सीमित होने से बड़े कारोबारियों का टेंडर हथियाने का रास्ता साफ हो गया है। इन टेंडरों में बिडर फर्म से किचन सामग्री सप्लाई का अनुभव मांगा गया है जबकि टेंडर सूची में वर्किंग टेबल, वर्टिकल फ्रीज, वॉल माउंट सेफ, वाटर कूलर जैसे उपकरण शामिल किए गए हैं।
टेंडर की समय सीमा में भी कर दी कटौती :
चहेती कंपनियों को टेंडर देने के लिए नियमों की अनदेखी भी की गई है। प्री- बिड के बाद जहां कंपनियों को 30 दिन का समय दिया जाता है वहीं इस टेंडर में निविदा की समय सीमा 10 फरवरी तक सीमित कर दी गई है।
मंत्री की नाराजगी से निगम को मिला मौका :
इसके लिए स्कूल शिक्षा मंत्री की नाराजगी को वजह बताया जा रहा है। उनके आदेश के बाद पाठ्यपुस्तक निगम को 100 करोड़ रुपए के अलग- अलग टेंडर सौंपे गए हैं। यानी शैक्षणिक सामग्री, साइंस किट, फर्नीचर और किचन सामग्री की खरीदारी के टेंडर की शर्त तय करने और कंपनियों के चयन की जिम्मेदारी निगम के पास है।
पोर्टल पर जारी टेंडर में नहीं राशि का उल्लेख :
हांलाकि इन सभी टेंडरों की लागत राशि का उल्लेख टेंडर पोर्टल पर नहीं है। इस वजह से इन टेंडरों के जरिए चहेती कंपनियों को काम देकर तगड़ी कमाई की चर्चाएं भी निगम से डीपीआई के बीच जमकर हो रही हैं।
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टेंडर पूरी तरह प्रक्रिया पर आधारित :
वहीं पाठ्यपुस्तक निगम के एमडी विनय निगम के अनुसार उन्हें पहली बार यह मोका मिला है। डीपीआई द्वारा जिस तरह प्रक्रिया को अपनाया जाता था निगम भी उसी को आगे बढ़ा रहा है। कहीं कोई आपत्ति की स्थिति है तो उसे प्री- बिड में उठाया जा सकता है।
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