शिक्षा के मंदिर में टेंडर का खेल: डीपीआई से छीना काम, अब पाठृयपुस्तक निगम बन रहा भ्रष्टाचार का नया अड्डा

मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग में 100 करोड़ के टेंडर पर घमासान। DPI से काम छीनकर पाठ्यपुस्तक निगम को दिया, पर वहां भी चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के आरोप।

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Sanjay Sharma
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Conflict over tender worth Rs 100 crore in Madhya Pradesh Education Department

Photograph: (the sootr)

News in Short 

  • मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के लिए की जानी है शैक्षणिक सामग्री, फर्नीचर और किचन उपकरण की खरीदारी।
  • टेंडर में गड़बड़ी से नाराज स्कूल शिक्षा विभाग ने डीपीआई की जगह पाठ्यपुस्तक निगम को सौंपा है टेंडर का जिम्मा।
  • 100 करोड़ रुपए से अधिक कीमत के टेंडर चहेती कंपनियों को देने के लिए शर्तों में बदलाव के लग रहे हैं आरोप।
  • किचन सामग्री के टेंडर की सूची में अधिकारियों ने फर्नीचर और भारी भरकम उपकरण भी कर लिए हैं शामिल
  • छोटे उद्योगों को टेंडर से बाहर करने से मध्य प्रदेश की एमएसएमई नीति के प्रावधान भी हुए हैं प्रभावित। 

Intro

BHOPAL. मध्य प्रदेश में नौनिहालों की शिक्षा, उनके खेल और सपनों पर भ्रष्टाचार का दीमक लग चुका है। टेंडर खेल के लिए कुख्यात डीपीआई से इस बार जिम्मेदारी छीनकर पाठ्यपुस्तक निगम को दी गई है। लेकिन, यहां भी चहेती कंपनियों को काम दिलाने के आरोप लग रहे हैं। 

News in Detail

मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों में शैक्षणिक सामग्री, फर्नीचर और किचन सामग्री की खरीदी को स्वीकृति दी है। विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारी टेंडर तैयार करने में जुट गए थे। इस बीच पुराने टेंडरों में शर्तों की हेराफेरी, चहेती कंपनियों को टेंडर देने की शिकायतों से नाराज विभाग ने डीपीआई से यह काम छीन लिया। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदयप्रताप के आदेश पर अब टेंडर की प्रक्रिया का दायित्व पाठ्यपुस्तक निगम को सौंपा गया है। हालांकि 100 करोड़ के टेंडर हाथ में आने के बाद निगम पर भी गड़बड़ियों के आरोप लग रहे हैं। 

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25 करोड़ के टेंडर में सिंगल ऑर्डर की पाबंदी :

दरअसल, पाठ्यपुस्तक निगम ने किचन सामग्री के लिए जो टेंडर किए हैं, उसकी शर्तें सवालों में हैं। किचन सामग्री के 25 करोड़ रुपए के इस टेंडर के लिए कंपनियों के सामने 18 करोड़ रुपए के सिंगल ऑर्डर और 80 करोड़ रुपए के टर्नओवर की शर्त रखी गई है। सामग्री खरीदी के टेंडरों में टर्नओवर का अनुपात बेतुका है।

वहीं स्कूलों के किचन में उपयोगी उपकरणों की सप्लाई के टेंडर में भी गड़बड़ी सामने आई है। इसमें फर्नीचर और मंहगे उपकरण शामिल किए गए हैं। 23 जनवरी को जारी इस टेंडर के जरिए प्रदेश के 116 स्कूलों को किचन सामग्री और 170 स्कूलों में उपकरण उपलब्ध कराए जाने हैं।  इस टेंडर की अनुमानित राशि 25 करोड़ रुपए रखी गई है।  

छोटे उद्योगों को बेतुकी शर्तों से किया बाहर :

मध्य प्रदेश में टेंडरों में छोटे, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं। वहीं पाठ्यपुस्तक निगम ने जो टेंडर जारी किए हैं उनकी शर्त सरकार की नीति ओर मंशा के विपरीत हैं। इन शर्तों के कारण किचन सामग्री और उपकरण बनाने वाले एमएसएमई उद्योग बाहर हो गए हैं।

वहीं प्रतिस्पर्धा सीमित होने से बड़े कारोबारियों का टेंडर हथियाने का रास्ता साफ हो गया है।  इन टेंडरों में बिडर फर्म से किचन सामग्री सप्लाई का अनुभव मांगा गया है  जबकि टेंडर सूची में वर्किंग टेबल, वर्टिकल फ्रीज, वॉल माउंट सेफ, वाटर कूलर जैसे उपकरण शामिल किए गए हैं।  

टेंडर की समय सीमा में भी कर दी कटौती :

टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी के जिन आरोपों की वजह से यह दायित्व डीपीआई से वापस लिया गया है। अब पाठ्यपुस्तक निगम भी उसी में जुटा है। अधिकारी अपनी पसंदीदा कंपनियों को टेंडर देने के लिए शर्तों को उलट- पलट रहे हैं। यही नहीं, टेंडर की श्रेणियों के बाहर जाकर सूची में सामग्री को जोड़ा- घटाया जा रहा है।

चहेती कंपनियों को टेंडर देने के लिए नियमों की अनदेखी भी की गई है। प्री- बिड के बाद जहां कंपनियों को 30 दिन का समय दिया जाता है वहीं इस टेंडर में निविदा की समय सीमा 10 फरवरी तक सीमित कर दी गई है। 

मंत्री की नाराजगी से निगम को मिला मौका :

सरकार ने स्कूलों के लिए शैक्षणिक सामग्री से लेकर अन्य सभी संसाधनों की उपलब्धता के लिए लोक शिक्षण संचालनालय को अधिकृत किया है। स्कूल शिक्षा विभाग के लिए होने पर खरीदारी के टेंडरों पर लगातार सवाल उठने की वजह से इस बार यह मौका डीपीआई से वापस लिया गया है। 

इसके लिए स्कूल शिक्षा मंत्री की नाराजगी को वजह बताया जा रहा है। उनके आदेश के बाद पाठ्यपुस्तक निगम को 100 करोड़ रुपए के अलग- अलग टेंडर सौंपे गए हैं। यानी शैक्षणिक सामग्री, साइंस किट, फर्नीचर और किचन सामग्री की खरीदारी के टेंडर की शर्त तय करने और कंपनियों के चयन की जिम्मेदारी निगम के पास है। 

पोर्टल पर जारी टेंडर में नहीं राशि का उल्लेख : 

पाठ्यपुस्तक निगम के अधिकारी बेमौसम मिले इस अवसर को भुनाने के लिए बेताव नजर आ रहे हैं। जिन आरोपों से कभी डीपीआई दागदार था अब वहीं कार्यशैली निगम के अधिकारियों ने अपना ली है। टेंडर के लिए जो शर्तें पहले तैयार की गई थी अब उन्हें बदलकर टेंडर के साथ वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।

हांलाकि इन सभी टेंडरों की लागत राशि का उल्लेख टेंडर पोर्टल पर नहीं है। इस वजह से इन टेंडरों के जरिए चहेती कंपनियों को काम देकर तगड़ी कमाई की चर्चाएं भी निगम से डीपीआई के बीच जमकर हो रही हैं। 

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टेंडर पूरी तरह प्रक्रिया पर आधारित :

मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के जीएम संजीव त्यागी का कहना है विभाग ने टेंडर के लिए निगम को अधिकृत किया है। टेंडर कमेटी की अनुशंसा पर किचन सामग्री के साथ फर्नीचर और उपकरण सूची में शामिल किए गए हैं। इन समिति में निगम के अलावा डीपीआई के अधिकारी भी शामिल हैं। टेंडर की शर्तों से किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने के आरोप निराधार हैं।

वहीं पाठ्यपुस्तक निगम के एमडी विनय निगम के अनुसार उन्हें पहली बार यह मोका मिला है। डीपीआई द्वारा जिस तरह  प्रक्रिया को अपनाया जाता था निगम भी उसी को आगे बढ़ा रहा है। कहीं कोई आपत्ति की स्थिति है तो उसे प्री- बिड में उठाया जा सकता है।

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