मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण के नाम पर अंधा खेल, ऐसे लग रही करोड़ों रुपए में सेंध
Ravi Awasthi | Jan 14, 2026, 09:00 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की योजनाओं में धांधली सामने आई है। स्व-सहायता समूहों में 1800 करोड़ रुपए जमा है, लेकिन सरकार के पास इसका कोई रिकार्ड नहीं है।
NEWS IN SHORT
- मध्यप्रदेश में महिला स्व-सहायता समूह के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला हो रहा है।
- स्व-सहायता समूहों के खातों में 1800 करोड़ रुपए जमा, लेकिन इसका सही हिसाब नहीं है।
- CRP के खातों में पैसे डालकर गड़बड़ियां की जा रही हैं, महिला सदस्यों को नहीं मिल रहे सही लाभ।
- भ्रष्टाचार का मामला सामने आने पर मिशन मुख्यालय ने जिला पंचायत सीईओ को निगरानी सौंपने का निर्णय लिया।
- अब निगरानी प्रणाली को मजबूत करने के लिए राज्यस्तरीय सेमिनार आयोजित करने की योजना है।
NEWS IN DETAIL
प्रदेश में इस वक्त 5 लाख से ज्यादा स्व-सहायता समूह हैं। इनसे 62 लाख से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं। हर गांव में औसतन 15 से 20 समूह हैं। इनके ऊपर ग्राम संगठन, क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) और ब्लॉक स्तर तक की पूरी चेन खड़ी है। कागजों पर यह व्यवस्था मजबूत दिखती है, लेकिन जमीन पर सबसे कमजोर निगरानी है। पैसा लगातार खातों में घूम रहा है, लेकिन उसे देखने और पकड़ने वाला कोई ठोस सिस्टम नहीं है।
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खातों में करोड़ों, इस्तेमाल अपनी मर्जी से
इसका नतीजा यह होता है कि कई ग्राम संगठन और CLF के खातों में करोड़ों रुपए जमा हो जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि कई जगह यह पैसा महिलाओं की आय बढ़ाने के बजाय दूसरे रास्तों में मोड़ा जा रहा है। खासतौर पर यह रकम क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (CRP) के खातों में डाली जा रही है। इसके बदले संबंधित महिला को कुछ हजार रुपए देकर बाकी पैसा निकाल लिया जाता है। यह कोई इक्का-दुक्का मामला नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीका बन चुका है।
जांच के बाद खुला मामला
ये तो बहुत गजब है...
सूत्रों का मानना है कि यह गड़बड़ी केवल ब्लॉक स्तर तक सीमित नहीं हो सकती और इसकी परतें ऊपर तक जाती हैं।
आसान भाषा में समझिए पूरा खेल...
CRP कौन होते हैं?
पैसा CRP के खाते में क्यों जाता है?
कैसे पता चला लीकेज
आप ऐसे समझें..
अब दमोह जिले के उदाहरण से समझिए। यहां एक ब्लॉक में 6 संगठन खाते हैं। इन्हें मिलाकर एक क्लस्टर बनाया गया है। इसी क्लस्टर के लिए CRP नियुक्त किए जाते हैं। यहीं से खेल शुरू होता है। इन्हीं CRP के खातों में पैसा डाला जाता है और फिर पैसा निकाल लिया जाता है।
निगरानी किसके हाथ में थी?
एसआरएलएम की सीईओ हर्षिका सिंह भी मानती हैं कि इस सिस्टम में लीकेज संभव है। उनका कहना है कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तीन नए सॉफ्टवेयर तैयार किए जा रहे हैं। सभी बैंक खातों को पूरी तरह डिजिटलीकृत किया जाएगा, ताकि एक क्लिक में पूरी जानकारी सामने आ सके।
अब आगे क्या?
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योजना जमीन पर कैसे चलती है?
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