एमपी टूरिज्म में चार करोड़ की गड़बड़ी, सरकारी पैसा पर्सनल अकाउंट में डालता था कर्मचारी
Aman Vaishnav | Apr 24, 2026, 13:42 IST
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मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम में चार करोड़ के घोटाले का मामला सामने आया है। मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव पीयूष सिंह पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। जांच करने पर होटल और सफारी बुकिंग में बड़ी गड़बड़ी देखी गई है।
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (MPTDC) में लगभग चार करोड़ रुपए का गबन हुआ है। निगम की मार्केटिंग शाखा में काम करने वाले मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव पीयूष कुमार सिंह पर धोखाधड़ी, गबन और विश्वासघात के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में एमपीटीडीसी ने कमला नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह गड़बड़ी वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर 2026 तक के दौरान हुई है। घोटाले का खुलासा तब हुआ जब लेखा शाखा ने 2022-23 के खातों की जांच की।
जांच के दौरान होटल और जंगल सफारी की बुकिंग रिकॉर्ड और बैंक में जमा राशि के बीच बड़ा फर्क देखा गया है। हैरानी की बात है कि इसके बाद जब और गहराई से जांच की गई तो जुबो (DJUBO) सॉफ्टवेयर में भी हेरफेर की जानकारी सामने आई है।
जांच में पता चला कि आरोपी ने सॉफ्टवेयर में दो तरह की मनी रसीदें तैयार की थीं।
1.HOBPL
2. HOBHO
HOBPL: रसीदों से जो भी रकम आई, वह एमपीटी के खाते में सही तरीके से जमा होती रही।
HOBHO: रसीदों से ली गई रकम बैंक में जमा ही नहीं की गई थी।
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इस मामले में एक और सबसे हैरान करने वाली बात सामने आई है। इन दोनों तरह की रसीदों पर ग्राहकों को होटल बुकिंग और जंगल सफारी जैसी सेवाएं मिलती रहीं। इससे इस गड़बड़ी पर किसी का ध्यान नहीं गया और मामला दबा रहा।
MPTDC प्रबंधन का कहना है कि वे आंतरिक जांच कर रहे हैं। पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच हो रही है। पुलिस भी इस मामले के आर्थिक पहलू पर ध्यान देते हुए जांच कर रही है।
भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि MPTDC के मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव पीयूष कुमार ने ग्राहकों से मिली रकम को निगम के खाते में जमा नहीं की थी।
ये राशि सीधे अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर ली गई थी। उन्होंने जुबो सॉफ्टवेयर में HOBHO श्रेणी की रसीदें तो बनाईं, लेकिन रकम को सिस्टम से बाहर रखकर करोड़ों का गबन कर लिया।
जांच के दौरान यह भी पता चला है कि इस घोटाले में कुछ ट्रैवल एजेंट्स की भूमिका भी संदिग्ध है। इसके लिए भी अब इनसे पूछताछ की जाएगी।
समय के साथ बढ़ता गया
2022-23 में 39 लाख 16 हजार रुपए को घोटाला हुआ था। वहीं 2023-24 में 56 लाख 13 हजार रुपए का घोटाला हुआ था।
2024-25 की बात करें तो इस समय एक करोड़ 19 लाख रुपए का घोटाला हुआ था। 2025-26 में फरवरी तक एक करोड़ 76 लाख रुपए का घोटाला हो चुका है।
राज्य पर्यटन विकास निगम ने सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड कमला नगर थाना पुलिस को सौंप दिए हैं। अब पुलिस बैंक खातों, सॉफ्टवेयर लॉग और संपत्तियों की जांच कर रही है।
साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि गबन के दौरान जो पैसे लिए गए, उनसे कोई संपत्ति तो नहीं खरीदी गई। जांच के बाद गिरफ्तारी और कुछ और लोगों की संलिप्तता का भी पता चल सकता है।
पीयूष कुमार मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव हैं। उनकी पत्नी किरण यादव उर्फ खुशबू यादव पहले मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के फिल्म फेसिलिटेशन सेल में काम कर चुकी हैं, लेकिन करीब 7-8 महीने पहले उन्होंने एमपीटी बोर्ड की नौकरी छोड़ दी थी। इसी दौरान उनकी तरफ से रायसेन रोड पर एक आलीशान विला, कैफे और एक एडवेंचर कार खरीदी जाने की जानकारी सामने आई है। पर्यटन निगम में चर्चा है कि इन संपत्तियों की खरीद में गबन की राशि का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि पीयूष कुमार का कहना है कि इस गबन से उनका कोई लेना-देना नहीं है और वे रोजाना ऑफिस जा रहे हैं। ये खबरें भा पढ़िए...
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जंगल सफारी की बुकिंग रिकॉर्ड में गड़बड़ी
जांच के दौरान होटल और जंगल सफारी की बुकिंग रिकॉर्ड और बैंक में जमा राशि के बीच बड़ा फर्क देखा गया है। हैरानी की बात है कि इसके बाद जब और गहराई से जांच की गई तो जुबो (DJUBO) सॉफ्टवेयर में भी हेरफेर की जानकारी सामने आई है।
जांच में पता चला कि आरोपी ने सॉफ्टवेयर में दो तरह की मनी रसीदें तैयार की थीं।
1.HOBPL
2. HOBHO
HOBPL: रसीदों से जो भी रकम आई, वह एमपीटी के खाते में सही तरीके से जमा होती रही।
HOBHO: रसीदों से ली गई रकम बैंक में जमा ही नहीं की गई थी।
Regular_Saurin%20Pandya-390170
सेवाएं मिलती रहीं, गड़बड़ी चलती रही
MPTDC प्रबंधन का कहना है कि वे आंतरिक जांच कर रहे हैं। पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच हो रही है। पुलिस भी इस मामले के आर्थिक पहलू पर ध्यान देते हुए जांच कर रही है।
ट्रैवल एजेंट्स भी शामिल
ये राशि सीधे अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर ली गई थी। उन्होंने जुबो सॉफ्टवेयर में HOBHO श्रेणी की रसीदें तो बनाईं, लेकिन रकम को सिस्टम से बाहर रखकर करोड़ों का गबन कर लिया।
जांच के दौरान यह भी पता चला है कि इस घोटाले में कुछ ट्रैवल एजेंट्स की भूमिका भी संदिग्ध है। इसके लिए भी अब इनसे पूछताछ की जाएगी।
समय के साथ बढ़ता गया घोटाला
2024-25 की बात करें तो इस समय एक करोड़ 19 लाख रुपए का घोटाला हुआ था। 2025-26 में फरवरी तक एक करोड़ 76 लाख रुपए का घोटाला हो चुका है।
संपत्तियों की जांच कर रही पुलिस
साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि गबन के दौरान जो पैसे लिए गए, उनसे कोई संपत्ति तो नहीं खरीदी गई। जांच के बाद गिरफ्तारी और कुछ और लोगों की संलिप्तता का भी पता चल सकता है।
आलीशान विला, कैफे और एक एडवेंचर कार
टीटी नगर की एसीपी अंकिता खातरकर का कहना है कि इस मामले में संबंधित थाने से पूरी जानकारी ली जा रही है। सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जाएगी। शुरुआती जानकारी मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मंदसौर-उज्जैन में बीमा धोखाधड़ी: मृतकों के फर्जी क्लेम से 8 करोड़ ठग
एक्सेल व्हीकल का फर्जीवाड़ा उजागर, लोन के नाम पर की 42 करोड़ की धोखाधड़ी
मध्यप्रदेश न्यूज: गेंहू खरीदी में घोटाला, बिना स्लॉट बुकिंग नेताजी का 84 लाख का गेंहू तुल गया
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