मध्य प्रदेश परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का खेल: वर्दी की आड़ में बना लिया करोड़ों का साम्राज्य

Sanjay Sharma | Apr 03, 2026, 21:00 IST
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Photograph: (the sootr)

मध्य प्रदेश परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं। कर्मचारियों द्वारा अवैध वसूली और संपत्ति जमा करने के मामले सामने आए हैं, जांच जारी है।

News in Short

  • परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं।
  • कर्मचारियों ने चेक पोस्टों पर अवैध वसूली की।
  • अधिकारी अपनी अवैध कमाई से रियल एस्टेट में निवेश कर रहे हैं।
  • लोकायुक्त और ईडी ने कई भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्तियां जब्त कीं।
  • विभाग कोर्ट में केस चलाने में हिचकिचा रहा है।

Intro

मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार गहरी पैठ बना चुका है। विभाग में चेक पोस्टों पर अवैध वसूली और अधिकारियों द्वारा काली कमाई के मामलों ने पूरे सिस्टम को दागदार बना दिया है। आरक्षक से लेकर उच्च अधिकारियों तक, सभी पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू की कार्रवाई से कई मामलों का पर्दाफाश हुआ है, लेकिन विभाग कोर्ट में केस चलाने में हिचकिचा रहा है।

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News in Detail

BHOPAL.मध्य प्रदेश परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं ईओडब्ल्यु और लोकायुक्त की कार्रवाई उजागर कर रही हैं। बीते चंद सालों में परिवहन विभाग में चेक पोस्ट- चेक पाइंट पर वसूली के अलावा अधिकारियों के भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले सामने आए हैं।

इन सभी मामलों में आरक्षक से लेकर संभागीय परिवहन कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों पर काली कमाई के दाग लगे हैं। इन अधिकारियों की अवैध कमाई नौकरी के दौरान मिले वेतन से कई गुना ज्यादा है। यही नहीं इस काली कमाई के सहारे अब ये परिवहनकर्मी दूसरे धंधों में भी उतर चुके हैं।

परिवहन विभाग को भी आबकारी विभाग की तरह शातिर अधिकारी- कर्मचारियों ने काली कमाई का जरिया बना लिया है। विभाग की नौकरी में रहकर अपनी तिजोरी भरने में केवल अधिकारी ही नहीं आरक्षक जैसे सबसे निचले स्तर के कर्मचारी भी पीछे नहीं है।

'द सूत्र' ने विभाग की साख पर कालिख पोतकर अवैध वसूली करने वाले ऐसे ही अधिकारी-कर्मचारियों का ब्यौरा खंगाला है। इस पड़ताल में न केवल इन परिवहनकर्मियों की कमाई बल्कि, इसके सहारे शुरू किए दूसरे कारोबारों की जानकारी सामने आई है।

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चेक पोस्ट की कमाई से रियल एस्टेट कारोबार

परिवहन विभाग की वसूली से करोड़ों कमाने वाले कर्मचारियों में सबसे चर्चित नाम आरक्षक सौरभ शर्मा का है। साल 2015 में साठगांठ के सहारे परिवहन आरक्षक बने सौरभ शर्मा ने 2023 में वीआरएस लेकर नौकरी छोड़ दी थी। इस आठ साल के छोटे से कार्यकाल में ही सौरभ ने करोड़ों का विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया है।

डेढ़ साल पहले लोकायुक्त और ईडी की कार्रवाई में उसकी 100 करोड़ से ज्यादा बेनामी संपत्ति का खुलासा हुआ था। सौरभ ने परिवहन विभाग की वसूली से जमा काली कमाई से रियल एस्टेट का कारोबार खड़ा किया है।

भोपाल के अलावा अन्य शहरों में वह खुद और परिवार के सदस्यों के नाम से बिल्डर-कॉलोनाइजर फर्मों का संचालन कर रहा है। यही नहीं नौकरी में बनाए रसूख के सहारे उसने परिवहन चेक पोस्ट पर अपने लोगों के नाम से ठेके भी लिए थे। सौरभ ने इसी काली कमाई से अपनी पत्नी, ससुराल पक्ष और परिवार के अन्य लोगों के नाम से कई भूखंड, मकान- दुकान जैसी प्रॉपर्टियां भी खड़ी की है।

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परिवहन की वसूली से प्रॉपर्टी में निवेश

परिवहन विभाग के इंदौर में पदस्थ रहे बाबू (क्लर्क) रमेंद्र उर्फ रमन धुलधोए का नाम भी अवैध कमाई जुटाने वालों की फेहरिस्त में शामिल है। रमन ने आरटीओ कार्यालय में बैठे-बैठे बेहिसाब संपत्ति जुटाई और इसके सहारे प्रॉपर्टी, फार्म हाउस, कृषि भूमि जैसी संपत्तियां खड़ी कर लीं।

इस कमाई से इंदौर सहित मालवा क्षेत्र के अन्य शहरों में मल्टीस्टोरी भवन खरीदे और उन्हें किराए पर चढ़ाकर कमाई का जरिया बनाया। रमन धुलधोए की यह काली कमाई भी लोकायुक्त की नजर से नहीं छिपी रही।

लोकायुक्त की छापेमारी में धुलधोए के घर और अन्य ठिकानों से करोड़ों की नकदी के अलावा बेनामी अचल संपत्तियां भी सामने आई थीं। कोर्ट परिवहन क्लर्क रमन की काली कमाई को राजसात करने का आदेश दे चुका है।

इंदौर के आसपास मोरोद, सांवेर, रानीपुरा में धुलधोए ने संपत्तियां खड़ी करने में करोड़ों का निवेश किया था और इन्हीं से उसे हर साल तगड़ी कमाई भी होती रही।

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पत्नी के साथ मिलकर की काली कमाई

मध्य प्रदेश में वसूली के सहारे करोड़ों कमाने वाले अधिकारियों में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी संतोष पॉल का नाम भी है। संतोष पॉल जबलपुर में आरटीओ रह चुके हैं। नौकरी के दौरान संतोष पॉल को 73 लाख रुपए की कमाई हुई थी। जबकि उनके पास इससे कई गुना ज्यादा अवैध कमाई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी में आरटीओ संतोष पॉल के पास साढ़े चार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का खुलासा हुआ था। संतोष पॉल ने परिवहन विभाग की नौकरी के दौरान करोड़ों की काली कमाई की और उसे व्यावसायिक भवन, दुकानें खरीदने में लगाया।

इसके अलावा उनके पास कई मकान, भूखंड, कृषि भूमि भी है। संतोष पॉल की इस काली कमाई में उनकी पत्नी और परिवहन क्लर्क रेखा पॉल भी भागीदार रही हैं। संतोष पॉल की करोड़ों की संपत्ति और करोड़ों के बेनामी लेनदेन पर ईडी मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कर ये प्रॉपर्टी कुर्क कर चुका है। आरटीओ के रूप में विभाग से वेतन के अलावा बेनामी संपत्तियों और दुकानों से संतोष पॉल ने खासी कमाई की है।

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जांच के दायरे में और भी अधिकारी

परिवहन विभाग में दर्जन भर अधिकारी भी लोकायुक्त और ईओडब्ल्यु ( EOW) जैसी जांच एजेंसियों के दायरे में हैं। इन पर आय से ज्यादा संपत्ति जुटाने संबंधी मामलों की जांच जारी है।

इनमें आरटीओ सुनील शुक्ला, राजेन्द्र रघुवंशी, विक्रम सिंह जैसे अधिकारियों पर करोड़ों की कमाई करने और एग्रीकल्चर, प्रॉपर्टी सहित दूसरे कारोबारों में निवेश करने की पड़ताल की जा रही है। परिवहनकर्मी नीलम मिंज ने भ्रष्टाचार के जरिए जमा की गई संपत्ति और लाखों रुपए राजसात करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा है।

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