4.42 करोड़ वाहनों की निगरानी प्रभारी अफसरों के भरोसे, परिवहन विभाग स्टाफ बेहाल
Ramanand Tiwari | Jun 12, 2026, 23:27 IST
Photograph: (thesootr)
BHOPAL. MP परिवहन विभाग 4.42 करोड़ वाहनों की निगरानी कर रहा है। स्टाफ की कमी से राजस्व और सड़क सुरक्षा दोनों पर दबाव है। नियमित आरटीओ न होकर प्रभारी अधिकारियों पर निर्भर है।
समझें क्या है पूरा मामला
- MP में वाहनों की संख्या 4.42 करोड़ पार।
- परिवहन विभाग के आधे से ज्यादा पद खाली।
- नियमित आरटीओ न होकर प्रभारी अधिकारियों पर निर्भर।
- तकनीकी और प्रवर्तन पदों में भारी कमी।
- 339 नए पदों का प्रस्ताव, विभाग संरचना 20% बढ़ेगी।
हालात ऐसे हैं कि प्रदेश में नियमित क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) तक उपलब्ध नहीं हैं और कई जिलों में व्यवस्था प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रही है।
अब करीब 15 वर्षों बाद विभाग ने कैडर रिव्यू का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे जल्द वित्त विभाग और राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है।
बढ़ती गाड़ियां, सिकुड़ता सिस्टम
परिणाम यह है कि वाहन पंजीयन से लेकर प्रवर्तन कार्रवाई तक का पूरा सिस्टम सीमित मानव संसाधनों के सहारे संचालित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा स्टाफ के साथ प्रभावी निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण संभव नहीं रह गया है।
- प्रदेश में वाहनों की संख्या 4.42 करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है।
- मध्यप्रदेश परिवहन विभाग में 51 प्रतिशत से ज्यादा पद रिक्त हैं।
- क्षेत्रीय और अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों के सभी 36 पद खाली हैं।
- मोटरयान परिवहन उप निरीक्षक (एमवीएसआई) के सभी 35 पद रिक्त हैं।
- परिवहन निरीक्षक (गैर तकनीकी) के 70 में से 65 पद खाली हैं।
- एआरटीओ के 64 स्वीकृत पदों में से 24 पद रिक्त हैं।
- प्रधान आरक्षक और वाहन चालक वर्ग के 120 पदों में से 94 पद खाली हैं।
- विभाग ने 339 नए पद सृजित करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
- करीब 15 वर्षों बाद कैडर रिव्यू की प्रक्रिया शुरू की गई है।
एक भी नियमित आरटीओ नहीं
विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रभारी व्यवस्था लंबे समय तक प्रशासनिक स्थिरता नहीं दे सकती। इससे निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होती है और प्रवर्तन गतिविधियों की गति भी धीमी पड़ जाती है।
तकनीकी अमले की कमी से फिटनेस जांच पर असर
ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि लगातार बढ़ते वाहनों की तकनीकी निगरानी आखिर किस व्यवस्था के तहत प्रभावी तरीके से की जा रही है।
फील्ड में गिने-चुने अधिकारी
यानी अवैध परिवहन, कर चोरी और नियम उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी बेहद सीमित अमले पर आ गई है। इससे प्रवर्तन व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
339 नए पदों का प्रस्ताव, 20 फीसदी विस्तार की तैयारी
इसके बाद विभाग में स्वीकृत पदों की संख्या दो हजार के पार पहुंच सकती है। अधिकारियों का मानना है कि इससे पंजीयन, फिटनेस जांच, कर संग्रहण और सड़क सुरक्षा अभियानों को मजबूती मिलेगी।
राजस्व और सड़क सुरक्षा पर दोहरी चुनौती
दूसरी ओर सड़क सुरक्षा अभियान और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था भी कमजोर पड़ती है। जब करोड़ों वाहन सड़कों पर हों और निगरानी तंत्र आधी क्षमता पर काम कर रहा हो, तब चुनौतियां और गंभीर हो जाती हैं।
सबसे बड़ा सवाल
इस संबंध में परिवहन आयुक्त उमेश जोगा का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। खबर प्रकाशित होने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई।
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