MP में UCC लागू होने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन जरूरी, बच्चों को मिलेगा वारिस का दर्जा
Amresh Kushwaha | Jun 18, 2026, 12:45 IST
मध्यप्रदेश में यूसीसी
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा और ऐसे बच्चों को उत्तराधिकार का हक मिलेगा। मानसून सत्र में बिल पेश होने की उम्मीद है। कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी UCC का ड्राफ्ट तैयार हो गया है।
- लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य किया जाएगा।
- लिव-इन से जन्मे बच्चों को संपत्ति में उत्तराधिकार मिलेगा।
- मानसून सत्र में सरकार यह बिल विधानसभा में पेश कर सकती है।
- कांग्रेस ने पूछा, समाज लिव-इन को मान्यता देगा क्या?
MP में UCC की तैयारी तेज
सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनी सात सदस्यीय समिति ने इसका शुरुआती ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस बड़े सामाजिक बदलाव के लिए जनसमर्थन जुटाने के मकसद से समिति के सदस्य अलग-अलग जिलों में जाकर लोगों से बात कर रहे हैं। साथ ही आम जनता से ऑनलाइन 12 सवाल पूछकर हां या ना में जवाब भी मांगे जा रहे हैं।
चार खंभों पर टिका है नया कानून
लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त नियम
सबसे अहम बात यह है कि लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को पूरा कानूनी संरक्षण दिया जाएगा। इसका मकसद यह है कि समाज में उन्हें नाजायज न माना जाए। ऐसे बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में पूरा बायोलॉजिकल उत्तराधिकार और भरण-पोषण का हक मिलेगा। उत्तराखंड की तरह मध्यप्रदेश में भी लिव-इन का रजिस्ट्रेशन या डिक्लेरेशन कराना अनिवार्य होगा।
सभी धर्मों के लिए समान कानून
इसके साथ ही एकतरफा या भेदभावपूर्ण तलाक कानूनों को खत्म करने की तैयारी है। अब किसी भी तलाक का सरकारी पोर्टल या कोर्ट में रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा, तभी वह वैध माना जाएगा। तलाक के बाद महिला और बच्चों के गुजारा भत्ते के नियम सभी धर्मों के लिए एक जैसे रहेंगे।
पर्सनल लॉ की जगह लेगा नया कानून
कांग्रेस ने उठाए सवाल
मसूद ने एक और बड़ा सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब इस कानून से आदिवासी समाज को पूरी तरह बाहर रखा गया है, तो इसे समान नागरिक संहिता कैसे कहा जा सकता है। उनके मुताबिक, यदि यह सबके लिए समान नहीं है, तो इसे यूनिफॉर्म सिविल कोड कहना ही गलत होगा।
मुख्यमंत्री बोले, पीछे नहीं हटेंगे
सीएम ने यह भी कहा कि सरकार यूसीसी की दिशा में आगे बढ़ रही है और इसी सत्र में इसे पारित कराने की कोशिश रहेगी। मुख्यमंत्री के इस बयान से साफ है कि सरकार इस सामाजिक सुधार पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।
यह खबर क्यों जरूरी है
FAQ
- जानें यूसीसी आखिर है क्या?
यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड एक ऐसा कानूनी ढांचा है जो सभी धर्मों के लोगों पर एक जैसे नियम लागू करेगा। इसमें शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामले शामिल हैं। अभी अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ (Personal Law) हैं। - मध्यप्रदेश में UCC के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के लिए क्या नियम होंगे?
मध्यप्रदेश के यूसीसी ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन या डिक्लेरेशन अनिवार्य किया जाएगा। अलग होने पर महिला को भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा। लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में पूरा उत्तराधिकार और भरण-पोषण का हक दिया जाएगा, जैसा उत्तराखंड में पहले से लागू है। - मध्यप्रदेश का UCC कानून कब लागू हो सकता है?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि आने वाले मानसून सत्र में सरकार यह विधेयक विधानसभा में पेश कर पारित कराने की कोशिश करेगी। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यीय समिति ने इसका ड्राफ्ट पहले ही तैयार कर लिया है।
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