UCC में आदिवासियों को छूट तो मुस्लिम समाज को क्यों नहीं? उठी नई बहस

Ramanand Tiwari | Aug 24, 2026, 23:28 IST
Share
यूसीसी में मुस्लिम को छूट क्यों नहीं
यूसीसी में मुस्लिम को छूट क्यों नहीं

मध्यप्रदेश में UCC लागू होने की प्रक्रिया के बीच छिंदवाड़ा के जमीयत उलेमा ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर मुस्लिम समाज के लिए भी अलग प्रावधान की मांग उठाई है। संगठन ने संविधान के अधिकारों और आदिवासी छूट को अपना आधार बनाया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • UCC को लेकर मुस्लिम समाज ने मांग रखी।
  • राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
  • आदिवासी छूट को प्रमुख आधार बनाया गया।
  • अनुच्छेद 25 और 44 का हवाला दिया।
  • व्यक्तिगत कानूनों पर भी सवाल उठाए गए।

मामला अब छूट से आगे पहुंचा

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर नई बहस छिंदवाड़ा से सामने आई है। जमीयत उलेमा छिंदवाड़ा ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर मांग की है कि जिस तरह अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है, उसी तरह मुस्लिम समाज के लिए भी अलग व्यवस्था पर विचार किया जाए।

यह मांग ऐसे समय आई है जब मध्यप्रदेश विधानसभा UCC विधेयक पारित कर चुकी है। विधेयक में अनुसूचित जनजातीय समुदाय को बाहर रखा गया है।

ucc-muslim-exemption-demand
ucc-muslim-exemption-demand


छिंदवाड़ा से उठा सवाल, पूरे प्रदेश पर असर

संगठन के सदस्य इस्तियाक अहमद सिद्दीकी के मुताबिक ज्ञापन में UCC के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। उनका कहना है कि कानून बनाते समय धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानून से जुड़े संवैधानिक पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

संगठन ने खास तौर पर सवाल उठाया है कि अगर किसी विशेष समुदाय की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को देखते हुए उसे UCC से बाहर रखने का प्रावधान हो सकता है, तो मुस्लिम समाज की मांग पर भी अलग से विचार क्यों नहीं किया जा सकता।

कोर्ट की बहस भी इसी मुद्दे के बीच

UCC को लेकर देशभर में संवैधानिक बहस नई नहीं है। धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत कानून और समान नागरिक व्यवस्था के बीच संतुलन का सवाल अदालतों में भी अलग-अलग संदर्भों में उठता रहा है।

छिंदवाड़ा के ज्ञापन में भी संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए धर्म के पालन और आचरण की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया गया है। हालांकि मौजूदा मांग का अंतिम फैसला विधायी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

अनुच्छेद 44 पर भी सवाल

ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 44 को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई है। संगठन का तर्क है कि समान नागरिक संहिता का उल्लेख संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में है, इसलिए इसे लागू करने की प्रक्रिया में सभी समुदायों की परिस्थितियों और अधिकारों पर व्यापक विचार होना चाहिए। यह तर्क अब UCC की बहस को केवल राजनीतिक विरोध से आगे ले जाकर संवैधानिक व्याख्या के क्षेत्र में भी खड़ा करता है।

आदिवासी छूट क्यों बनी मुख्य वजह?

मध्यप्रदेश UCC की प्रक्रिया में आदिवासी समुदाय को बाहर रखने का फैसला पहले ही चर्चा में रहा है। UCC की मसौदा समिति ने भी अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की थी।

विधानसभा से पारित विधेयक में भी आदिवासी समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। यही प्रावधान अब मुस्लिम संगठनों की मांग का प्रमुख आधार बन गया है।

UCC में आखिर बदलेगा क्या?

मध्यप्रदेश के पारित UCC विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामलों के लिए समान कानूनी ढांचा प्रस्तावित है। बहुविवाह पर रोक, विवाह और तलाक के पंजीकरण तथा लिव-इन संबंधों के पंजीकरण जैसे प्रावधान भी इसमें शामिल हैं।

इसलिए मुस्लिम संगठन की आपत्ति केवल एक प्रावधान तक सीमित नहीं है। वह पूरे व्यक्तिगत कानून और धार्मिक स्वतंत्रता के नजरिए से UCC की समीक्षा की मांग कर रहा है।

अब आगे क्या होगा?

राष्ट्रपति के नाम दिए गए ज्ञापन में UCC के प्रावधानों पर दोबारा विचार और संशोधन की मांग की गई है। फिलहाल यह एक संगठन की मांग है, इसे कानून में बदलाव के रूप में नहीं देखा जा सकता। लेकिन राजनीतिक और कानूनी तौर पर इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि UCC विधानसभा से पारित हो चुका है और अब इसके लागू होने की संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

इस पूरे मामले का बड़ा सवाल UCC के समर्थन या विरोध से आगे है। अगर कानून में सामाजिक और सांस्कृतिक आधार पर किसी एक समुदाय को छूट मिल सकती है। तो दूसरे समुदाय की समान मांग को किस संवैधानिक आधार पर देखा जाएगा। आने वाले समय में यही सवाल इस बहस का अहम कानूनी पहलू बन सकता है।

ये भी पढ़ें

UCC पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने तैयार की अपनी राय, 4 जुलाई को लॉ कमीशन को भेजेगा, जानें क्या लिखा है रिपोर्ट में?

खाद उठाव के आंकड़ों ने बढ़ाई हलचल, अब सिस्टम पर होगी सीधी निगरानी

किसानों की बड़ी जीत, मिलेगा चार गुना मुआवजा, सीएम मोहन यादव ने की घोषणा

स्कूली छात्रों में लड़ाई के बाद सड़क पर आया असीम, फिर पिकअप ने कई मीटर घसीटा



Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • जमीयत उलेमा-ए-हिंद
  • UCC
  • आदिवासी
  • आदिवासी समुदाय
छत्तीसगढ़ पुलिस में 7 अधिकारियों की नई पोस्टिंग, CM सुरक्षा से राजभवन तक बदले अधिकारी, भाटापारा DSP भी बदले

By VINAY VERMA

छत्तीसगढ़ पुलिस में 7 अधिकारियों की नई पोस्टिंग, CM सुरक्षा से राजभवन तक बदले अधिकारी, भाटापारा DSP भी बदले
3605 पंचायतों में चुनाव तारीख बदलने की तैयारी: 6 नवंबर को धनतेरस, आयुक्त बोले-कैलेंडर बनाते समय ध्यान नहीं रहा

By Jageshwar prasad

3605 पंचायतों में चुनाव तारीख बदलने की तैयारी: 6 नवंबर को धनतेरस, आयुक्त बोले-कैलेंडर बनाते समय ध्यान नहीं रहा
जैसलमेर: शाहगढ़ में केंद्र सरकार की कैराकल संरक्षण की योजना, दो को लगाए गए रेडियो कॉलर

By Jageshwar prasad

जैसलमेर: शाहगढ़ में केंद्र सरकार की कैराकल संरक्षण की योजना, दो को लगाए गए रेडियो कॉलर
टिकट के दावेदारों से दिलावर बोले-प्रधान बनकर गड़बड़ी मत करना; चाबी मेरे पास, एक मिनट में हटा दूंगा

By Saurabh Mishra

टिकट के दावेदारों से दिलावर बोले-प्रधान बनकर गड़बड़ी मत करना; चाबी मेरे पास, एक मिनट में हटा दूंगा
इंदौर में दादा ने किया मोलेस्ट, तो पोती ने बैट से हमला कर ले ली जान, जानें क्या है पूरा मामला

By Manya Jain

इंदौर में दादा ने किया मोलेस्ट, तो पोती ने बैट से हमला कर ले ली जान, जानें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में लाइब्रेरी से घर लौट रही युवती पर एसिड अटैक, चेहरे और शरीर का ऊपरी हिस्सा झुलसा, आरोपी फरार

By Umeshwari Baghel

छत्तीसगढ़ में लाइब्रेरी से घर लौट रही युवती पर एसिड अटैक, चेहरे और शरीर का ऊपरी हिस्सा झुलसा, आरोपी फरार
एमपी कृषि विभाग में 3357 कर्मचारियों का प्रमोशन, CM मोहन यादव बोले-अब हर साल होगी DPC

By Sandeep Kumar

एमपी कृषि विभाग में 3357 कर्मचारियों का प्रमोशन, CM मोहन यादव बोले-अब हर साल होगी DPC