जल संसाधन विभाग में फिक्स टेंडर व्यवस्था, एमपी की सिंचाई परियोजनाओं के टेंडर पर कंपनी नेक्सस का कब्जा

Sanjay Sharma | Mar 03, 2026, 23:26 IST
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Photograph: (the sootr)

मध्य प्रदेश के जल संसाधन विभाग में टेंडर फिक्सिंग और 'कंपनी नेक्सस' के गंभीर आरोप लगे हैं। कांग्रेस ने सीबीआई जांच और मंत्री की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

News in Short :

  • कांग्रेस ने जल संसाधन विभाग में टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
  • आरोप है कि 300 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडरों में फिक्स व्यवस्था है।
  • कांग्रेस का दावा है कि कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
  • किसानों को नुकसान हो रहा है क्योंकि कई परियोजनाएं अटकी हुई हैं।
  • कांग्रेस ने सीबीआई से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

News in Detail

BHOPAL. मध्य प्रदेश कांग्रेस ने जलसंसाधन विभाग की सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं की सीबीआई से जांच की मांग की है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज ने जलसंसाधन विभाग के एक व्यक्ति के इशारे पर चुनिंदा कंपनियों को ठेके देने के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है डेढ़ साल से विभाग द्वारा महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं के टेंडर अटकाए जा रहे हैं।

News in Detail :

कांग्रेस ने मध्य प्रदेश सरकार को कृषि कैबिनेट पर घेरा है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने विभागीय अफसरों से साठगांठ कर कुछ कंपनियों द्वारा ठेके हड़पने की आशंका जताई है। उन्होंने जल संसाधन विभाग में एक बाहरी व्यक्ति के नियंत्रण और उसके इशारे पर ठेके देने पर भी सरकार को घेरा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि विभाग एक व्यक्ति के प्रभाव में क्यों हैं। सरकार और विभाग को जनता के सामने उसकी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए। उनका कहना है कि इन टेंडरों में पारदर्शिता का अभाव है। कुछ परियोजनाओं में काम शुरू होने से पहले ही भुगतान किया जा रहा है।

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कमलनाथ ने किया ब्लैक लिस्ट, बीजेपी बरसा रही कृपा

कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने जल संसाधन विभाग के ठेकों में मोंटेना कंपनी, राजीव मोंटेना और जगदीश गुप्ता, मनीष गुप्ता की भूमिका पर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा है कि कंपनियां आपसी साठगांठ कर विभाग से सिंचाई परियोजनाओं के ठेके ले रही हैं।

मोंटेना कंपनी को पूर्व सीएम कमलनाथ ने ब्लैक लिस्ट किया था और उसी पर बीजेपी सरकार कृपा बरसा रही है। गुणवत्ता के आधार पर सिंचाई और पेयजल प्रोजेक्ट में डीआई पाइप सप्लाई होने चाहिए लेकिन एचडीपीई की सप्लाई की जा रही है। कौन सप्लाई कर रहा है, किसके एप्रूवल पर सप्लाई हो रही है और किसके इशारे पर भुगतान किया जा रहा है।

डेढ़ साल से अटके प्रोजेक्ट, कैसे बढ़ेगा सिंचाई का रकबा

कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के सिंचाई का रकबा बढ़ने के दावे पर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज का कहना है सरकार कृषि कैबिनेट कर रही है। कैबिनेट में इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि डेढ साल से सिंचाई प्रोजेक्ट के टेंडर क्यों रुके हैं। किस कारण से इन्हें जारी नहीं किया जा रहा है। सरकार सिंचाई का रकबा बढ़ने का दावा कर रही है, लेकिन जब डेढ़ साल में सिंचाई परियोजनाओं के टेंडर ही नहीं हुए तो सिंचाई का रकबा कैसे बढ़ गया।

कौन है नौशाद, क्या है दुबई से बिजनेस कनेक्शन

कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने जलसंसाधन विभाग के मंत्री तुलसी सिलावट की भी घेराबंदी की है। उन्होंने सीधे तौर पर मंत्री का नाम लेते हुए कहा कि नौशाद नाम का व्यक्ति कौन है और उसके दुबई बिजनेस से मंत्री का क्या कनेक्शन है। मंत्री सिलावट के परिवार के सदस्य क्या उसके दुबई बिजनेस में शामिल हैं, अगर नहीं है तो मंत्री को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा यदि परिवार के सदस्य उसके बिजनेस में शामिल हैं तो जनता के सामने पूरे कारोबार की जानकारी रखनी चाहिए। आखिर इस कारोबार में कितना ब्लैक या व्हाइट पैसा इन्वेस्ट हो रहा है।

जलसंसाधन के टेंडरों में कंपनी सिंडिकेट का खेल

कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज ने जल संसाधन विभाग के टेंडरों में कंपनियों के सिंडिकेट के खेल का भी मुद्दा उठाया है। उनका कहना था कंपनियां सिंडिकेट बनाकर पेयजल जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं से खेल रही हैं जिनका सीधा संबंध जनता से हैं। गिनी चुनी 10-12 कंपनियां ही मिलजुल कर टेंडर डाल रही हैं। क्या पूरे देश में फलौदी कंस्ट्रक्शन, मोंटेना जैसी 12 कंपनियां ही हैं, जो टेंडर डाले जा रही हैं। फलौदी कंस्ट्रक्शन के मनीष गुप्ता पर कृपा क्यों बरस रही। विभाग में एक व्यक्ति के इशारे पर कंपनियां नेक्सस बनाकर ठेके हथिया रही हैं। इसकी सीबीआई द्वारा जांच कराई जाए तो सब खुलासा हो जाएगा।

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केंद्रीय अनुमतियों के कारण अटके नदी लिंक प्रोजेक्ट

जल संसाधन विभाग ने प्रदेश में सिंचाई के लिए कई सिंचाई परियोजनाओं और बांधों को स्वीकृति दी है। इनमें से ज्यादातर केन बेतवा और पार्वती काली सिंध चंबल नदी लिंक परियोजना पर केंद्रित हैं। इन परियोजनाओं में कुछ तकनीकी समस्याएं हैं। जिनके संबंध में केंद्रीय जल आयोग में अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। निगम से अनुमति मिलते ही ये परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ेंगी।

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