कागजों में सिमट कर रह गए MP के 46 वुमन हॉस्टल, कैग रिपोर्ट से उठे गंभीर सवाल
Amresh Kushwaha | Jul 25, 2026, 09:45 IST
MP में वर्किंग वुमन हॉस्टल
कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मध्यप्रदेश में 1974 से 2024 तक मंजूर हुए 59 वर्किंग वुमन हॉस्टल में से सिर्फ 13 ही चालू मिले। बाकी हॉस्टल बंद, खंडहर या अस्पताल-दफ्तर बन चुके हैं। इसके बावजूद सरकार 289 करोड़ रुपए से 8 नए हॉस्टल बनाने की तैयारी में है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश के वर्किंग वुमन हॉस्टलों पर कैग की रिपोर्ट आई है।
- 1974 से 2024 तक 59 हॉस्टल मंजूर हुए, सिर्फ 13 चालू मिले।
- बाकी हॉस्टल बंद, खंडहर या दूसरे कामों में इस्तेमाल हो रहे हैं।
- सरकार अब 289 करोड़ रुपए से 8 नए हॉस्टल बनाएगी।
- कैग ने निगरानी और रखरखाव में बड़ी खामियां बताई हैं।
क्या कहती है कैग रिपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह हॉस्टल कामकाजी महिलाओं की सुरक्षित रहने की व्यवस्था के लिए बनाए गए थे। लेकिन बरसों की लापरवाही से इनका मूल मकसद ही खत्म हो गया। कैग ने विभाग की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में विभाग की जवाबदेही तय करने की जरूरत भी बताई गई है।
कैग रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े: एक नजर में
| क्र.सं. | विवरण (Parameter) | कैग रिपोर्ट के आंकड़े (CAG Audit Findings) |
| 1. | कुल स्वीकृत हॉस्टल | 59 हॉस्टल (34 जिले) |
| 2. | कुल स्वीकृत बेड क्षमता | 3,519 बेड |
| 3. | वर्तमान में संचालित हॉस्टल | केवल 13 हॉस्टल (990 बेड) |
| 4. | गैर-संचालित / अन्य प्रयोग में | 46 हॉस्टल |
| 5. | अस्पताल/दफ्तरों में बदले गए हॉस्टल | 22 हॉस्टल (1,310 बेड) |
| 6. | बिना अनुमति गिराए गए हॉस्टल | 5 हॉस्टल (जैसे विदिशा, छिंदवाड़ा) |
| 7. | रिकॉर्ड से गायब / गुमशुदा | 3 हॉस्टल (ग्वालियर, सीधी, बालाघाट) |
| 8. | वर्षों से अधूरे / अप्रारंभ | 4 हॉस्टल (1988-91 से लंबित) |
अस्पताल-दफ्तर बने हॉस्टल
यानी जो भवन कामकाजी महिलाओं के लिए बनाए गए थे, वे अब पूरी तरह दूसरे कामों में इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे साफ है कि इन हॉस्टलों का असली मकसद पीछे छूट गया है।
बिना अनुमति तोड़े भवन
सुरक्षा व्यवस्था भी फेल
रिकॉर्ड से गायब हॉस्टल
नए हॉस्टल की तैयारी
हालांकि कैग रिपोर्ट के खुलासों के बाद सवाल उठ रहा है कि पुराने हॉस्टलों की हालत सुधारे बिना नए हॉस्टल कितने कारगर होंगे। जानकारों का कहना है कि अगर निगरानी और रखरखाव व्यवस्था नहीं सुधरी तो नए हॉस्टलों का भी वही हाल हो सकता है। इसलिए सरकार से मांग की जा रही है कि पहले पुराने हॉस्टलों की समीक्षा हो। इसके बाद ही नए हॉस्टलों के निर्माण पर आगे बढ़ा जाए।
कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद हॉस्टल की जरूरत बरसों से बनी हुई है। कई महिलाएं नौकरी की तलाश में अपने शहर से बाहर जाती हैं। ऐसे में सरकारी हॉस्टल उनके लिए किफायती और सुरक्षित विकल्प होते हैं। लेकिन मौजूदा हॉस्टलों की बदहाली से यह भरोसा कमजोर हुआ है। अब देखना यह होगा कि सरकार कैग की सिफारिशों पर कितनी गंभीरता से काम करती है।
महिला एवं बाल विकास विभाग पर अब जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है। विभाग को यह बताना होगा कि बंद पड़े हॉस्टलों को दोबारा कैसे शुरू किया जाएगा। साथ ही यह भी साफ करना होगा कि भवनों का गलत इस्तेमाल आगे नहीं होगा। कैग रिपोर्ट के बाद विधानसभा में भी यह मुद्दा उठने की संभावना है। विपक्ष इस रिपोर्ट को सरकार से सवाल पूछने का बड़ा आधार बना सकता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर नागरिकों को अपने अधिकार और सरकारी जवाबदेही समझने में मदद करती है। साथ ही यह प्रशासनिक सुधार की जरूरत को भी उजागर करती है। इसलिए यह खबर आम जनता, कामकाजी महिलाओं और नीति बनाने वालों सबके लिए जरूरी है।
FAQ
- कैग रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के वर्किंग वुमन हॉस्टल को लेकर क्या खुलासा हुआ है?
कैग रिपोर्ट के अनुसार 1974 से 2024 तक मध्यप्रदेश के 34 जिलों में 59 वर्किंग वुमन हॉस्टल मंजूर हुए थे। लेकिन मार्च 2024 तक इनमें से सिर्फ 13 ही चालू मिले, बाकी बंद या दूसरे कामों में इस्तेमाल हो रहे हैं।
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