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News In Short
- कंपनी ने 18.04% कम बोली लगाकर ठेका लिया, लेकिन बाद में अतिरिक्त GST की मांग शुरू कर दी है।
- इससे रोड प्रोजेक्ट की लागत 182.36 करोड़ से बढ़कर 302.60 करोड़ रुपए (66%) हो गई।
- PWD ने ठेकेदार द्वारा बढ़ाई गई राशि के दावों को बिना किसी ठोस रिव्यू के स्वीकार कर लिया है।
- अक्टूबर 2023 में NDB के दावे को खारिज किए जाने के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया उलझी रही है।
- कैग की जांच के लिए PWD ने 144 में से 83 जरूरी फाइलें उपलब्ध नहीं कराईं है।
News In Detail
भोपाल. राजधानी की डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी नगर मार्ग यानी कोलार सिक्स लेन रोड अब विवादों के घेरे में है। CAG ने अपनी रिपोर्ट में इस प्रोजेक्ट के कॉन्ट्रेक्ट को लेकर PWD और ठेकेदार कंपनी बंसल कंस्ट्रक्शन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे एक सड़क, जिसकी शुरुआती बोली 182 करोड़ रुपए थी, उसकी लागत देखते ही देखते 120 करोड़ रुपए और बढ़ गई।
कम बोली का खेल और तकनीकी चूक
CAG- Comptroller and Auditor General की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलार सिक्स लेन प्रोजेक्ट की संभावित कांट्रेक्ट राशि (PAC) 222.51 करोड़ रुपए तय की गई थी। इसमें 23.84 करोड़ रुपए का जीएसटी (GST) पहले से शामिल था। बंसल कंस्ट्रक्शन (बंसल कंस्ट्रक्शन ग्रुप भोपाल ) ने बाजार से 18.04% कम की बोली लगाकर महज 182.36 करोड़ रुपए में यह काम हासिल कर लिया।
इसके बाद भी ये पेंच यहीं फंसा हुआ है। काम शुरू होते ही कंपनी ने अतिरिक्त जीएसटी के भुगतान की मांग कर दी। कैग का कहना है कि यदि टेंडर के मूल्यांकन के समय चीफ इंजीनियर ने सतर्कता बरती होती, तो तकनीकी आधार पर इस बोली को खारिज किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
182 करोड़ का प्रोजेक्ट 302 करोड़ का कैसे हो गया
कैग ने सबसे बड़ा सवाल प्रोजेक्ट की बढ़ी लागत पर उठाया है। कॉन्ट्रेक्ट की मूल राशि 182.36 करोड़ रुपए थी, जो आश्चर्यजनक रूप से 66% बढ़कर 302.60 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
कैग रिपोर्ट में मध्यप्रदेश सरकार से पूछा गया है कि आखिर इतनी बड़ी राशि का इजाफा कैसे हुआ? चौंकाने वाली बात यह है कि कांट्रेक्टर फर्म ने काम की बढ़ी हुई राशि का दावा किया और पीडब्ल्यूडी ने बिना किसी विस्तृत समीक्षा के इसे मंजूरी भी दे दी।
सरकार के विरोधाभासी जवाब और NDB की रोक
इस मामले में शासन का रुख भी सवालों के घेरे में है। शुरुआत में सरकार ने कैग को बताया कि जीएसटी का भुगतान नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह निविदा की शर्तों में शामिल था। लेकिन बाद में एक समिति गठित की गई जिसने जीएसटी भुगतान की सिफारिश कर दी। कैग ने इसे नियमों का उल्लंघन और विरोधाभासी उत्तर करार दिया है।
उधर, न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के निदेशक ने भी अक्टूबर 2023 में स्पष्ट कर दिया था कि ठेकेदार का अतिरिक्त जीएसटी का दावा मान्य नहीं है। वहीं बंसल समूह के सचिव सुनील बंसल का तर्क है कि निविदा के समय जीएसटी शामिल नहीं थी और वे इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
रिकॉर्ड छिपाने की कोशिश? 83 फाइलें गायब
जांच के दौरान पीडब्ल्यूडी का रवैया असहयोगात्मक रहा। कैग ने 3,118 करोड़ रुपए के कुल 144 कामों की फाइलें मांगी थीं। विभाग ने केवल 61 फाइलें उपलब्ध कराईं, जबकि 83 महत्वपूर्ण निविदा फाइलें (Tender Files) ऑडिट के लिए नहीं दी गईं। बार-बार ऑडिट मेमो जारी होने के बावजूद इन फाइलों का न मिलना विभाग की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह पैदा करता है।
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