यह आदेश का वह अहम बिंदु, जिसमें साफ लिखा है कि अब नियुक्तियां 14 फीसदी के साथ ही होंगी; पीएससी, ईएसबी के लिए आदेश
MPPSC और ESB की भर्ती और रिजल्ट पर आया संकट, ओबीसी आरक्षण फैसले में यह लिखा
Sanjay Gupta | Oct 10, 2026, 15:36 IST
OBC आरक्षण पर फैसले से नई उलझन!
INDORE. मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद उम्मीदवारों को राहत मिलने की उम्मीद थी। अब इसी फैसले के बाद बड़े संकट की घंटी बज गई है। एमपी लोक सेवा आयोग (MPPSC) और कर्मचारी चयन मंडल (ESB) की आने वाली भर्तियों और परीक्षा परिणामों पर इसका असर पड़ सकता है।
मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत करने को लेकर पिछले सात साल से विवाद चल रहा है। अब जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत तक सीमित रखने का आदेश दिया है। साथ ही कमलनाथ सरकार के समय 2019 में बनाए गए कानून को अल्ट्रा वायर्स यानी कानूनी अधिकारों की सीमा से बाहर बताते हुए अमान्य घोषित कर दिया है।
कोर्ट ने 29 सितंबर 2022 से रोके गए 13 प्रतिशत पदों को अनारक्षित वर्ग से भरने का आदेश भी दिया है। इसके लिए सरकार को तीन महीने का समय दिया गया है।
अब जिन उम्मीदवारों की नियुक्तियां 13 प्रतिशत पदों के कारण अटकी हुई हैं, उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द भर्ती का रास्ता साफ करेगी। वहीं, नई भर्तियों का इंतजार कर रहे उम्मीदवार चाहते हैं कि अब 87-13 प्रतिशत का फॉर्मूला खत्म हो और सभी 100 प्रतिशत पदों पर भर्ती हो।
कई परीक्षाएं पहले ही 87-13 प्रतिशत के फॉर्मूले पर हो चुकी हैं। इनके रिजल्ट अभी तक जारी नहीं हुए हैं। ऐसे में इन परीक्षाओं के उम्मीदवार भी उम्मीद कर रहे हैं कि अब पूरे 100 प्रतिशत पदों के हिसाब से रिजल्ट जारी होगा।
लेकिन अब एमपी लोक सेवा आयोग (MPPSC), कर्मचारी चयन मंडल (ESB) और दूसरी भर्ती एजेंसियों के सामने बड़ी उलझन खड़ी हो गई है। सबसे ज्यादा परेशानी उन भर्तियों में आ सकती है, जिनकी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। इनमें कुछ की अंतिम चयन सूची जारी होनी है तो कुछ में इंटरव्यू के बाद रिजल्ट आना बाकी है। इसके अलावा नई भर्तियों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
दरअसल, हाईकोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत करने वाले कानून को असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया है। ऐसे में अब 87-13 प्रतिशत के फॉर्मूले का क्या होगा, यह बड़ा सवाल है। यदि सरकार 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर नई भर्तियां निकालती है या पुराने रिजल्ट जारी करती है तो उसे विरोध और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
हाईकोर्ट के 159 पन्नों के फैसले में पेज नंबर 156 का बिंदु 221 बेहद अहम है। इसमें लिखा है कि 29 सितंबर 2022 के बाद ओबीसी वर्ग को 14 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण के आधार पर नियुक्तियां दी गई हैं तो ऐसी नियुक्तियां मान्य नहीं होंगी। इन्हें रद्द कर इनकी जगह 13 प्रतिशत अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्त किया जाएगा।
फैसले में सबसे अहम बात भर्ती एजेंसियों को लेकर कही गई है। कोर्ट ने साफ किया है कि अब एमपी लोक सेवा आयोग (MPPSC), कर्मचारी चयन मंडल (ESB) और दूसरी भर्ती एजेंसियों को इसी आदेश के आधार पर रिजल्ट जारी करने होंगे। यानी ओबीसी वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण देकर ही आगे की भर्ती प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने वाले कानून के खिलाफ दायर सभी याचिकाएं स्वीकार कर ली हैं। कोर्ट ने इस कानून को रद्द कर दिया है। वहीं, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस आरक्षण के साथ हॉरिजॉन्टल आरक्षण यानी महिलाओं और अन्य विशेष वर्गों के लिए आरक्षण से जुड़ी बाकी याचिकाओं का भी इसी फैसले के आधार पर निपटारा कर दिया गया है।
यानी इस बिंदु और लाइन से साफ है कि चयन एजेंसियों को अब कोई भी रिजल्ट 100 फीसदी के आधार पर और आरक्षण ओबीसी को 14 फीसदी रखते हुए रिजल्ट जारी करना है। मप्र में एसटी को 20 फीसदी, एससी को 16 फीसदी, ओबीसी को 14 फीसदी और ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण लागू होगा। वहीं अनारक्षित में 40 फीसदी रहेगा।
यानी हाईकोर्ट के इस आदेश से साफ है कि अब भर्ती एजेंसियों को पूरे 100 प्रतिशत पदों के आधार पर रिजल्ट जारी करना होगा। इसमें ओबीसी वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। मध्यप्रदेश में एसटी वर्ग के लिए 20 प्रतिशत, एससी के लिए 16 प्रतिशत, ओबीसी के लिए 14 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण रहेगा। वहीं, बाकी 40 प्रतिशत पद अनारक्षित श्रेणी में होंगे।
संकट इसलिए है क्योंकि इस आदेश को रुकावाने के लिए सरकार नहीं तो ओबीसी वेलफेयर कमेटी तो कम से कम सुप्रीम कोर्ट जाएगी ही। सरकार लगातार ओबीसी के हितों की रक्षा की बात भी कर रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के आदेश को स्टे करने की मांग की जाएगी। ऐसे में आगे रिजल्ट और भर्ती विज्ञापन का क्या होगा यह सबसे बड़ी समस्या होगी। इसका जवाब सुप्रीम कोर्ट या सरकार ही दे सकती है।
जब ओबीसी आरक्षण 14 फीसदी सीमित कर दिया है और 2019 के एक्ट को ही गैर-संवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया तो फिर भर्ती विज्ञापन में क्या बताया जाएगा? विज्ञापन में ही लिखा होता है कि किस कैटेगरी में कितना आरक्षण रहता है और इसी के अनुसार पदों का भी बंटवारा किया जाता है और रोस्टर लागू होता है। ऐसे में विज्ञापन निकल ही नहीं सकेगा। या फिर जैसे ओबीसी को 27 फीसदी मानकर विज्ञापन निकाले थे वैसे ही सरकार को अब 14 फीसदी आरक्षण मानकर विज्ञापन देने होंगे। यह करना सरकार के लिए राजनीतिक रूप से कठिन होगा।
वहीं, एमपी लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने अब तक जो भी रिजल्ट जारी किए हैं, उनमें खासतौर पर याचिका नंबर 5901/2019 का हवाला दिया गया है। यह याचिका साल 2019 में ओबीसी को 14 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण देने पर हाईकोर्ट की रोक से जुड़ी है। आयोग के ये सभी रिजल्ट इसी याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रखे गए थे। खास बात यह है कि ओबीसी आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट का मौजूदा फैसला भी इसी मूल याचिका पर आया है।
वहीं, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 19 मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 के बीच ओबीसी को अतिरिक्त आरक्षण के आधार पर दी गई नियुक्तियों को राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि साल 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने वाला कानून संविधान के खिलाफ है। यह सुप्रीम कोर्ट की तय की गई 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का भी उल्लंघन करता है। सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी और जयश्री पाटिल मामलों में भी इस सीमा को लेकर स्थिति साफ की थी। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 2019 के संशोधन कानून को रद्द कर दिया है।
हालांकि, कोर्ट ने उन उम्मीदवारों को राहत दी है, जिन्हें 29 सितंबर 2022 से पहले 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर नौकरी मिल चुकी थी। यानी उस समय अतिरिक्त 13 प्रतिशत आरक्षण के तहत हुई नियुक्तियां रद्द नहीं होंगी। ऐसे उम्मीदवार अपनी नौकरी पर बने रहेंगे। आदेश के मुताबिक, सरकार इन अतिरिक्त नियुक्तियों को आगे होने वाली तीन भर्तियों में पदों का समायोजन करके संतुलित करेगी।
अब इन तारीखों का मतलब भी समझ लीजिए। 19 मार्च 2019 को हाईकोर्ट में पहली बार ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। इसी दौरान बढ़े हुए आरक्षण पर रोक लगी थी। वहीं, 29 सितंबर 2022 को मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग ने भर्ती में 87-13 प्रतिशत का फॉर्मूला लागू किया था। इसी वजह से हाईकोर्ट के फैसले में इन तारीखों को अहम माना गया है।
कोर्ट ने 29 सितंबर 2022 से रोके गए 13 प्रतिशत पदों को अनारक्षित वर्ग से भरने का आदेश भी दिया है। इसके लिए सरकार को तीन महीने का समय दिया गया है।
अब जिन उम्मीदवारों की नियुक्तियां 13 प्रतिशत पदों के कारण अटकी हुई हैं, उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द भर्ती का रास्ता साफ करेगी। वहीं, नई भर्तियों का इंतजार कर रहे उम्मीदवार चाहते हैं कि अब 87-13 प्रतिशत का फॉर्मूला खत्म हो और सभी 100 प्रतिशत पदों पर भर्ती हो।
कई परीक्षाएं पहले ही 87-13 प्रतिशत के फॉर्मूले पर हो चुकी हैं। इनके रिजल्ट अभी तक जारी नहीं हुए हैं। ऐसे में इन परीक्षाओं के उम्मीदवार भी उम्मीद कर रहे हैं कि अब पूरे 100 प्रतिशत पदों के हिसाब से रिजल्ट जारी होगा।
लेकिन अब यह सबसे बड़ा कानूनी संकट
दरअसल, हाईकोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत करने वाले कानून को असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया है। ऐसे में अब 87-13 प्रतिशत के फॉर्मूले का क्या होगा, यह बड़ा सवाल है। यदि सरकार 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर नई भर्तियां निकालती है या पुराने रिजल्ट जारी करती है तो उसे विरोध और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
हाईकोर्ट के आदेश के बिंदु 221 में यह साफ लिखा-
फैसले में सबसे अहम बात भर्ती एजेंसियों को लेकर कही गई है। कोर्ट ने साफ किया है कि अब एमपी लोक सेवा आयोग (MPPSC), कर्मचारी चयन मंडल (ESB) और दूसरी भर्ती एजेंसियों को इसी आदेश के आधार पर रिजल्ट जारी करने होंगे। यानी ओबीसी वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण देकर ही आगे की भर्ती प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने 2019 में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने वाले कानून के खिलाफ दायर सभी याचिकाएं स्वीकार कर ली हैं। कोर्ट ने इस कानून को रद्द कर दिया है। वहीं, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस आरक्षण के साथ हॉरिजॉन्टल आरक्षण यानी महिलाओं और अन्य विशेष वर्गों के लिए आरक्षण से जुड़ी बाकी याचिकाओं का भी इसी फैसले के आधार पर निपटारा कर दिया गया है।
यानी अब रिजल्ट 100 फीसदी पर देना है
यानी हाईकोर्ट के इस आदेश से साफ है कि अब भर्ती एजेंसियों को पूरे 100 प्रतिशत पदों के आधार पर रिजल्ट जारी करना होगा। इसमें ओबीसी वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। मध्यप्रदेश में एसटी वर्ग के लिए 20 प्रतिशत, एससी के लिए 16 प्रतिशत, ओबीसी के लिए 14 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण रहेगा। वहीं, बाकी 40 प्रतिशत पद अनारक्षित श्रेणी में होंगे।
अब संकट क्यों है
भर्ती विज्ञापन में आरक्षण बताना जरूरी
रिजल्ट में भी यह शर्त लिखी है
केवल इन नियुक्तियों को मिली सुरक्षा
हालांकि, कोर्ट ने उन उम्मीदवारों को राहत दी है, जिन्हें 29 सितंबर 2022 से पहले 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर नौकरी मिल चुकी थी। यानी उस समय अतिरिक्त 13 प्रतिशत आरक्षण के तहत हुई नियुक्तियां रद्द नहीं होंगी। ऐसे उम्मीदवार अपनी नौकरी पर बने रहेंगे। आदेश के मुताबिक, सरकार इन अतिरिक्त नियुक्तियों को आगे होने वाली तीन भर्तियों में पदों का समायोजन करके संतुलित करेगी।
अब इन तारीखों का मतलब भी समझ लीजिए। 19 मार्च 2019 को हाईकोर्ट में पहली बार ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। इसी दौरान बढ़े हुए आरक्षण पर रोक लगी थी। वहीं, 29 सितंबर 2022 को मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग ने भर्ती में 87-13 प्रतिशत का फॉर्मूला लागू किया था। इसी वजह से हाईकोर्ट के फैसले में इन तारीखों को अहम माना गया है।
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