MPPSC की परीक्षाओं में लगातार घट रहे पद, युवाओं के सामने चुनौती भरमार
Sanjay Gupta | Jun 07, 2026, 13:25 IST
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मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की प्रमुख भर्तियों में पदों की संख्या लगातार घट रही है। राज्य सेवा, वन सेवा, इंजीनियरिंग और एडीपीओ जैसी परीक्षाओं में कम पद आने से युवाओं में निराशा बढ़ी है। पदोन्नति विवाद और रिक्त पदों का लैप्स होना इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।
समझें क्या है पूरा मामला..
- एमपीपीएससी की प्रमुख भर्तियों में पदों की संख्या लगातार घट रही है।
- एडीपीओ भर्ती में सिर्फ 17 पदों के लिए 20 हजार आवेदन पहुंचे।
- राज्य सेवा परीक्षा में भी पद 229 से घटकर 156 तक पहुंच गए हैं।
- ओबीसी आरक्षण विवाद और 13 फीसदी पद होल्ड होने से स्थिति और जटिल हुई है।
- पदोन्नति पर रोक और नए पद सृजित नहीं होने से भर्ती प्रभावित हो रही है।
वहीं पीएससी ऑफिस के बाहर दिसंबर 2024 में चार दिन-रात का लंबा आंदोलन हुआ था। मुख्य वजह कम पदों की आ रही भर्ती थी। सारे दावों-वादों के बाद भी हालत खराब ही है।
पीएससी की सभी बड़ी परीक्षाओं में पदों की किल्लत है। हालत यह हो गई है कि जिस राज्य सेवा परीक्षा के लिए तीन लाख से अधिक युवा आवेदन करते थे। वह अब घटकर सवा लाख के करीब रह गई है।
कम पदों के साथ ही एमपी में साल 2019 से चल रहा 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण विवाद से निराशा बढ़ गई है। साथ ही होल्ड हो रहे 13 फीसदी पद ने भी निराशा को और बढ़ा दिया है।
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राज्य सेवा परीक्षा के हाल
राज्य वन सेवा
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स्टेट इंजीनियरिंग परीक्षा
एडीपीओ के हाल और भी बुरे
यह परीक्षा 12 साल में तीसरी बार हो रही है। जबकि मोहन सरकार एक साल पहले ही सौ से ज्यादा पद मंजूर कर चुकी है। ऐसे में सवाल यही है कि वे विज्ञापित क्यों नहीं हुए।
असिस्टेंट रजिस्ट्रार में भी निराशा
फूड सेफ्टी ऑफिसर
यह भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण हो रही है। इस बार भर्ती होने के बाद यह कब आएगी, किसी को नहीं पता। आगे कुछ सालों तक तो बिल्कुल उम्मीद नहीं है।
केवल असिस्टेंट प्रोफेसर , मेडिकल ऑफिसर में अधिक पद
कई विषयों में तो पद कम होते हैं। साल 2024 में 1918 पद, साल 2025 में 1239 पद आए हैं। इसके पहले 2022 की भर्ती में अच्छे पद थे।
हाल ही में आयोग ने सबसे बड़ी भर्ती मेडिकल ऑफिसर पद पर की है। इसमें 1800 से ज्यादा पदों पर भर्ती हुई।
पदोन्नति नहीं होना एक बड़ी वजह
इसके चलते उच्च स्तर पर पदोन्नति नहीं हो रही है। शासन ने कार्यवाहक उच्च पद दिया है, लेकिन इसका भी लंबा समय हो गया है। एक बार कार्यवाहक उच्च प्रभार देने के बाद दूसरा उच्च कार्यवाहक प्रभार नहीं दिया जा सकता है।
ऐसे में कार्यवाहक पदोन्नति लेने के बाद भी वे आगे रुक गए हैं। पदोन्नति विवाद के चलते हजारों शासकीय कर्मचारी इसके इंतजार में ही रिटायर हो गए हैं।
वहीं नीचे से भर्ती इसी के चलते बंद होती जा रही है। कई पद अब वित्त विभाग से मंजूरी नहीं मिलने के कारण शासन स्तर पर लैप्स हो रहे हैं। ऐसे करीब एक लाख पदों पर सरकार भर्ती बंद कर रही है। ऐसे में नए पद सृजित नहीं हो रहे हैं।
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