'द सूत्र' के खुलासे के बाद बंद हुई Mpvala.com, लेकिन क्या खत्म हुआ समग्र का खेल?

Neel Tiwari | Jul 08, 2026, 17:02 IST
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समग्र में सेंधमारी करने वाली वेबसाइट बंद
समग्र में सेंधमारी करने वाली वेबसाइट बंद

'द सूत्र' की खबर के बाद समग्र पोर्टल में सेंधमारी करने वाली वेबसाइट Mpvala.com बंद हो गई है। MPSEDC ने अनधिकृत एक्सेस की पुष्टि की है और साइबर विभाग को सूचना देने की बात कही है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 'द सूत्र' की खबर के बाद MPVala.com बंद हुई।
  • MPSEDC ने अनऑथराइज्ड एक्सेस की पुष्टि की।
  • मामले की सूचना साइबर विभाग को दी गई।
  • आशु ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी सवाल उठे।
  • पूरे नेटवर्क की जांच अभी बड़ा मुद्दा है।

'द सूत्र' के खुलासे के बाद बंद हुई वेबसाइट

मध्य प्रदेश के करोड़ों नागरिकों की डिजिटल पहचान से जुड़े मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। 'द सूत्र' की पड़ताल के बाद समग्र पोर्टल में कथित सेंधमारी करने वाली वेबसाइट Mpvala.com बंद हो गई है।

जांच में सामने आया था कि वेबसाइट के जरिए बिना ओटीपी समग्र रिकॉर्ड में बदलाव, परिवार स्थानांतरण और सदस्य जोड़ने जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं।

खबर सामने आने और अधिकारियों को जानकारी मिलने के बाद मंगलवार शाम वेबसाइट बंद हो गई। हालांकि इसके साथ एक नया सवाल भी खड़ा हो गया है।

Mpvala
Mpvala


कार्रवाई हुई... या सबूत मिटाने की कोशिश?

वेबसाइट बंद होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसे बंद किसने कराया। क्या यह MPSEDC या किसी सरकारी एजेंसी की कार्रवाई थी? या फिर कथित नेटवर्क ने सबूत मिटाने के लिए खुद वेबसाइट बंद कर दी? अगर ऐसा है तो संभव है कि यह नेटवर्क नए डोमेन या वेबसाइट से सक्रिय हो। 'द सूत्र' की पड़ताल में यह आशंका सही साबित हुई।

MPSEDC ने माना एन ऑथराइज्ड एक्सेस

'द सूत्र' ने दोबारा MPSEDC के अधिकारियों से संपर्क किया। बातचीत में MPSEDC के चीफ CoE इंद्र बिसेन ने बताया कि वेबसाइट कथित रूप से अनऑथराइज्ड एक्सेस के जरिए संचालित हो रही थी।

इसकी सूचना साइबर विभाग को भेज दी गई है। हालांकि बातचीत से यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वेबसाइट बंद होना विभागीय कार्रवाई का परिणाम है या नहीं। विभाग की ओर से किसी ठोस कार्रवाई या वेबसाइट बंद कराने का स्पष्ट दावा भी नहीं किया गया।

फर्जीवाड़ा रुका या सिर्फ वेबसाइट बंद हुई?

यही वह सवाल है जिसका जवाब अब तक नहीं मिला। यदि वर्षों से कथित तौर पर यह व्यवस्था चल रही थी, तो क्या केवल एक वेबसाइट बंद हो जाने से पूरा खेल खत्म मान लिया जाए? या फिर यह नेटवर्क किसी दूसरे प्लेटफॉर्म से पहले की तरह सक्रिय है?

सबसे बड़ी चिंता उन लाखों हितग्राहियों की है, जिनके रिकॉर्ड में यदि बिना जानकारी के बदलाव हुए हैं तो उन्हें इसकी जानकारी कैसे मिलेगी और उनके अधिकार कैसे बहाल होंगे।

Mpvala
Mpvala


समग्र 2.0 की तैयारी...

MPSEDC का कहना है कि जल्द ही समग्र 2.0 लॉन्च किया जाएगा, जिसमें सभी आईडी KYC से लिंक होंगी और केवल अधिकृत मशीनों से ही बदलाव संभव होगा।

भविष्य की यह व्यवस्था स्वागत योग्य हो सकती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल वर्तमान और अतीत का है। जिन लोगों के रिकॉर्ड पहले ही बदल दिए गए, उनकी पहचान कैसे होगी?

जिनका परिवार दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया, जिनके सदस्य बदल दिए गए या जिनकी योजनाओं का लाभ प्रभावित हुआ, उन्हें न्याय कैसे मिलेगा?

Mpvala
Mpvala


निशा सोनी का मामला बना जांच की कसौटी

'द सूत्र' ने अपनी पहली पड़ताल में जबलपुर निवासी निशा सोनी का मामला सामने रखा था। उनके परिवार का समग्र रिकॉर्ड बिना जानकारी के ग्वालियर स्थानांतरित हो गया था।

रिकॉर्ड में वास्तविक सदस्यों की जगह दूसरे लोगों के नाम दर्ज मिले थे। अब MPSEDC ने मामले की जानकारी 'द सूत्र' से मांगी है। विभाग इस बदलाव की प्रक्रिया की जांच करेगा।

'द सूत्र' जांच में सहयोग कर रहा है। सवाल यह भी है कि इतनी गंभीर अनियमितताओं की जानकारी विभाग को पहले क्यों नहीं मिली।

MPVala बंद... लेकिन खुल गया दूसरा रास्ता?

'द सूत्र' की नई पड़ताल में सामने आया कि Mpvala.com इकलौती वेबसाइट नहीं थी। जांच के दौरान 'आशु ऑनलाइन' नाम से एक और प्लेटफॉर्म मिला, जहां पर समग्र से जुड़ी कई वही सेवाएं उपलब्ध हैं जो पहले Mpvala पर दिखाई दे रही थीं।

वेबसाइट का तरीका भी लगभग वही बताया जा रहा है। पहले अकाउंट बनाइए, फिर वॉलेट रिचार्ज कीजिए और उसके बाद चंद रुपयों में विभिन्न सेवाओं का इस्तेमाल कीजिए।

व्हाट्सएप चैनल पर खुलेआम प्रचार

जांच में सामने आया कि इस प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों ने व्हाट्सएप चैनल भी बनाया है। वहां समग्र रिकॉर्ड में बदलाव की सेवाओं का प्रचार किया जा रहा है। Mpvala बंद होने के बाद समग्र कार्ड प्रिंट जैसी कुछ सेवाएं नहीं दिख रही हैं। हालांकि बिना ओटीपी कई अन्य सुविधाएं अब भी उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। अगर यह सही है तो वेबसाइट बंद होने के बाद भी नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

सालों से चलता रहा खेल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही थी तो MPSEDC को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। करोड़ों नागरिकों के डेटा और सरकारी योजनाओं से जुड़े सिस्टम में कथित अनधिकृत एक्सेस चलता रहा और विभाग अनजान रहा। यह स्थिति अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

अब अगला खुलासा और भी बड़ा

Mpvala.com का बंद होना कहानी का अंत नहीं, बल्कि शायद शुरुआत है। 'द सूत्र' की पड़ताल अब उन दूसरे प्लेटफॉर्म और पूरे नेटवर्क तक पहुंच चुकी है, जहां कथित तौर पर वही सेवाएं आज भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या केवल वेबसाइट बंद करना ही कार्रवाई मानी जाएगी। या फिर पूरे नेटवर्क की जांच की जाएगी। इसमें मास्टरमाइंड और अनधिकृत एक्सेस की पड़ताल जरूरी है।

वर्षों में हुए संदिग्ध बदलावों की साइबर फॉरेंसिक जांच भी होनी चाहिए। जब तक पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं होगा। तब तक नागरिकों की डिजिटल पहचान पर खतरा बना रहेगा।

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