जजों पर आरोप लगाने वाले वकील नरेंद्र जैन पर आजीवन बैन
Neel Tiwari | Jul 24, 2026, 22:06 IST
जजों पर आरोप लगाने वाले वकील नरेंद्र जैन पर आजीवन बैन
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने मध्यप्रदेश के पूर्व न्यायिक अधिकारी नरेंद्र कुमार जैन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। उन्हें गंभीर पेशेवर कदाचार का दोषी मानते हुए वकालत से स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया गया।
समझें क्या है पूरा मामला
- नरेंद्र कुमार जैन की वकालत पर स्थायी प्रतिबंध लगाया गया।
- जैन ने जजों और संस्थाओं पर निराधार आरोप लगाए थे।
- हाईकोर्ट ने अवमानना मामले में पहले चेतावनी दी थी।
- माफी के बाद भी उन्होंने आपत्तिजनक पोस्ट साझा कीं।
- बीसीआई ने इसे गंभीर पेशेवर कदाचार माना।
क्या है पूरा मामला
यह सिर्फ आलोचना नहीं थी: बीसीआई
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुशासनात्मक समिति ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी न्यायाधीश या संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाने से पहले ठोस आधार होना जरूरी है। समिति के अनुसार निष्पक्ष और जिम्मेदार आलोचना स्वीकार की जा सकती है। लेकिन बिना भरोसेमंद सबूत के लगातार आरोप लगाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
समिति ने कहा कि नरेंद्र कुमार जैन ने कई बार सोशल मीडिया का उपयोग कर न्यायपालिका और अन्य संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाए। रिकॉर्ड में ऐसे आरोपों के समर्थन में कोई विश्वसनीय कानूनी सामग्री नहीं मिली। इसलिए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि पेशेवर जिम्मेदारी का उल्लंघन माना गया।
हाईकोर्ट की चेतावनी के बाद भी नहीं बदला रवैया
इसके बाद अदालत ने उन्हें राहत दी।लेकिन राहत मिलने के बाद भी मामला खत्म नहीं हुआ। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर फिर लगभग उसी तरह की सामग्री साझा की। इसके बाद मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी।
नोटिसों का जवाब नहीं दिया
बीसीआई ने भी उन्हें नोटिस भेजा। शुरुआत में वह पेश हुए और सुनवाई टालने का अनुरोध किया। बाद की सुनवाई में वह उपस्थित नहीं हुए। समिति ने इसे भी गंभीर माना। समिति ने कहा कि लगातार नोटिसों की अनदेखी करना और प्रक्रिया में सहयोग नहीं देना भी पेशेवर जिम्मेदारी के विपरीत है।
बीसीआई ने फैसले में क्या कहा
समिति ने कहा कि यदि ऐसे आचरण के बावजूद किसी अधिवक्ता को वकालत जारी रखने दी जाए, तो गलत संदेश जाएगा। इससे यह लगेगा कि न्यायपालिका की गरिमा पर बार-बार हमला करने के बाद भी कोई बड़ा परिणाम नहीं होता।
अब नरेंद्र कुमार जैन पर क्या असर पड़ेगा
इस आदेश के बाद वह देश के किसी भी न्यायालय, न्यायाधिकरण, प्राधिकरण या ऐसे किसी मंच पर अधिवक्ता के रूप में पेश नहीं हो सकेंगे, जहां कानून के तहत वकालत की अनुमति होती है। यह प्रतिबंध स्थायी रहेगा।
यह फैसला क्यों माना जा रहा है अहम
यदि किसी न्यायाधीश या संस्था पर आरोप लगाए जाते हैं, तो उनके समर्थन में ठोस तथ्य होना जरूरी है। बिना प्रमाण के लगाए गए आरोप न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर कर सकते हैं। इसी वजह से बीसीआई ने इस मामले में सबसे कड़ी कार्रवाई को उचित माना।
बार काउंसिल के प्रत्याशी हैं नरेंद्र कुमार जैन
वह काउंसिल में जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे। आजीवन प्रतिबंध उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। आदेश को चुनौती देने पर उनका पक्ष मांगा गया। हमने उनसे फोन और संदेश के जरिए संपर्क किया। उनका फोन नहीं उठा। संदेश का भी अब तक जवाब नहीं मिला।
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