नेशनल हेराल्ड मामले में बीजेपी ऑफिस का घेराव करेगी एमपी कांग्रेस, जीतू करेंगे लीड
Anjali Dwivedi | Dec 17, 2025, 13:19 IST
MP CONGRESS
नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल गांधी को दिल्ली कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। ED द्वारा लगाए गए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप कोर्ट ने खारिज कर दिए हैं।
नेशनल हेराल्ड केस एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार नेशनल हेराल्ड केस में गांधी परिवार को राहत की खबर मिली है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी की कार्रवाई की जा रही थी, लेकिन दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर ईडी का आवेदन खारिज कर दिया।
कोर्ट ने ईडी की तरफ से दाखिल किए गए आरोपों पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। इससे गांधी परिवार को बड़ी राहत मिली है। कांग्रेस ने इसे सत्य की जीत बताया है।
नेशनल हेराल्ड केस की जड़ें देश के आजादी के आंदोलन से जुड़ी हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने साल 1938 में ‘नेशनल हेराल्ड’ अखबार की स्थापना की थी। इसका प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) नाम की कंपनी करती थी। इस कंपनी के तहत नेशनल हेराल्ड (अंग्रेजी), नवजीवन (हिंदी) और कौमी आवाज (उर्दू) जैसे अखबार निकलते थे।
हालांकि समय के साथ अखबार आर्थिक संकट में फंस गया और साल 2008 में इसका प्रकाशन बंद करना पड़ा। यहीं से विवाद की कहानी शुरू होती है। एजेएल पर कांग्रेस पार्टी का करीब 90 करोड़ रुपए का कर्ज बताया गया। बाद में इस कर्ज के निपटारे के लिए 2010 में ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक नई कंपनी बनाई गई।
नेशनल हेराल्ड का मालिकाना हक रखने वाली AJL के 2010 में 1057 शेयरधारक थे। घाटा होने पर इसकी होल्डिंग यंग इंडिया लिमिटेड को स्थानांतरित कर दी गई। YIL की स्थापना उसी साल यानी 2010 में हुई थी। इसमें तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी निदेशक के रूप में शामिल हुए।
कंपनी में 76% हिस्सेदारी राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी को दी गई। बची 24% कांग्रेस के मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नाडीस (दोनों का निधन हो चुका है) के पास थी।
शेयर ट्रांसफर के बाद पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, इलाहबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू समेत कई शेयरधारकों ने मामले में शिकायत की।
उन्होंने कहा कि यंग इंडिया लिमिटेड ने AJL का अधिग्रहण किया था तब उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया। शेयर ट्रांसफर करने से पहले शेयर होल्डर्स से सहमति भी नहीं ली गई।
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कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विरोध जताने के लिए भोपाल में बीजेपी ऑफिस का घेराव करने का ऐलान किया है। कांग्रेस कार्यकर्ता दोपहर 3 बजे कांग्रेस कार्यालय से बीजेपी कार्यालय की ओर कूच करेंगे और वहां भाजपा कार्यालय का घेराव करेंगे। इस प्रदर्शन का नेतृत्व मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जीतू पटवारी करेंगे।
कांग्रेस पार्टी का कहना है कि भाजपा सरकार ने गांधी परिवार को नेशनल हेराल्ड मामले में फंसाने की कोशिश की है। पार्टी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है, जिसे केवल गांधी परिवार को निशाना बनाने के लिए चलाया जा रहा है।
हालांकि, हाल ही में दिल्ली कोर्ट ने ED की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। कांग्रेस ने इसे सत्य की जीत (Victory of truth) बताते हुए अदालत के फैसले का स्वागत किया। कांग्रेस का कहना है कि अदालत ने साबित कर दिया कि गांधी परिवार के खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं हो पाए हैं। बीजेपी बिना मतलब के नेशनल हेराल्ड केस पर बबाल कर रही थी।
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कोर्ट ने ईडी की तरफ से दाखिल किए गए आरोपों पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। इससे गांधी परिवार को बड़ी राहत मिली है। कांग्रेस ने इसे सत्य की जीत बताया है।
इस फैसले के बाद सियासी माहौल में गर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि पार्टी गांधी परिवार को राजनीतिक बदले की भावना से फंसा रही है। इसी कड़ी में आज (17 दिसंबर) मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी भोपाल में बीजेपी के ऑफिस का घेराव करने करेगी।
नेशनल हेराल्ड केस आखिर है क्या?
हालांकि समय के साथ अखबार आर्थिक संकट में फंस गया और साल 2008 में इसका प्रकाशन बंद करना पड़ा। यहीं से विवाद की कहानी शुरू होती है। एजेएल पर कांग्रेस पार्टी का करीब 90 करोड़ रुपए का कर्ज बताया गया। बाद में इस कर्ज के निपटारे के लिए 2010 में ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक नई कंपनी बनाई गई।
सोनिया-राहुल पर क्या था आरोप ?
- 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड यानी AJL का गठन।
- AJL ने नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज समाचार पत्र प्रकाशित किए।
- 2010 में AJL की होल्डिंग सोनिया-राहुल के प्रभाव वाली YIL को ट्रांसफर हुई।
- सोनिया और राहुल पर AJL को गलत तरीके से अधिग्रहित करने का था आरोप।
नेशनल हेराल्ड से जुड़ा विवाद कहां से शुरू हुआ?
कंपनी में 76% हिस्सेदारी राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी को दी गई। बची 24% कांग्रेस के मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नाडीस (दोनों का निधन हो चुका है) के पास थी।
शेयर ट्रांसफर के बाद पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, इलाहबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू समेत कई शेयरधारकों ने मामले में शिकायत की।
उन्होंने कहा कि यंग इंडिया लिमिटेड ने AJL का अधिग्रहण किया था तब उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया। शेयर ट्रांसफर करने से पहले शेयर होल्डर्स से सहमति भी नहीं ली गई।
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भोपाल में भाजपा ऑफिस का घेराव करेगी कांग्रेस
कांग्रेस का आरोप
दिल्ली कोर्ट का फैसला
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