फर्जी जाति प्रमाण पत्र विवाद: नीरज आनंद लिखार केस की सुनवाई 29 जून को
Pawan Modiya | Jun 28, 2026, 20:50 IST
कोर्ट में सुनवाई
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के संयुक्त संचालक नीरज आनंद लिखार के हल्बा जाति प्रमाण पत्र को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हुई है। करेली नरसिंहपुर निवासी आदित्य ठाकुर की याचिका पर 29 जून को जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट में सुनवाई होगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- नीरज आनंद लिखार के जाति प्रमाण पत्र पर विवाद है।
- हाई कोर्ट में इस मामले में याचिका दाखिल हुई है।
- आदित्य ठाकुर ने यह याचिका दाखिल की है।
- लिखार के भाई का जाति प्रमाण पत्र पहले गलत पाया गया।
- इस मामले की सुनवाई 29 जून को होगी।
याचिका किसने दाखिल की
ठाकुर ने अपनी याचिका में एक और तर्क दिया है। उनका कहना है कि लिखार के भाई अजय आनंद का भी हल्बा जाति प्रमाण पत्र था। राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने अजय आनंद के इस प्रमाण पत्र को गलत पाया था। इसी आधार पर विभाग ने अजय आनंद को उनके पद से रिवर्ट कर दिया था। रिवर्ट का मतलब है कि उन्हें पुराने पद पर वापस भेज दिया गया।
ठाकुर का तर्क है कि भाई का मामला सीधे लिखार से जुड़ा है। उनका कहना है कि जब भाई का प्रमाण पत्र गलत पाया गया तो लिखार का पद पर बने रहना भी नियम के खिलाफ है। याचिका में यही मुख्य आधार बनाया गया है।
कोर्ट का पहले का आदेश
यह मामला हाई कोर्ट में पहले भी पहुंच चुका है। 12 मार्च को हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की थी। उस दिन कोर्ट ने राज्य शासन को एक अहम निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि राज्य स्तरीय छानबीन समिति से इस मामले की जांच कराई जाए। कोर्ट ने इसके लिए 90 दिन की समय सीमा भी तय की थी। यह मामला अब जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट में लिस्टेड हुआ है। सुनवाई की तारीख 29 जून तय की गई है।
जाति प्रमाण पत्र मामलों की अहमियत
जब किसी अधिकारी या कर्मचारी का प्रमाण पत्र गलत पाया जाता है तो विभाग कार्रवाई करता है। यह कार्रवाई पद से हटाने या रिवर्ट करने के रूप में हो सकती है। नीरज आनंद के भाई अजय आनंद के मामले में भी ऐसा ही हुआ था। अब उसी आधार पर लिखार के मामले को भी कोर्ट में चुनौती दी गई है।
क्या कह रहे हैं नियम
हालांकि अभी यह मामला सिर्फ याचिका और जांच के स्तर पर है। अंतिम फैसला हाई कोर्ट की सुनवाई और छानबीन समिति की रिपोर्ट के बाद ही आएगा। तब तक नीरज आनंद लिखार पर लगे आरोप साबित नहीं माने जा सकते। दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।
आगे क्या हो सकता है
प्रशासनिक हलकों में यह मामला पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर निगम जैसे महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े होने के कारण इस केस पर खास नजर है। अब सबकी निगाहें कल की सुनवाई पर टिकी हैं।
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