News Strike: आंगनवाड़ियों में तीन महीने से नहीं बंटा टेक होम राशन, कुपोषण की जंग में पिछड़ेगा प्रदेश?

Harish Divekar | May 21, 2026, 07:00 IST
Share
the News strike
Photograph: (the sootr)

मप्र की आंगनवाड़ियों में सरकारी तिजोरी खाली होने से तीन महीने से 'टेक होम राशन' बंद है। पुराना 300 करोड़ का भुगतान न होने से सप्लायर्स ने सप्लाई रोक दी है। इसके चलते प्रदेश के 45 जिलों में कुपोषण और स्टंटिंग का खतरा भयानक रूप से बढ़ गया है।

News Strike: सरकार जब शौचालय बनवाती है तो उसका ढिंढोरा घर घर में पीटा जाता है। लेकिन जब सरकारी योजना पर निर्भर बच्चों को महीनों तक खाना नहीं मिलता तो उसकी चर्चा क्यों नहीं होती। मैं अक्सर आपसे प्रदेश की राजनीति और राजनेताओं की बात करता हूं। कभी कभी अफसरशाही पर भी बात करता हूं। लेकिन आज इन सबसे ज्यादा अहम और गंभीर मसले पर बात करने जा रहा हूं। ये मामला जुड़ा है प्रदेश के हजारों लाखों बच्चों से, जिनका भविष्य, जिनकी सेहत दांव पर है। इसके जिम्मेदार कौन हैं। क्या सरकार के स्तर से बच्चों से जुड़ों मामलों में लापरवाही बरती जा रही है, या अफसर सरकार के नुमाइंदों तक सही जानकारी नहीं पहुंचा रहे हैं। कमी जिस भी स्तर पर है खामियाजा भुगत रहे हैं प्रदेश के तीस जिलों के बच्चे।

नमस्कार

अक्षय कुमार की फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कथा रिलीज हुई तब हर तरफ ये सवाल था कि ये कैसा नाम है। क्या टॉयलेट और प्रेम कथा का कोई नाता हो सकता है। लेकिन फिल्म रिलीज हुई और हिट भी हुई, जिसने साबित कर दिया कि ये नाम भी जस्टिफाइड था और आधारभूत जरूरतें पूरी होती हैं तो प्रेम कथा भी स्मूदली आगे बढ़ती है। इस फिल्म के जरिए उस दौर में घर घर में बन रहे शौचालयों की योजना को हाईलाइट किया गया था।

🔴News Strike: आंगनवाड़ियों में 3 महीने से नहीं बंटा टेक होम राशन, कुपोषण की जंग में पिछड़ेगा प्रदेश?

तीस जिलों में तीन महीने से टेक होम राशन नहीं पहुंचा!

आप जरूर सोच सकते हैं कि बात तो मैं बच्चों के खाने की करने वाला था, फिर ये टॉयलेट एक प्रेमकथा की बात कहां से आ गई। असल में मैं आपको सिर्फ इतना समझाना चाहता हूं कि आम लोगों की जरूरतों से जुड़ी हर सरकारी योजना अहम होती है। उसके शुरू होने पर अगर बेहतरीन पब्लिसिटी होती है तो किसी योजना में लेतलाली होने पर उसकी चर्चा भी जोरशोर से होनी चाहिए। लेकिन अफसोस कि मप्र में एक अहम मुद्दे पर ज्यादा बात नहीं हो रही। ये मुद्दा जुड़ा है प्रदेश के लाखों बच्चों के खाने से। कांग्रेस ने ये दावा किया है कि प्रदेश के करीब तीस जिलों में तीन महीने से टेक होम राशन नहीं पहुंचा है।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले में अपने तमाम सोशल मीडिया हैंडल से एक ट्वीट किया है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि मप्र की आंगनवाड़ियां भूखी हैं। क्योंकि सरकारी तिजोरी खाली है। जबकि हर महीने कर्ज लिया जा रहा है। सवाल ये है कि कर्ज का पैसा कहां जा रहा है। इसके बाद उन्होंने एक ग्राफिक भी पोस्ट किया है, जिसमें कुछ आंकड़े और फैक्ट के जरिए ये बताया गया है कि कहां कहां टेक होम राशन नहीं पहुंचा है.

पटवारी के ट्वीट के मुताबिक सागर संभाग की हालत सबसे खराब है. नर्मदापुरम, रीवा औऱ मंडला संभाग भी बेहाल हैं..
सागर संभाग में 74 बाल विकास परियोजनाओं में टेक होम राशन 26 फरवरी 2026 से नहीं पहुंचा है। गर्भवती महिलाओं और ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं और बच्चों को भी पोषण आहार नहीं मिला है।

News Strike: मंत्रिमंडल विस्तार से पहले MP BJP में बड़ा ट्विस्ट, सत्ता संगठन में तालमेल के लिए आया पार्टी का ‘मास्टरमाइंड’!

निजी सप्लायर्स ने भुगतान न होने पर रोकी सप्लाई

निजी सप्लायर्स ने पुराने भुगतान न होने पर सामग्री की सप्लाई रोक दी है। प्रदेश के 7 प्लांट्स पर करीब 3 सौ करोड़ रु. की उधारी बताई गई है। महिला बाल विकास विभाग और आजीविका मिशन के बीच लगातार चर्चा हो रही है। इसके बावजूद सप्लाई शुरू होने की कोई डेट अब तक सामने नहीं आई है। वित्त विभाग ने साल 2026-2027 के लिए टेक होम राशन के लिए 134 करोड़ रु. मंजूर किए। लेकिन राशि अब तक जारी नहीं हो सकी है।

मंडला जिले के अधिकारियों ने इस संबंध में अप्रैल 2026 में पत्र लिख कर ये बताया था कि अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 तक टेक होम राशन उपलब्ध नहीं हुआ है। महिला एवं बाल विकास विभाग भी ये मान चुका है कि सप्लाई चैन टूटने से राष्ट्रीय स्तर के अभियानों में जिलों की रैकिंग गिरी है। ये सारे दावे जीतू पटवारी की पोस्ट में किए गए हैं। जो ये जाहिर करते हैं कि मामला गंभीर है।

महिला बाल विकास विभाग कमिश्नर ने मांगी जानकारी

अंदरखानों में ये भी खबर है कि अधिकारी बार बार इस बारे में जानकारी दे रहे हैं। लेकिन हर बार उन्हें यही जवाब मिल रहा है कि संयंत्र बंद है। वो कब तक ठीक होगा, क्यों बंद है और इसके बदले दूसरे इंतजाम क्या किए जा सकते हैं। इस पर कोई जवाब नहीं मिल रहा है। इस मामले में संबंधित अफसरों ने महिला बाल विकास विभाग की कमिश्नर और नौ जिलों के कलेक्टर को भी पत्र के मार्फत जानकारी पहुंचाई है। ये भी चेताया है कि टेक होम राशन और पोषण आहार समय पर नहीं मिला तो कुपोषण नियंत्रण कार्यक्रम पर भी असर पड़ेगा। जच्चा और बच्चा दोनों की सेहत भी प्रभावित होगी।

News Strike: पेट्रोल के दाम बढ़े, पीएम की अपील के बाद इस्तेमाल घटाने पर जोर, अफसरों पर भी लागू होंगी शर्तें?

मप्र के कई जिलों में गंभीर कुपोषण 17 फीसदी तक

मैंने आपसे पहले ही कहा था कि आज मैं आपसे बच्चों की सेहत पर बात करूंगा। क्योंकि कुपोषण मप्र में हमेशा से ही एक गंभीर मसला रहा है। फ्री प्रेस जर्नल ने हाल ही में कुपोषण के ताजा आंकड़ों पर एक न्यूज पब्लिश की थी। ये न्यूज हैरान करने वाली है। इतने तमाम प्रयासों के बावजूद मप्र के कई जिलों में गंभीर कुपोषण 17 फीसदी तक पहुंच गया है। जो पहले कभी नौ से दस फीसदी के बीच ही था।

रिपोर्ट में कुछ जिलों का हवाला देकर बताया गया है कि श्योपुर में स्टंटिंग के केस 50 से 51 फीसदी हो गए हैं। स्टंटिंग यानी कि नवजात बच्चों की लंबाई बहुत कम होना, जिसकी वजह गर्भ में सही या जरूरी पोषण न मिल पाना होता है। शिवपुरी में भी 47 से 49 परसेंट के बीच स्टंटिंग के मामले हैं। खंडवा, सागर, जबलपुर और अशोकनगर में भी हालात चौंकाने वाले हैं।

अब जरा कुछ दहला देने वाले केस भी सुन लीजिए। कुछ ही दिन पहले सतना में चार महीने की सुप्रांशी की मौत हो गई वजह थी कुपोषण। इसके बाद जांच हुई तो दस और बच्चे कुपोषित मिले। पन्ना जिले में तीन महीने की पल्लवी गंभीर कुपोषण से जूझ रही है। मजदूरी करके घर चलाने वाले माता पिता के पास इतना समय नहीं है कि उसके पोषण पर ध्यान दे सकें। ये महज केस नहीं हैं, ये हमारे प्रदेश का भविष्य है जो कुपोषण की भेंट चढ़ता हुआ नजर आ रहा है।

News Strike: आगे-आगे रूम फ्रेशनर, पीछे-पीछे मंत्री, क्या ऐसे औचक निरीक्षण से बेहतर होंगे सरकारी अस्पतालों के हालात?

कुपोषण में प्रदेश के 45 जिले रेड जोन में

कुपोषण के हालात सिर्फ तीन महीने से नहीं बिगड़ रहे उससे पहले से ही खराब हैं। 11 नवंबर 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 45 जिलों में कुपोषण तेजी से बढ़ा है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं। जिन 45 जिलों में कुपोषण ज्यादा है उन्हें रेड जोन में रखा गया है। इसी रिपोर्ट में पोषण ट्रेकर ऐप के हवाले से ये भी दावा किया गया है कि कुपोषण की स्थिति में सुधार हो रहा है। लेकिन अब भी कम वजन और दुबलेपन जैसी खतरनाक स्थिति में मप्र का दूसरा स्थान है।

ऐसे हालात में पोषण आहार और टेक होम राशन का आंगनवाड़ी केंद्रों पर न बंट पाना कितना गंभीर है ये आप समझ ही सकते हैं। सरकार को चाहिए कि वो बाकी कामों से पहले इस और ध्यान दे। अगर संयंत्र बंद हैं तो कब से बंद हैं और उन्हें दोबारा शुरू करने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए इस पर एक्शन होना जरूरी है। अगर अफसर पत्र लिख कर शिकायत कर चुके हैं तो उस पर एक्शन लेने में देर क्यों हो रही है। क्या कुपोषण से पीड़ित बच्चों की मौत की खबरें सुनकर इस मसले की अनदेखी करने वाले अफसरों का दिल नहीं पसीजता।

जिस कुपोषण की जंग में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा था। क्या ये लापरवाही उस रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगाएगी। मसला गंभीर है जिससे निपटने के लिए सरकार और सिस्टम दोनों की गंभीरता भी जरूरी है।

Tags:
  • News Strike
  • अक्षय कुमार
  • लापरवाही
  • कुपोषण
  • कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी
  • महिला बाल विकास विभाग
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज