विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर स्पीकर की बैठक, उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे सबूत

मध्य प्रदेश के बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर तलवार लटक रही है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष को दलबदल के पुख्ता सबूत सौंपे हैं। 27 फरवरी को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई है।

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Amresh Kushwaha
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BINA. बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर काफी वक्त से सवाल उठ रहे हैं। इसी मुद्दे पर मंगलवार, 10 फरवरी को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने एक बैठक बुलाई थी। यह बैठक नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के साथ की गई थी।

इस मुलाकात का मकसद दलबदल कानून के तहत विधायक की सदस्यता पर चल रही सुनवाई को आगे बढ़ाना था। आपको बता दें कि सप्रे ने पहले कांग्रेस के टिकट पर बीना सीट से चुनाव जीता था, लेकिन बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था। 

हाईकोर्ट ने स्पीकर के पाले में डाला था मामला

यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई में सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल ने कहा था कि यह मामला अभी विधानसभा अध्यक्ष के पास है।

फिर कोर्ट ने 15 जनवरी को सरकार की स्थगन अर्जी मंजूर करते हुए यह मामला स्पीकर के पास डाल दिया था। अब अगली सुनवाई 27 फरवरी को होनी है, और उससे पहले स्पीकर को इस पर ठोस कदम उठाना होगा।

उमंग सिंघार ने सौंपे पुख्ता सबूत

बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को निर्मला सप्रे के खिलाफ पुख्ता सबूत दिए हैं। कांग्रेस की मुख्य आपत्ति ये है कि विधायक ने न सिर्फ भाजपा के मंच पर शपथ ली, बल्कि सार्वजनिक बयान भी दिए थे।

 सिंघार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी जिक्र किया, जिसमें ऐसे मामलों को 90 दिनों के अंदर हल करने की बात कही गई है।

बीजेपी उपचुनाव से डर रही- सिंघार

वहीं, इस दौरान सियासी बयानबाजी में उमंग सिंघार ने भाजपा पर जमकर हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उपचुनाव में उतरने से डर रही है। सिंघार का कहना है कि अगर बीना में चुनाव होते हैं, तो जीत कांग्रेस की ही होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा कोर्ट को गुमराह करने के लिए कानूनी जवाबों का इस्तेमाल कर रही है। उन्हें उम्मीद है कि अगले 8 से 15 दिनों में अध्यक्ष इस मामले पर अपना अंतिम फैसला ले लेंगे।

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