अफसरों की इच्छा पर बदलती रही यूनिफार्म, पोषण आहार और मध्याह्न भोजन व्यवस्था
Sanjay Sharma | Feb 19, 2026, 18:52 IST
uniform nutrition
मध्य प्रदेश में योजनाओं के बार-बार बदलाव से परेशानी हुई। बच्चों को समस्याएं हुईं और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। यूनिफार्म वितरण, पोषण आहार और मिड डे मील में बदलाव हुए।
News in Short
- मध्य प्रदेश में योजनाओं के बार-बार बदलाव से सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
- यूनिफार्म वितरण व्यवस्था में बदलाव ने बच्चों को परेशानी में डाला।
- पोषण आहार और मिड डे मील वितरण में अव्यवस्था रही।
- योजनाओं के बदलाव से 25% आबादी प्रभावित हुई है।
- अधिकारियों के अविवेकपूर्ण निर्णयों के कारण कई बार व्यवस्था में रुकावट आई।
News in Detail
मध्य प्रदेश को परीक्षण प्रयोगशाला बनाने वाले अधिकारियों से न इसको लेकर कोई सवाल जवाब तक नहीं किए गए। प्रदेश में ऐसी कई योजनाएं और सरकारी काम हैं जिनके क्रियान्वयन के संबंध में अविवेकपूर्ण निर्णय लिए जाते रहे हैं। 'द सूत्र' ने बीते एक दशक में ऐसी योजनाओं और व्यवस्थाओं की पड़ताल की है।
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आदेशों से बदलती रही व्यवस्था
स्कूल शिक्षा विभाग ने जून 2025 में केबिनेट की स्वीकृति के बाद आदेश जारी कर दिया है। अब विद्यार्थियों को नकद राशि की जगह स्वसहायता समूहों से सिलवाकर यूनिफार्म दी जाएगी।
प्रदेश में 2004 से स्कूली विद्यार्थियों के लिए यूनिफार्म वितरण की व्यवस्था शुरू की गई थी। पहले अलग-अलग फर्मों के माध्यम से खरीदकर यूनिफार्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।
इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद यूनिफार्म वितरण की जिम्मेदारी स्वसहायता समूहों को सौंप दी गई। साल 2016 में यह काम स्वसहायता समूहों से वापस लेकर उनके खातों में 600 रुपए यूनिफार्म खरीदने के लिए उपलब्ध कराए जाने लगे।
अब इस व्यवस्था में फिर बदलाव किया गया है। इसी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश में सांदीपनी विद्यालयों की तर्ज पर एक रंग और डिजाइन के यूनिफार्म उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पर सरकार स्वसहायता समूहों को 350 करोड़ रुपए देगी।
स्कूल शिक्षा विभाग के उपसचिव पीके सिंह के अनुसार स्वसहायता समूहों से एकीकृत रूप से यूनिफार्म खरीदी जाएगी। इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
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पोषण आहार की कुपोषित व्यवस्था
पहले सोया बरी और सत्तू- दलिया का थोक वितरण आंगनबाड़ियों को किया जाता था। बाद में इसे आंगनबाड़ी केंद्रों में ही पकाकर देना शुरू किया गया।
डेढ़ दशक पहले स्वसहायता केंद्रों को पोषण आहार तैयार करने का काम सौंप दिया गया। लेकिन यह व्यवस्था भी चंद साल बाद ही बदल गई। 2012 के बाद प्रदेश के बड़े शहरों में पोषण आहार वितरण की एकीकृत व्यवस्था शुरू हुई।
यह काम टेंडर के जरिए बड़ी फर्मों को सौंप दिया गया। इसके बाद यह व्यवस्था टेक होम राशन में बदल गई। यह मामला 2019 में हाईकोर्ट भी पहुंचा था। इसी साल तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पोषण आहार व्यवस्था एमपी एग्रो को सौंप दी।
डेढ़ साल बाद आई बीजेपी सरकार ने इसमें फिर बदलाव कर दिया और पोषण आहार वितरण का काम स्वसहायता केंद्रों के हाथ आ गया। अब वितरण में गड़बड़ी और देरी की शिकायतों के बाद सरकार निजी क्षेत्र की फर्मों को यह काम सौंपने जा रही है।
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उठापटक भरे रहे दो दशक
पांच साल गुजरने के बाद अधिकारियों ने इस व्यवस्था को बदल दिया। 2001 में स्कूलों में दलिया और खिचड़ी पकाकर दी जाने लगी लेकिन यह व्यवस्था भी तीन साल ही चल सकी। 2004 में स्कूलों में मेन्यू के आधार पर हर दिन अलग- अलग तरह का रुचिकर भोजन उपलब्ध कराना शुरू कर दिया गया।
स्कूलों में यह व्यवस्था कहीं स्वसहायता समूह संभाल रहे हैं तो कहीं अलग- अलग फर्मों के हाथों में सौंपी गई है। मध्य प्रदेश सरकार स्कूली छात्रों को मध्याह्न भोजन मुहैया कराने पर सालाना 1600 करोड़ रुपए खर्च कर रही है।
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25 फीसदी आबादी पर असर
वहीं 95 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों से लगभग 53 लाख बच्चों, गर्भवती, धात्री महिलाओं को पोषण आहार का वितरण किया जाता है। इसके अलावा प्रदेश के 88 हजार से ज्यादा स्कूलों में 60 लाख से ज्यादा बच्चों को मिड डे मील दिया जा रहा है।
इन तीनों योजनाओं के लाभार्थियों का आंकड़ा 2 करोड़ तक पहुंचता है। इसका सीधा मतलब है मध्य प्रदेश की 25 फीसदी आबादी तीनों योजनाओं से जुड़ी है।
बार-बार बदलाव की दुविधा
वहीं यूनिफार्म वितरण की व्यवस्था में बदलाव का असर बीते सालों में कई बार नजर आया है। जब काम समूह से फर्मों को या फर्मों से स्वसहायता समूहों को दिया गया तो हजारों बच्चों को पूरा सत्र बीतने के बावजूद यूनिफार्म ही नहीं मिली।
ऐसी गड़बड़ियां आती रही सामने
- स्कूल यूनिफार्म : यूनिफार्म के लिए दिए गए रुपयों का दुरुपयोग, स्वसहायता समूहों द्वारा समय पर यूनिफार्म उपलब्ध नहीं कराना, गुणवत्ताहीन यूनिफार्म।
- पोषण आहर : आंगनबाड़ी में कीड़े लगा और पोषणरहित आहार वितरण, राशन दुकान और समूहों से समय पर आहार की उपलब्धता नहीं होना ।
- मध्याह्न भोजन : कैग की रिपोर्ट में टेक होम राशन में गड़बड़ी का खुलासा, वितरण में जिन वाहनों को ट्रक बताया उन नंबरों पर बाइक, टैंकर और कार रजिस्टर मिले।
इन विभागों की है भूमिका
- स्कूल शिक्षा विभाग: प्रमुख सचिव के अलावा डीपीआई कमिश्नर और राज्य शिक्षा केंद्र संचालक।
- महिला एवं बाल विकास : विभागीय सचिव और कमिश्नर के अलावा पोषण अभियान सलाहकार मंडल।
- मध्याह्न भोजन : सचिव, राज्य शिक्षा केंद्र संचालक।
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