ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में पंडितों के प्रवेश पर रोक, कलेक्टर तक पहुंचा विवाद
Sourabh Bhatnagar | Jul 22, 2026, 14:27 IST
omkareshwar pandit entry ban controversy
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में बुधवार सुबह 9 बजे के बाद पंडितों का प्रवेश रोक दिया गया। सुरक्षा कर्मियों ने टी-पॉइंट पर ही उन्हें रोका। नाराज पंडितों ने प्रशासन के सामने तीन मांगें रखीं और खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
मुश्ताक मंसूरी @ खंडवा
समझें क्या है पूरा मामला
- ओंकारेश्वर मंदिर में सुबह 9 बजे बाद पंडितों का प्रवेश रोका गया।
- सुरक्षा कर्मियों ने टी-पॉइंट पर ही पंडितों को रोक दिया।
- यह आदेश एसडीएम पुनासा पंकज वर्मा के निर्देश पर लागू हुआ बताया गया।
- पंडितों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं।
- कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।
ओंकारेश्वर देशभर के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यहां रोज हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रवेश को लेकर लगी यह रोक बड़ा मुद्दा बन गई है। पंडितों का कहना है कि यह फैसला बिना किसी पूर्व सूचना के लिया गया।
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मंदिर परिसर में क्या हुआ
उनके मुताबिक सुबह 9 बजे के बाद किसी भी पंडित को अंदर नहीं जाने दिया जाएगा। आदेश तोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। इससे मंदिर परिसर में पंडितों और सुरक्षा कर्मियों के बीच तनाव बढ़ गया।
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किसने दिए ये निर्देश
इससे साफ है कि यह फैसला अचानक नहीं, बल्कि किसी योजना के तहत लिया गया है। हालांकि इस बारे में कोई लिखित आदेश अब तक सामने नहीं आया है। पंडितों का कहना है कि उन्हें सीधे मौखिक तरीके से रोका गया। उनका सवाल है कि इतना बड़ा फैसला बिना लिखित आदेश के कैसे लागू किया जा सकता है।
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पंडितों ने रखीं तीन मांगें
पंडितों का कहना है कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु अक्सर सुबह 9 बजे के बाद भी दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यह रोक श्रद्धालुओं और पंडितों दोनों के लिए मुश्किल खड़ी करेगी।
मध्यप्रदेश में ओंकारेश्वर मंदिर केपंडितों का मानना है कि यह सिर्फ नियम का मामला नहीं, बल्कि उनकी रोजी-रोटी से भी जुड़ा है। कई पंडित परिवार पीढ़ियों से मंदिर में पूजा-पाठ का काम करते आ रहे हैं। ऐसे में अचानक लगी रोक से उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
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कलेक्टर ने दिया आश्वासन
Omkareshwara Temple केपंडितों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही स्पष्ट रास्ता निकालेगा। कुछ स्थानीय लोगों ने भी इसे पंडितों की आजीविका से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि प्रशासन को साफ दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। कुछ श्रद्धालुओं ने भी कहा कि इस तरह की रोक से उनके पारंपरिक पूजन में बाधा आएगी। उनका कहना है कि दूर से आने वाले भक्तों के लिए समय की सीमा तय करना ठीक नहीं है।
आगे क्या होगा
श्रद्धालुओं की सुविधा और पंडितों के अधिकार, दोनों को साधना प्रशासन के लिए चुनौती होगी। पंडितों का कहना है कि जब तक स्पष्ट आदेश नहीं आता, तब तक भ्रम की स्थिति बनी रहेगी। उनकी मांग है कि मंदिर ट्रस्ट जल्द बैठक बुलाकर इस पर फैसला ले। कई पंडितों ने कहा कि परंपरा से चली आ रही व्यवस्था को अचानक बदलना ठीक नहीं है। उनका कहना है कि बदलाव से पहले सभी पक्षों से बात होनी चाहिए थी। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर अब सबकी नजर टिकी है। इस बीच मंदिर में रोज आने वाले श्रद्धालु भी असमंजस में हैं।
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