एमपी के ग्वालियर में रखा है हाथ से लिखा असली संविधान, जानें इसका इतिहास
Kaushiki | Aug 14, 2026, 16:26 IST
Original Constitution Copy in Gwalior
ग्वालियर के केंद्रीय पुस्तकालय में भारत के संविधान की असली और दुर्लभ मूल प्रति सुरक्षित है। हाथ से लिखी इस कॉपी पर सोने की नक्काशी है। इसके आखिरी पन्ने पर डॉ. आंबेडकर और नेहरू समेत 286 दिग्गजों के असली दस्तखत मौजूद हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- ग्वालियर की सेंट्रल लाइब्रेरी में देश के संविधान की असली प्रति मौजूद है।
- इस दुर्लभ पांडुलिपि के पन्नों पर सोने की सुंदर नक्काशी की गई है।
- आखिरी पन्ने पर डॉ. आंबेडकर और नेहरू समेत 286 नेताओं के दस्तखत हैं।
- देश भर में ऐसी सिर्फ 16 मूल हस्तलिखित प्रतियां भेजी गई थीं।
- सुरक्षा कारणों से अब इसका डिजिटल वर्जन आम लोगों को दिखाया जाता है।
ग्वालियर का सेंट्रल लाइब्रेरी
ग्वालियर के महाराज बाड़ा स्थित डिविशनल सेंट्रल लाइब्रेरी में ये ऐतिहासिक धरोहर पूरी आन-बान-शान के साथ रखी है। यह सिर्फ एक किताब नहीं है, बल्कि भारत के इतिहास और कला का एक महान नमूना है। हाथ से लिखी गई इस पांडुलिपि के हर पन्ने पर सोने से खूबसूरत नक्काशी की गई है।
इसके सबसे आखिरी पन्ने पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. भीमराव आंबेडकर, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे 286 महान नेताओं के असली सिग्नेचर मौजूद हैं।
आजादी के पावन पर्व पर इस नायाब डॉक्यूमेंट को देखने और इसके बारे में जानने के लिए छात्रों और युवाओं में बहुत क्रेज रहता है। आइए इस आर्टिकल में हम संविधान की इस रेयर कॉपी के इतिहास, इसकी बनावट और ग्वालियर पहुंचने की स्टोरी को जानें।
Mp News:ग्वालियर में सुरक्षित है भारतीय संविधान की मूल प्रति; इन 286 सदस्यों के हैं प्रति में हस्ताक्षर - Mp News: The Original Copy Of The Indian Constitution Is Safe In Gwalior. -
ग्वालियर कैसे पहुंची संविधान की कॉपी
इसका मकसद आम जनता को देश के संविधान से सीधे जोड़ना था। इसी फैसले के तहत एक प्रति ग्वालियर के सेंट्रल लाइब्रेरी को मिली। ग्वालियर में इसे बहुत कड़ी सुरक्षा और संरक्षण के साथ रखा गया है।
आलीजा बहादुर लाइब्रेरी का इतिहास
अब इसे डिविशनल सेंट्रल लाइब्रेरी के नाम से जाना जाता है। यहां भारत के इतिहास से जुड़े कई दुर्लभ डॉक्यूमेंट और किताबें हैं संविधान की असली प्रति मिलने से इसका महत्व और अधिक बढ़ गया।
ग्वालियर में रखी है सोने की सुनहरी किताब, पॉवर ऐसी की साल के तीन दिन होते हैं दीदार
सोने की नक्काशी और सुंदर कैलीग्राफी
बाकी पन्नों के बॉर्डर्स पर भी सोने की पॉलिश से लिपाई की गई है। सुनहरी नक्काशी से इसके पन्ने आज भी चमकते और दमकते नजर आते हैं। इसकी आर्टिस्टिक ब्यूटी देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।
न टाइपिंग, न प्रिंटिंग... ऐसे लिखा गया था दुनिया का सबसे बड़ा संविधान, पढ़ें 77 साल बाद भी कैसे सुरक्षित हैं इसके पन्ने
प्राचीन इतिहास और कला के सुंदर चित्र
ये चित्रकारी दर्शाती है कि भारत का शासन मॉडल प्राचीन काल से समृद्ध है। ये डॉक्यूमेंट भारत की सांस्कृतिक विकास यात्रा को बहुत सुंदर ढंग से बताता है। विद्यार्थियों के लिए यह भारतीय इतिहास को समझने का एक शानदार जरिया है।
मध्य प्रदेश के इस शहर में क्यों रखी है संविधान की मूल प्रति, इसके दीदार की क्या हैं तारीखें
286 दिग्गजों के असली सिग्नेचर का सच
ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर के सिग्नेचर भी यहां दर्ज हैं। पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का हस्ताक्षर भी इस पर मौजूद है। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी इस पन्ने पर साइन किए थे।
ग्वालियर में सुरक्षित है भारतीय संविधान की मूल प्रति, सोने से की गई रूप-सज्जा
कड़े सुरक्षा इंतजाम और डिजिटल डिस्प्ले
आम जनता और छात्रों के लिए अब इसका डिजिटल वर्जन उपलब्ध है। पुस्तकालय में लगे डिजिटल स्क्रीन पर लोग हर पन्ना देख सकते हैं। इससे मूल डॉक्यूमेंट को नुकसान पहुंचाए बिना जानकारी आसानी से मिलती है।
राष्ट्रीय पर्वों पर छात्रों का भारी उत्साह
संविधान के पन्नों की डिजिटल प्रति देखकर वे इसकी कला को समझते हैं। ये पुस्तकालय आज की युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ा एजुकेशनल हब है। यहां आकर लोगों को अपने देश के कानून पर गहरा सम्मान महसूस होता है।
Source:
- Records of Divisional Central Library, Maharaj Bada, Gwalior (Madhya Pradesh)
FAQ
- ग्वालियर में रखी संविधान की असली प्रति में क्या खास बातें हैं?
ग्वालियर में रखी संविधान की प्रति पूरी तरह हाथ से लिखी गई है। इसके पन्नों पर सोने की पॉलिश और नक्काशी है। इसके आखिरी पन्ने पर डॉ. आंबेडकर और नेहरू सहित 286 दिग्गजों के असली दस्तखत हैं। - देश में हाथ से लिखे संविधान की कुल कितनी मूल प्रतियां बनाई गई थीं?
अंग्रेजी में हाथ से लिखे गए भारत के संविधान की कुल 16 मूल प्रतियां तैयार की गई थीं। इनमें से एक संसद भवन में रखी गई और बाकी ग्वालियर जैसी प्रसिद्ध सेंट्रल लाइब्रेरियों में भेजी गईं। - आम जनता ग्वालियर में संविधान की असली प्रति को कैसे देख सकती है?
सुरक्षा कारणों से मूल हस्तलिखित दस्तावेज को कड़े सुरक्षा घेरे में रखा गया है। आम लोगों और छात्रों के दीदार के लिए ग्वालियर लाइब्रेरी में इसका हाई-क्वालिटी डिजिटल वर्जन उपलब्ध कराया गया है।
सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ापन: संविधान में परिभाषा अब भी अधूरी
Partition Horror Day: 14 अगस्त 1947 को संविधान हॉल में क्या-क्या हुआ था?
टूटी झोपड़ी और हाथ में संविधान... मिलिए जंतर- मंतर पर वायरल हुए मोहम्मद इरफान से
उसके घर पर छत नहीं है... उसने संविधान के सपनों को अपना आसमान बना लिया!
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman