सीएम मोहन यादव का ऐलान: पंचायत सचिवों का रिटायरमेंट 62 साल में, मिलेगा 7वां वेतनमान

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पंचायत सचिवों की रिटायरमेंट आयु 62 वर्ष तक बढ़ाने की घोषणा की। उन्होंने पंचायतों की भूमिका को मजबूत कर रोजगार और आत्मनिर्भरता बढ़ाने की बात की।

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Ramanand Tiwari
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News in Short

  • पंचायत सचिवों के लिए कई अहम फैसले किए गए हैं। सेवानिवृत्ति आयु 62 साल तक बढ़ाई गई है। 
  • सीएम मोहन यादव ने पंचायत सचिवों के रिटायरमेंट की आयु सीमा बढ़ाकर 62 वर्ष करने की घोषणा की।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि बेरोजगारों को काम देकर उनके सपनों को साकार करना सरकार की प्राथमिकता है। 
  • गांवों में छोटे उद्योग और कारखानों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी।
  • सीएम ने महात्मा गांधी का स्मरण करते हुए कहा कि अगर गांव, किसान और गरीब आगे बढ़ेंगे, तो देश प्रगति करेगा।

News in Detail 

सीएम मोहन यादव ने कहा कि भारत की असली ताकत उसके गांवों में है। महात्मा गांधी का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि यदि गांव, किसान और गरीब आगे बढ़ेंगे, तो देश प्रगति करेगा। उन्होंने पंचायत सचिवों की रिटायरमेंट आयु सीमा 62 साल करने की घोषणा की। सरकार का फोकस गांव-केंद्रित विकास पर है, जिससे रोजगार और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।

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पंचायत सचिवों के लिए बड़ी घोषणाएं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पंचायत सचिवों के हित में कई अहम फैसलों की घोषणा की है। सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष तक बढ़ाई गई है। 13 सितंबर 2023 से सातवां वेतनमान लागू होगा। 1300 रुपए का विशेष भत्ता मिलेगा। मृत्यु के बाद 1.5 लाख अनुग्रह राशि अब वापस नहीं ली जाएगी।

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रोजगार और आत्मनिर्भरता पर जोर

सीएम ने कहा कि बेरोजगारों को काम देकर उनके सपनों को साकार करना सरकार की प्राथमिकता है। ग्रामीण अंचलों में छोटे उद्योग और कारखाने लगेंगे तो आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और गांव समृद्ध होंगे। यही मॉडल देश की प्रगति की नींव बनेगा।

मोदी विजन: चार स्तंभ, एक लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा। गरीब, महिला, युवा और किसान को केंद्र में रखकर योजनाएं चलाई जा रही हैं। पंचायतें इस विजन को जमीन पर उतारने की सबसे मजबूत कड़ी हैं।

पंचायत सचिव: व्यवस्था की असली रीढ़

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पंचायती राज व्यवस्था की सबसे मजबूत इकाई पंचायत है और उसकी आत्मा पंचायत सचिव हैं। चाहे निर्णय प्रधानमंत्री का हो या राज्य सरकार का, उसका वास्तविक क्रियान्वयन पंचायत स्तर पर ही होता है।

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हनुमान जी जैसी भूमिका निभा रहे सचिव

सीएम ने उदाहरण देते हुए कहा कि हनुमान जी के समय असंभव कार्य किए गए थे। आज वही जिम्मेदारी पंचायत सचिव निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, जल गंगा अभियान, हर घर जल योजना की सफलता सचिवों के बिना संभव नहीं।

लोगों का भरोसा, सचिवों की पहचान

सीएम ने कहा कि कई बार लोग अपने परिवार से ज्यादा भरोसा पंचायत सचिव पर करते हैं। सुख-दुख में सचिव को सहभागी मानते हैं। यही वजह है कि सरकार सचिवों को सशक्त और सुरक्षित बनाना चाहती है।

2026 बनेगा कृषि कल्याण वर्ष

सीएम ने बताया कि वर्ष 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इसमें 16 विभागों को जोड़ा गया है। इन योजनाओं को किसानों और हितग्राहियों तक पहुंचाने में पंचायत सचिवों की भूमिका सबसे अहम होगी।

डिजिटल युग में भी गांव मजबूत

डिजिटल दौर और वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा। कोविड काल से अब तक गांवों ने हर संकट का सामना किया। यह भारत की ग्रामीण शक्ति का प्रमाण है।

अनुकंपा नियुक्ति पर न्यायालय में पहल

पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि समयमान वेतनमान का आदेश 2025 में जारी हुआ। अनुकंपा नियुक्ति में पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़े मुद्दे को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। इसका समाधान निकाला जाएगा।

गांवों को ज्यादा अधिकार, बेहतर ढांचा

मुख्यमंत्री ने कहा कि वृंदावन गांव योजना से गांवों का समग्र विकास हो रहा है। सरपंचों को 25 लाख तक के कार्य स्वीकृत करने का अधिकार मिला है। पंचायत सचिवों को अधिक अधिकार और संसाधन दिए गए हैं। हर पंचायत में अटल भवन, सुसज्जित कार्यालय और सामुदायिक भवन होंगे। प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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जहां बुलाओगे, वहां आऊंगा

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के अभी तीन साल बाकी हैं। विकास के लिए बार-बार गांवों में आना-जाना होगा। आप जहां बुलाओगे, मैं वहां आ जाऊंगा।

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