पुलिस नहीं टाल सकेगी मामले, FIR दर्ज करने से पहले सूचना की सच्चाई जांचना जरूरी नहीं - SC
Neel Tiwari | Sept 11, 2025, 12:24 IST
police-fir-registered-without-verification-supreme-court
सुप्रीम कोर्ट ने FIR के लेकर एक अहम आदेश दिया है। पुलिस को FIR दर्ज करने से पहले सूचना की सच्चाई की जांच नहीं करनी होगी। जानें इस फैसले का आम जनता पर असर...
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने FIR को लेकर एक अहम आदेश दिया है। इसमें SC ने साफ कर दिया है कि पुलिस को किसी भी गंभीर अपराध (Cognizable Offence) की सूचना मिलते ही FIR दर्ज करना अनिवार्य है। इस दौरान पुलिस को यह जांचने की जरूरत नहीं है कि सूचना कितनी सच्ची है या उसमें कितनी विश्वसनीयता है। कोर्ट ने कहा कि FIR दर्ज करना पुलिस का पहला कर्तव्य है, जबकि जांच और साक्ष्य जुटाना बाद की प्रक्रिया है।
इस मामले में शिकायतकर्ता ने FIR दर्ज कराने की मांग की थी। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराया है। साथ ही, यह साफ कर दिया कि पुलिस को FIR दर्ज करने से पहले सूचना की जांच करने की जरूरत नहीं है।
ये खबर भी पढ़िए...मध्यप्रदेश सरकार को रेपिस्ट को देना पड़ेगा 25 लाख मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का आदेश, ये है पूरा मामला
ये खबर भी पढ़िए...MP News: पदोन्नति में आरक्षण मामले में पिछड़ी सरकार को अब सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से आस
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान 2006 के एक अहम फैसले (Ramesh Kumari vs State (NCT of Delhi)) का भी उल्लेख किया। उस फैसले में भी यह साफ किया गया था कि FIR दर्ज करने के लिए सूचना की genuineness या credibility यानी सच्चाई या विश्वसनीयता की जांच जरूरी नहीं है। यदि सूचना से यह स्पष्ट हो कि अपराध हुआ है, तो पुलिस को तुरंत FIR दर्ज करनी ही होगी।
ये खबर भी पढ़िए...हिरासत में मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जनहित याचिका दर्ज करने के आदेश
ये खबर भी पढ़िए...इंदौर निगम MIC में जैन-राठौर की तकरार के बीच अहम फैसले, ऑन डिमांड उठेगा कचरा
इस आदेश का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। कई बार शिकायतकर्ता यह कहते हैं कि पुलिस FIR दर्ज करने से पहले सूचना को टाल देती है या पहले उसकी सच्चाई पर सवाल उठाती है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्थिति साफ हो गई है कि पुलिस FIR दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती, भले ही सूचना कितनी ही संदिग्ध क्यों न लगे। असली जांच और साक्ष्य का मूल्यांकन FIR दर्ज होने के बाद ही किया जाएगा।
दिल्ली के पूर्व कमिश्नर नीरज कुमार से जुड़ा मामला
यह फैसला दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार और इंस्पेक्टर विनोद कुमार पांडे से जुड़े विवाद पर आया। मामला साल 2000 का है। इस दौरान इन अधिकारियों पर आरोप लगा था कि सीबीआई में तैनाती के दौरान उन्होंने दस्तावेजों में हेरफेर किया। साथ ही, डराने-धमकाने जैसे भी काम किए।
ये खबर भी पढ़िए...मध्यप्रदेश सरकार को रेपिस्ट को देना पड़ेगा 25 लाख मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का आदेश, ये है पूरा मामला
FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक नजर
|
SC ने 2006 के फैसले का किया जिक्र
ये खबर भी पढ़िए...हिरासत में मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जनहित याचिका दर्ज करने के आदेश
ये खबर भी पढ़िए...इंदौर निगम MIC में जैन-राठौर की तकरार के बीच अहम फैसले, ऑन डिमांड उठेगा कचरा
आम जनता के लिए इस फैसले के मायने
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari