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Photograph: (thesootr)
News In Short
- मध्य प्रदेश में पुलिस ट्रेनिंग में आध्यात्मिक बदलाव, हर सुबह बजेगा 'दक्षिणामूर्ति स्तोत्र'।
- पुलिस ट्रेनिंग में नया आदेश, मानसिक अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए बजाएगा 'दक्षिणामूर्ति स्तोत्र'।
- पुलिस प्रशिक्षण में धर्म और नैतिकता का समावेश, 'दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' बजाने का आदेश।
- मध्य प्रदेश पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में 'दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' बजाने से विवाद, राजनीति में उबाल।
- मानसिक शांति के लिए 'दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' का पाठ, पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में नई पहल।
News In Detail
मध्य प्रदेश पुलिस के लिए अब एक नया आदेश लागू किया गया है। इस आदेश के तहत अब हर सुबह 'दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम' बजाया जाएगा। हालांकि, आदेश अभी मध्यप्रदेश के ट्रेनिंग स्कूलों में लागू किया जाएगा। इस आदेश का उद्देश्य पुलिसकर्मियों में मानसिक अनुशासन और नैतिक विकास को बढ़ावा देना है। इस पहल को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।
दक्षिणामूर्ति स्तोत्र का महत्व
'दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' भगवान शिव के उस रूप को दर्शाता है, जिसे ज्ञान, विवेक और ध्यान का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव का यह स्वरूप शांति और समझ का स्तोत्र है।
यह स्तोत्र मानसिक शांति और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। पुलिस ट्रेनिंग में इसका समावेश रंगरूटों को केवल शारीरिक दक्षता से अधिक मानसिक और नैतिक सशक्तता प्रदान करने के लिए किया गया है।
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आदेश का उद्देश्य
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण), राजा बाबू सिंह ने राज्य के सभी आठ पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों को आदेश जारी किया है। उन्होंने आदेश दिया कि वे हर सुबह लाउडस्पीकर से 'दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' बजाएं।
राजा बाबू सिंह का कहना है कि पुलिस प्रशिक्षण में शारीरिक दक्षता के अलावा मानसिक, नैतिक, और आध्यात्मिक विकास का भी ध्यान रखना चाहिए। उनका मानना है कि केवल तकनीकी दक्षता से अधिक एक पुलिसकर्मी में विवेक, संवेदनशीलता, और करुणा भी होनी चाहिए, ताकि वह अपने कर्तव्यों को अधिक जिम्मेदारी से निभा सके।
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आदेश पर सियासी उबाल
इस आदेश ने राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस जैसी संवैधानिक संस्था को सभी धर्मों से समान दूरी बनाए रखनी चाहिए। इसके विपरीत, बीजेपी प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने इसे भारतीय सांस्कृतिक और दार्शनिक धरोहर का हिस्सा बताया और इसे पुलिसकर्मियों के अनुशासन को सुधारने के लिए सहायक माना।
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पहले भी हो चुका है विवाद
यह पहली बार नहीं है जब पुलिस प्रशिक्षण में धार्मिक पहलुओं को शामिल किया गया है। इससे पहले भी पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में भगवद्गीता के एक अध्याय का पाठ और रामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ शुरू किया गया था, जिसका कुछ राजनीतिक दलों ने विरोध किया था।
इन धार्मिक ग्रंथों का उद्देश्य पुलिसकर्मियों में मानसिक अनुशासन और करुणा को बढ़ावा देना था, लेकिन सवाल यह था कि क्या यह धार्मिक पहलू पुलिस की निष्पक्षता और संवैधानिक कर्तव्यों से मेल खाता है या नहीं।
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निष्कर्ष
एमपी पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में 'दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' बजाने का आदेश एक नई दिशा की ओर इशारा करता है। यह आदेश पुलिसकर्मियों में मानसिक अनुशासन, योग, ध्यान और नैतिकता के मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिया गया है।
हालांकि, इस आदेश से एक नया राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। इसमें अलग-अलग राजनीतिक दल इसे अपनी-अपनी नजर से देख रहे हैं। आखिर में यह सवाल उठता है कि क्या इस आदेश से पुलिस के कार्यकौशल में सुधार होगा या फिर इससे धार्मिक पक्षपाती माहौल बनेगा।
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