जहां जन्म लेती हैं नदियां, वहां इस खास मकसद से पहुंच रहे मध्यप्रदेश के मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल
Manish Kumar | Sept 01, 2025, 18:15 IST
Photograph: (The Sootr)
मध्यप्रदेश के पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल नदियों के उद्गम स्थलों पर पहुंचकर नदी संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। वे अब तक 98 नदियों के उद्गम स्थल पर जा चुके हैं और उनका लक्ष्य 108 तक पहुंचने का है।
BHOPAL. भारत का हृदय है मध्यप्रदेश। यह धरती जितनी हरियाली से भरपूर है, उतनी ही जलधारा से भी। यहां का कण-कण नदियों की गूंज सुनाता है। सदियों से इन नदियों ने गांवों को जीवन दिया। खेतों को अन्न दिया। संस्कृति को आत्मा दी...इसीलिए तो मध्यप्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है।
यहां से निकलने वाली करीब 750 नदियां केवल प्रदेश का ही नहीं, पूरे देश का आधार बनती हैं। नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी, माही और महानदी जैसे विशाल प्रवाह इन्हीं छोटी-बड़ी नदियों की देन हैं। इसी जीवनदायिनी परंपरा को नया स्वर दे रहे हैं मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल।
वे नदियों के उद्गम स्थल पर पहुंचकर वहां की स्थिति देख रहे हैं। स्थानीय लोगों को जलधाराओं से जोड़ रहे हैं और अफसरों को खामियां दूर करने के लिए निर्देश दे रहे हैं।
नर्मदा भक्त प्रहलाद सिंह पटेल ने अब तक 98 नदियों के उद्गम स्थल तक अपनी यात्राएं की हैं। उनका लक्ष्य 108 उद्गम स्थलों तक पहुंचना है।
वे जहां भी जाते हैं, वहां की मिट्टी और जल को संजोकर वापस लाते हैं। शीशियों में बंद यह जल उनके घर की अलमारी में केवल संग्रह नहीं, बल्कि आस्था और चेतना का प्रतीक है। इस अनोखी के यात्रा के पीछे कई संदेश छिपे हैं। पटेल का मानना है कि जब छोटी नदियों का उद्गम सुरक्षित रहेगा, तभी बड़ी नदियां जिंदा रहेंगी।
जलवायु परिवर्तन और पानी के संकट के इस दौर में यह संदेश बेहद अहम है। सबसे खास यह है कि जब एक मंत्री खुद पैदल गांव, जंगल और पहाड़ियों से होकर उद्गम स्थल तक पहुंचता है तो यह जनता में नदी संरक्षण का आंदोलन खड़ा करता है।
ये भी पढ़ें... संघ प्रमुख डॉ. भागवत के तीन बच्चों के बयान पर मंत्री पटेल बोले गंभीरता से मनन हो, कांग्रेस पर कहा धैर्य की परीक्षा ना लें
![abf67286-423]()
![e2c75052-a25]()
पटेल मानते हैं कि मध्यप्रदेश की पहचान उसकी नदियों से है। जब तक गोई जैसी सहायक नदियों का प्रवाह सुरक्षित रहेगा, तभी नर्मदा जैसी विशालतम नदियां भी जीवित रहेंगी। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में उनका संदेश है कि हमें कुछ ऐसा करना होगा कि अगली पीढ़ियां भी हरित, स्वच्छ और निर्मल वातावरण में सांस ले सकें।
उनकी यात्राएं किसी साधक की तपस्या जैसी हैं। सागर की पहाड़ियों से बहती सागर नदी हो या कुंवारी, कूनो, टमस, बिछिया, पयस्वनी, अमरन, कावेरी, किलकिला, बाघिन, मुरार, कन्हान या शक्कर नदी… हर उद्गम स्थल पर वे झुककर नदियों की गोद को प्रणाम कर चुके हैं। माही, ताप्ती, वर्धा और पूर्णा का प्रवाह भी उनके इस सफर का हिस्सा बने हैं।
ये भी पढ़ें... मनरेगा मजदूर से कम सरपंच का वेतन, सरकार का मानदेय बढ़ाने से सरकार का इनकार, मंत्री पटेल बोले यह सेवा का पद
![bf9971a1-509]()
गांवों की पगडंडियों, पहाड़ों की ढलानों और घने जंगलों से होकर गुजरती उनकी यह यात्रा बताती है कि नदियां केवल पानी की धारा नहीं, बल्कि सभ्यता की आत्मा हैं। मंत्री पटेल कहते हैं, जब मैं उद्गम स्थल पर मिट्टी छूता हूं तो लगता है, जैसे समय की धारा से संवाद कर रहा हूं। उनके कदम-कदम पर यही संदेश गूंजता है कि अगर हम अपनी नदियों को नहीं बचाएंगे, तो आने वाला समय हमें नहीं बचाएगा।
ये भी पढ़ें... राजस्थान के टाइगर रिजर्व में आएंगे मध्यप्रदेश-उत्तराखंड के बाघ, मंजूरी मिली, शिफ्टिंग की प्रक्रिया जल्द
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧
यहां से निकलने वाली करीब 750 नदियां केवल प्रदेश का ही नहीं, पूरे देश का आधार बनती हैं। नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी, माही और महानदी जैसे विशाल प्रवाह इन्हीं छोटी-बड़ी नदियों की देन हैं। इसी जीवनदायिनी परंपरा को नया स्वर दे रहे हैं मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल।
वे नदियों के उद्गम स्थल पर पहुंचकर वहां की स्थिति देख रहे हैं। स्थानीय लोगों को जलधाराओं से जोड़ रहे हैं और अफसरों को खामियां दूर करने के लिए निर्देश दे रहे हैं।
नर्मदा भक्त प्रहलाद सिंह पटेल ने अब तक 98 नदियों के उद्गम स्थल तक अपनी यात्राएं की हैं। उनका लक्ष्य 108 उद्गम स्थलों तक पहुंचना है।
वे जहां भी जाते हैं, वहां की मिट्टी और जल को संजोकर वापस लाते हैं। शीशियों में बंद यह जल उनके घर की अलमारी में केवल संग्रह नहीं, बल्कि आस्था और चेतना का प्रतीक है। इस अनोखी के यात्रा के पीछे कई संदेश छिपे हैं। पटेल का मानना है कि जब छोटी नदियों का उद्गम सुरक्षित रहेगा, तभी बड़ी नदियां जिंदा रहेंगी।
जलवायु परिवर्तन और पानी के संकट के इस दौर में यह संदेश बेहद अहम है। सबसे खास यह है कि जब एक मंत्री खुद पैदल गांव, जंगल और पहाड़ियों से होकर उद्गम स्थल तक पहुंचता है तो यह जनता में नदी संरक्षण का आंदोलन खड़ा करता है।
ये भी पढ़ें... संघ प्रमुख डॉ. भागवत के तीन बच्चों के बयान पर मंत्री पटेल बोले गंभीरता से मनन हो, कांग्रेस पर कहा धैर्य की परीक्षा ना लें
'परिक्रमा' का भागवत करेंगे लोकार्पण
abf67286-423
प्रहलाद पटेल के लिए जल संरक्षण केवल भाषणों का विषय नहीं है। वे कहते हैं, यह उनका जीवन है। वे दो बार नर्मदा परिक्रमा कर चुके हैं। इस अनुभव को उन्होंने अपनी आने वाली पुस्तक 'परिक्रमा' में दर्ज किया है। इस किताब का लोकार्पण 14 सितंबर 2025 को संघ प्रमुख डॉ.मोहन भागवत करेंगे। पटेल कहते हैं, नदियों के उद्गम पर अपूर्व ऊर्जा होती है। ये स्थल हमारे पुरखों से भी पहले के हैं। जहां जल स्रोत हैं, वहीं जीवन बसा है। यदि इन छोटी नदियों का उद्गम सूख गया तो बड़ी नदियां भी सूख जाएंगी।
हर छोटी नदी के उद्गम पर पहुंच रहे
e2c75052-a25
पटेल मानते हैं कि मध्यप्रदेश की पहचान उसकी नदियों से है। जब तक गोई जैसी सहायक नदियों का प्रवाह सुरक्षित रहेगा, तभी नर्मदा जैसी विशालतम नदियां भी जीवित रहेंगी। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में उनका संदेश है कि हमें कुछ ऐसा करना होगा कि अगली पीढ़ियां भी हरित, स्वच्छ और निर्मल वातावरण में सांस ले सकें।
उनकी यात्राएं किसी साधक की तपस्या जैसी हैं। सागर की पहाड़ियों से बहती सागर नदी हो या कुंवारी, कूनो, टमस, बिछिया, पयस्वनी, अमरन, कावेरी, किलकिला, बाघिन, मुरार, कन्हान या शक्कर नदी… हर उद्गम स्थल पर वे झुककर नदियों की गोद को प्रणाम कर चुके हैं। माही, ताप्ती, वर्धा और पूर्णा का प्रवाह भी उनके इस सफर का हिस्सा बने हैं।
ये भी पढ़ें... मनरेगा मजदूर से कम सरपंच का वेतन, सरकार का मानदेय बढ़ाने से सरकार का इनकार, मंत्री पटेल बोले यह सेवा का पद
सभ्यता की आत्मा हैं हमारी नदियां
bf9971a1-509
गांवों की पगडंडियों, पहाड़ों की ढलानों और घने जंगलों से होकर गुजरती उनकी यह यात्रा बताती है कि नदियां केवल पानी की धारा नहीं, बल्कि सभ्यता की आत्मा हैं। मंत्री पटेल कहते हैं, जब मैं उद्गम स्थल पर मिट्टी छूता हूं तो लगता है, जैसे समय की धारा से संवाद कर रहा हूं। उनके कदम-कदम पर यही संदेश गूंजता है कि अगर हम अपनी नदियों को नहीं बचाएंगे, तो आने वाला समय हमें नहीं बचाएगा।
ये भी पढ़ें... राजस्थान के टाइगर रिजर्व में आएंगे मध्यप्रदेश-उत्तराखंड के बाघ, मंजूरी मिली, शिफ्टिंग की प्रक्रिया जल्द
thesootr links
- मध्यप्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- जॉब्स और एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman