प्रतिमा बागरी जाति विवाद: जिस मुनादी पर मंत्री हुए नाराज, वो सालों से नियम में
Pawan Modiya | Jul 09, 2026, 22:56 IST
गांव में मुनादी पिटाई
मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति विवाद में गांवों में हुई मुनादी को लेकर सियासत गरम है। छह मंत्री सीएम मोहन यादव से मिले और अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की। लेकिन बड़ी बात ये है कि जाति छानबीन प्रक्रिया में मुनादी का प्रावधान 1997 के नियमों में शामिल है।
समझें क्या है पूरा मामला
- प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र पर विवाद चल रहा है।
- जांच के दौरान गांवों में मुनादी कराई गई थी।
- मुनादी को लेकर छह मंत्री सीएम से मिले।
- मंत्रियों ने अधिकारी पर कार्रवाई की मांग रखी।
- 1997 के नियमों में मुनादी का प्रावधान मौजूद है।
मुनादी पर क्यों मची सियासत
मंत्रियों का कहना था कि जांच पूरी होने से पहले इस तरह सार्वजनिक सूचना देने की जरूरत क्यों पड़ी। हालांकि दूसरी तरफ प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े नियम बताते हैं कि जाति जांच में मुनादी करना तय प्रक्रिया का हिस्सा है।
छह मंत्री सीएम से मिले थे
मंत्रियों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी नाराजगी रखी। उनका कहना था कि मंत्री पद पर बैठी महिला नेता के खिलाफ जांच प्रक्रिया में जल्दबाजी दिखाई गई। मंत्रियों ने मुनादी कराने वाले अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी रखी। यह बैठक करीब आधे घंटे तक चली। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों की बात सुनी और पूरे मामले की जानकारी ली।
क्या मुनादी नियमों में है
प्रतिमा बागरी जाति विवाद
इस विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि जिस मुनादी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। मध्यप्रदेश शासन के 1997 के परिपत्र में जाति छानबीन प्रक्रिया तय की गई है। इस प्रक्रिया में जांच अधिकारी को स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने का अधिकार दिया गया है। जरूरत पड़ने पर गांव या मोहल्ले में सार्वजनिक सूचना भी दी जा सकती है।
इसका उद्देश्य यह होता है कि संबंधित जाति दावे पर कोई व्यक्ति आपत्ति या जानकारी देना चाहता है तो वह सामने आ सके। मुनादी के जरिए प्रशासन स्थानीय लोगों तक सूचना पहुंचाता है। इसके बाद मिलने वाली जानकारी को जांच में शामिल किया जा सकता है। यानी मुनादी कोई नई प्रक्रिया नहीं है। यह लंबे समय से जाति प्रमाण पत्र जांच व्यवस्था का हिस्सा रही है।
बागरी मामले में क्या हुआ
मामला हाईकोर्ट पहुंचा। याचिका में दावा किया गया कि प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र सही नहीं है। हाईकोर्ट ने मामले की जांच जाति छानबीन समिति को सौंपी। समिति को तय समय में जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान सतना के वसुधा, हरदुआ और मझोल गांवों में मुनादी कराई गई। लोगों से जाति संबंधी दस्तावेज और जानकारी मांगी गई।
प्रतिमा बागरी ने आरोपों को गलत बताया
प्रतिमा बागरी ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का राजनीतिक इतिहास भी पुराना है। उनके दादा जुगल किशोर बागरी भी विधायक रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक अनुसूचित जाति महिला का आगे बढ़ना कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रहा है।
विवाद में नियम बनाम राजनीति
जांच रिपोर्ट पर नजर
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