प्रोफेसरों को बड़ी राहत, पात्रता तिथि से 10 हजार AGP का लाभ, मिलेगा एरियर भी
Ratan Kumar Mishra | Aug 19, 2026, 23:09 IST
प्रोफेसरों को बड़ी राहत
हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने प्रोफेसरों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने पात्रता तिथि से 10 हजार रुपए AGP (Academic Grade Pay) देने का आदेश दिया। साथ ही पुराने वेतन का एरियर भी देने को कहा। भुगतान तीन महीने में करना होगा। देरी पर 6 फीसदी ब्याज देना होगा।
समझें क्या है पूरा मामला
- मामला शासकीय कॉलेज प्रोफेसरों के 10 हजार AGP से जुड़ा।
- पदोन्नति पुरानी पात्रता तिथि से प्रभावी मानी गई थी।
- सरकार ने AGP कार्यभार वाली तारीख से देने कहा।
- हाईकोर्ट ने सरकार के इस फैसले को सही नहीं माना।
- एरियर और अन्य लाभ तीन महीने में देने होंगे।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने बड़ा फैसला दिया। इस फैसले से शासकीय कॉलेजों के प्रोफेसरों को राहत मिली है। कोर्ट ने 10 हजार रुपए AGP (Academic Grade Pay) को लेकर स्थिति साफ की। अब लाभ पात्रता की पुरानी तारीख से देना होगा।
साथ ही उस अवधि का एरियर भी देना होगा। यह फैसला करीब 31 प्रोफेसरों की याचिका पर आया। किस मामले में कोर्ट पहुंचा था विवाद ? डॉ. अनिल कुमार वाजपेयी और अन्य प्रोफेसरों ने याचिका लगाई थी। उन्होंने अपने वकीलों के जरिए हाईकोर्ट में पक्ष रखा।
मामला प्रोफेसर पद पर हुई पदोन्नति से जुड़ा था। प्रोफेसरों को 13 जून 2018 को पदोन्नत किया गया था। बाद में आदेश में बदलाव किया गया था। पदोन्नति को पुरानी पात्रता तारीख से लागू किया गया। यह पात्रता तारीख वर्ष 2006 से 2010 के बीच थी।
विवाद की असली वजह क्या थी ?
इसका मतलब 13 जून 2018 से लाभ मिलना था। प्रोफेसरों ने इस फैसले को चुनौती दी। उनका कहना था कि पदोन्नति पुरानी तारीख से मानी गई है। फिर आर्थिक लाभ भी उसी तारीख से मिलने चाहिए।
प्रोफेसरों को आर्थिक नुकसान क्यों हो रहा था?
सरकार ने एरियर देने से क्यों इनकार किया?
हाईकोर्ट ने सरकार की दलील क्यों नहीं मानी?
ऐसे में आर्थिक लाभ रोकना उचित नहीं माना गया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी हवाला दिया। इसमें K.V. Jankiraman मामले का सिद्धांत सामने रखा गया था। इस सिद्धांत का इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जा सकता है। खासकर तब, जब कर्मचारी की कोई गलती नहीं हो।
कोर्ट ने पुराने एरियर को लेकर क्या कहा?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी ऐसे मामलों में राहत दी है। राजेंद्र कुमार जैन मामले में भी एरियर का आदेश हुआ था। उस मामले में छह फीसदी ब्याज का निर्देश भी दिया गया था।
प्रोफेसरों को अब क्या-क्या मिलेगा?
सरकार को कितने समय में भुगतान करना होगा?
तीन महीने में भुगतान नहीं हुआ तो क्या होगा?
इस फैसले का प्रोफेसरों पर क्या असर होगा?
पेंशन से जुड़े लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए फैसले का असर लंबे समय तक रह सकता है। प्रोफेसरों के लिए यह आदेश बड़ी आर्थिक राहत माना जा रहा है।
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