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मध्य प्रदेश में पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। यहां पर डीपीआर तैयार किए बिना ही समान राशि के टेंडर जारी कर दिए गए थे। जिसके कारण लागत में इजाफा हुआ। सरकार ने मामले की जांच की और कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसके अलावा, इंदौर में भी निर्माण कार्य में देरी के कारण 150 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इस मुद्दे ने सरकारी खजाने पर भारी असर डाला है और इसे लेकर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
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पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की लापरवाही का बड़ा मामला
मध्य प्रदेश सरकार को 450 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है, और यह नुकसान पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) के अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुआ है। यह मामला छिंदवाड़ा, छतरपुर और पन्ना मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण परियोजना से संबंधित है। इन तीनों मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के लिए बिना डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार किए टेंडर जारी कर दिए गए थे। इस मुद्दे के सामने आने पर टेंडर रद्द किए गए, लेकिन इसका असर सरकारी खजाने पर पड़ा।
बिना डीपीआर के टेंडर और बढ़ी लागत
2018 में तत्कालीन चीफ इंजीनियर और ईई द्वारा बगैर डीपीआर तैयार किए इन तीनों कॉलेजों के लिए समान राशि के टेंडर जारी कर दिए गए थे। इस प्रक्रिया में तीनों कॉलेजों की भूमि, डिजाइन, और स्थानीय परिस्थितियों का उचित आकलन नहीं किया गया था। नतीजतन, जिन टेंडरों को पहले 270 करोड़ रुपए में जारी किया गया था, उनकी लागत डीपीआर तैयार करने के बाद 450 करोड़ रुपए तक बढ़ गई है। यह टेंडर इसी कारण रद्द कर दिए गए थे, और जब नए टेंडर जारी किए गए, तो लागत में 450 करोड़ का इजाफा हुआ।
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मामले की जांच और कार्रवाई
इस मामले में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने पिछले महीने कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद तत्कालीन पीआईयू भवन के इंजीनियर विजय सिंह वर्मा पर पेंशन नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, तत्कालीन चीफ इंजीनियर जबलपुर पीएम मंडलोई और ग्वालियर एनके गुप्ता को नोटिस जारी किया गया है। इनसे पूछा गया है कि कैसे एक जैसी राशि की तकनीकी स्वीकृति दी गई।
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इंदौर में भी निर्माण में देरी का नुकसान
इंदौर जिले में भी एक और बड़ा नुकसान हुआ है, जो कि 150 करोड़ रुपए के आसपास है। इंदौर जिला कोर्ट के भवन निर्माण में देरी के कारण यह नुकसान हुआ। 2019 में हर्ष कंस्ट्रक्शन को 274 करोड़ रुपए का ठेका दिया गया था, लेकिन काम में कोई प्रगति नहीं होने के कारण ठेका बिना जुर्माना वसूले रद्द कर दिया गया और 15 करोड़ रुपए की अर्नेस्ट मनी भी लौटा दी गई। बाद में अक्टूबर 2023 में अरकान इंफ्रा को यह ठेका दिया गया, लेकिन उनकी दस्तावेज़ों की जांच में फर्जी पाए गए, जिससे यह मामला और पेचिदा हो गया।
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