तीन साल से नहीं मिला न्याय, कलेक्टर कार्यालय में किसान ने खुद पर डाला पेट्रोल
Jitendra Shrivastava | May 26, 2026, 17:34 IST
Photograph: (THESOOTR)
RATLAM. कलेक्टर की जनसुनवाई में किसान प्यार सिंह ने पेट्रोल डालकर आत्महत्या की कोशिश की। दवाई से फसल बर्बाद होने के बाद तीन साल से किसान को न्याय नहीं मिला था।
ऐसे समझें पूरा मामला...
- जनसुनवाई में किसान ने खुद पर पेट्रोल डाला।
- दवाई से चार दिन में पूरी फसल बर्बाद हुई।
- तीन साल से अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे।
- सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टला।
- उपभोक्ता फोरम से निराकरण की उम्मीद जताई।
मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। यह घटना किसान की फसल बर्बादी (Crop Destruction) और तीन साल की प्रशासनिक अनदेखी का दर्दनाक नतीजा है।
रतलाम जनसुनवाई में हड़कंप
मौके पर तैनात गार्ड और सुरक्षाकर्मी तुरंत हरकत में आए। उन्होंने किसान को दबोचकर बड़ी त्रासदी से बचा लिया। इस घटना से पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में अफरा-तफरी फैल गई।
KISAN PETROL
किसान प्यार सिंह की पीड़ा
दवाई के उपयोग के महज चार दिन बाद पूरी फसल नष्ट हो गई। इस फसल बर्बादी (Crop Destruction) से उन्हें भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। एक मेहनतकश किसान रातोंरात कर्ज में डूब गया।
तीन साल से कर रहे अनदेखी
तीन वर्षों तक किसान अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटता रहा। हर बार आश्वासन मिला, लेकिन न्याय नहीं मिला। लगातार अनदेखी और आर्थिक तंगी ने उन्हें टूटने पर मजबूर कर दिया। अंततः उन्होंने यह खतरनाक कदम उठाने की कोशिश की।
kisan aatmahatya prayas
जानिए प्रशासन का पक्ष
एडीएम ने स्वीकार किया कि उस समय ऐसे मामलों में मुआवजे (Compensation) का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। उन्होंने बताया कि किसान की शिकायत दर्ज कर ली गई है। अधिकारियों ने उन्हें उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) का रास्ता सुझाया है।
उपभोक्ता फोरम में उम्मीद की किरण
किसानों की बदहाली का सवाल
प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती उनके जख्मों पर नमक छिड़कती है। किसान सुरक्षा (Farmer Protection) के लिए ठोस कानूनी प्रावधान और त्वरित न्याय की जरूरत है। यह घटना सरकार और समाज दोनों के लिए चेतावनी है।
FAQ
- रतलाम प्रशासन ने किसान की शिकायत पर क्या कार्रवाई की?
किसान की शिकायत पर कलेक्टर कार्यालय ने जांच टीम तो गठित की, लेकिन जांच के बाद भी दवाई कंपनी के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। एडीएम डॉ. शालिनी श्रीवास्तव ने बताया कि उस समय ऐसे मामलों में मुआवजे (Compensation) का स्पष्ट प्रावधान नहीं था। घटना के बाद प्रशासन ने किसान को उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में जाने की सलाह दी है, जहां किसान पहले ही शिकायत दर्ज करा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि फोरम के माध्यम से न्याय मिलने की संभावना है। - किसानों को फसल बर्बाद होने पर कहां शिकायत करनी चाहिए?
यदि किसी घटिया या नकली कीटनाशक दवाई (Pesticide) के कारण किसान की फसल बर्बाद हो जाए, तो वे सबसे पहले जिला कृषि विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराएँ। इसके साथ ही उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में भी मामला दायर किया जा सकता है, जहां दवाई कंपनी से मुआवजे की मांग की जा सकती है। किसान सुरक्षा (Farmer Protection) के लिए राज्य सरकार की हेल्पलाइन और जनसुनवाई (Jan Sunwai) का भी उपयोग किया जा सकता है। समय रहते शिकायत दर्ज कराना और सभी दस्तावेज सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
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