खरीदारों के 393 करोड़ लेकर बैठे डिफॉल्टर बिल्डर, भोपाल-इंदौर में अटके 328 करोड़
Aman Vaishnav | Aug 04, 2026, 10:10 IST
खरीदारों के 393 करोड़ लेकर बैठे डिफॉल्टर बिल्डर
एमपी में डिफॉल्टर बिल्डरों पर रेरा की सख्ती के बावजूद घर खरीदारों के पैसे वापस नहीं मिल पा रहे हैं। मार्च 2026 तक प्रदेश के करीब 2500 मामलों में 393 करोड़ से ज्यादा की वसूली पेंडिंग पड़ी है। कुल अटकी हुई राशि का लगभग 84.% हिस्सा अकेले भोपाल -इंदौर का है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में डिफॉल्टर बिल्डरों पर रेरा की सख्ती बेअसर साबित हो रही है।
- रेरा वसूली प्रमाणपत्र जारी करता है, लेकिन जिला प्रशासन रकम नहीं वसुल पा रहा है।
- मार्च 2026 तक करीब 2500 मामलों में 393.37 करोड़ रुपए फंसे हैं।
- अकेले भोपाल में 212 करोड़ रुपए की वसूली अटकी है।
- हाईकोर्ट की सख्ती और मंत्री के निर्देश के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं।
आरआरसी है क्या
इसके बाद प्रशासन को बिल्डर से रकम वसुलकर खरीदार को दिलानी होती है। भुगतान न करने पर प्रशासन के पास संपत्ति जब्त करने और जेल भेजने तक के अधिकार हैं।
कागजों पर यह व्यवस्था मजबूत दिखती है। वहीं असल में ज्यादातर मामलों में वसूली सिरे नहीं चढ़ पाती। जिला प्रशासन के स्तर पर यह प्रक्रिया अक्सर अटक जाती है।
कहां कितनी रकम फंसी
रायसेन में 163 मामलों में 15.85 करोड़, ग्वालियर में 128 मामलों में 19.57 करोड़ और जबलपुर में 84 मामलों में 15.59 करोड़ रुपए लंबित हैं।
वहीं सीहोर, सतना, सिंगरौली, देवास और उज्जैन में भी छोटी-छोटी रकम फंसी हुई है। कुल मिलाकर 2396 मामलों में 389.20 करोड़ रुपए की वसूली बाकी है।
हाईकोर्ट और जेल तक पहुंचा मामला
जुलाई 2026 में एक बड़ी कार्रवाई भी हुई। एक बिल्डर के पार्टनर को जेल भेजा गया, क्योंकि उसने खरीदार के 88.77 लाख रुपए नहीं लौटाए थे। यह कार्रवाई अपवाद जैसी रही। ज्यादातर मामलों में खरीदार अब भी इंतजार में हैं।
मंत्री के निर्देश का असर
इसके बाद नगरीय विकास विभाग ने जिला प्रशासन को इस दिशा में कदम उठाने को कहा। हालांकि जमीनी स्तर पर अब तक बड़ा बदलाव दिखना बाकी है। खरीदारों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में उन्हें राहत मिलेगी।
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