MP में RGPV और मेडिकल यूनिवर्सिटी के होंगे तीन हिस्से, मालवा, महाकौशल, मध्यप्रांत
Pawan Modiya | May 15, 2026, 17:10 IST
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मध्य प्रदेश सरकार आरजीपीवी और मेडिकल यूनिवर्सिटी को तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी में है। बिजली कंपनियों की तर्ज पर मालवा, महाकौशल और मध्यप्रांत नाम के तीन यूनिवर्सिटी जोन बनेंगे।
समझें क्या है पूरा मामला
- आरजीपीवी (Rajiv Gandhi Proudyogiki Vishwavidyalaya) और मेडिकल यूनिवर्सिटी को तीन भागों में बांटने का प्रस्ताव है।
- सीएम मोहन यादव की समीक्षा बैठक में यह अहम मुद्दा रखा गया।
- तीन जोन के नाम मालवा प्रांत, महाकौशल प्रांत और मध्यप्रांत होंगे।
- मालवा प्रांत का मुख्यालय उज्जैन, मध्यप्रांत का भोपाल और महाकौशल प्रांत का जबलपुर में रहेगा।
- यह ढांचा बिजली वितरण कंपनियों जैसा होगा, ताकि प्रबंधन बेहतर हो सके।
RGPV और मेडिकल यूनिवर्सिटी बंटेंगी
यह बैठक खास थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 14 मई को मंत्रालय में 45 महत्वपूर्ण योजनाओं और प्रशासनिक मामलों की विस्तृत समीक्षा की। ऐसी बैठक पहली बार हो रही थी, जिसमें कई विभागों के मुद्दों पर एक साथ चर्चा की गई।
बिजली कंपनियों वाला मॉडल अपनाएगी सरकार
इस पूरी योजना का मकसद यही है कि इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों की निगरानी आसान हो। अभी आरजीपीवी सिर्फ भोपाल से और मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर से पूरे प्रदेश के कॉलेजों की देखरेख करती है। सैकड़ों कॉलेज होने की वजह से एक ही मुख्यालय से काम करना मुश्किल हो जाता है। इससे छात्रों और कॉलेजों को भी दिक्कत होती है।
तीन प्रांत, तीन मुख्यालय
खास बात यह है कि इन जोनों के नाम आरएसएस (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के प्रांत विभाजन की तर्ज पर रखे जाएंगे। आरएसएस देशभर में अपने संगठनात्मक काम को इसी तरह के प्रांतों में बांटकर चलाता है।
आरजीपीवी की मौजूदा स्थिति
यह एक बहु-परिसर, संबद्धता देने वाला और शोध विश्वविद्यालय है। फिलहाल यह भोपाल से प्रदेशभर के सैकड़ों कॉलेजों का प्रबंधन करता है। इतने बड़े दायरे में काम करने से अक्सर प्रशासनिक दिक्कतें सामने आती हैं। छात्रों की शिकायतों से लेकर परीक्षा प्रबंधन तक कई काम प्रभावित होते हैं।
17 विभागों पर बड़ी समीक्षा
बैठक में फायर सेफ्टी एक्ट (Fire Safety Act), हाउसिंग बोर्ड योजनाओं की री-डेंसिफिकेशन, पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन, भोपाल के बीएचईएल (Bharat Heavy Electricals Limited) की जमीन अधिग्रहण और अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण जैसे कई मुद्दे भी शामिल थे।
विभागवार समीक्षा बैठकें 21 मई से शुरू होने की योजना है। जिन विषयों पर कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी, संबंधित विभाग उनका प्रस्ताव तैयार करेंगे।
छात्रों को क्या फायदा होगा?
इसके अलावा परीक्षा प्रबंधन, रिजल्ट घोषणा, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और कॉलेजों की जांच जैसे काम भी तेज और सटीक होंगे। स्थानीय स्तर पर अधिकार होने से फैसले जल्दी होंगे। शिकायतों का निपटारा भी आसान होगा।
अगला कदम क्या होगा?
यह खबर क्यों जरूरी है?
जरूरी FAQ
आरजीपीवी अभी भोपाल से पूरे प्रदेश के सैकड़ों इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों का प्रबंधन करती है। इतने बड़े दायरे में एक ही मुख्यालय से काम करना मुश्किल हो गया है। परीक्षा प्रबंधन, मान्यता, शिकायत निवारण जैसे काम धीमे पड़ते हैं। इसलिए सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों की तरह तीन जोन बनाने का फैसला किया है। इससे स्थानीय स्तर पर तेजी से फैसले हो सकेंगे और छात्रों को राहत मिलेगी।
तीन नए यूनिवर्सिटी जोन के मुख्यालय कहां-कहां होंगे?
मालवा प्रांत का मुख्यालय उज्जैन में होगा। मध्यप्रांत का मुख्यालय भोपाल में रहेगा। महाकौशल प्रांत का मुख्यालय जबलपुर में होगा। इन तीनों जोन के नाम आरएसएस के संगठनात्मक प्रांत विभाजन की तर्ज पर रखे जाएंगे। यही व्यवस्था मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए भी लागू होगी।
इस बदलाव से छात्रों को क्या फायदा होगा?
अभी दूर-दराज के छात्रों को यूनिवर्सिटी से जुड़े काम के लिए भोपाल या जबलपुर जाना पड़ता है। नई व्यवस्था में क्षेत्रीय मुख्यालय नजदीक होंगे। इससे परीक्षा, रिजल्ट, मान्यता और शिकायतों के निपटारे में कम समय लगेगा। कॉलेजों की नियमित जांच भी आसान होगी। कुल मिलाकर शिक्षा की गुणवत्ता पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी।
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