सड़क हादसा: बेटे को खोने के बाद माता-पिता बोले-उनकी पीड़ा किसी और की कहानी न बने

इंदौर के तेजाजी नगर में सड़क हादसे में प्रखर कासलीवाल की मौत हो गई। उनके माता-पिता ने अपील की कि उनकी पीड़ा किसी और घर की कहानी न बने। प्रशासन से की मार्मिक अपील।

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Rahul Dave
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NEWS in short

  1. इंदौर के तेजाजी नगर में हुए सड़क हादसे में प्रखर कासलीवाल की मौत हो गई। 
  2. प्रखर के माता-पिता, ने  अपील की है कि उनकी पीड़ा किसी और परिवार की कहानी न बने।
  3. प्रखर के माता-पिता ने युवा पीढ़ी को चेतावनी दी कि मौज-मस्ती गलत नहीं है, लेकिन उसे एक सीमा होनी चाहिए। 
  4. माता-पिता ने यह भी कहा कि यह सिर्फ उनके घर की कहानी नहीं है, बल्कि यह समस्या समाज के हर हिस्से में बढ़ रही है। 
  5. मीडिया पर रोज सड़क हादसों की खबरें आती हैं, जो उजड़े हुए घरों और टूटे हुए सपनों की कहानी होती हैं।

News in Detail

इंदौर शहर के तेजाजी नगर में हुए सड़क हादसे में अपने बेटे प्रखर को खो चुके माता-पिता मोनिका और आनंद कासलीवाल ने एक मार्मिक अपील की है। उन्होंने नई पीढ़ी, प्रशासन और समाज से कहा है कि हमारा बेटा लौटकर नहीं आएगा, पर शायद कोई और बच जाए।  

हमारी पीड़ा किसी और घर की कहानी न बने

इंदौर के तेजाजी नगर इलाके में हुए सड़क हादसे में पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी प्रेरणा, कांग्रेस प्रवक्ता आनंद कासलीवाल के पुत्र प्रखर और मनसिंधु की मौत हो गई थी। इस हादसे ने तीनों परिवार को बुरी तरह तोड़ दिया। स्वर्गीय प्रखर कासलीवाल के माता-पिता ने अपील करते हुए कहा कि उनकी पीड़ा किसी और घर की कहानी न बने।

हम भी उन्हीं अभागों में हैं 

माता-पिता लिखते हैं हम भी उन्हीं अभागों में हैं, जिन्होंने अपने जिगर का टुकड़ा खो दिया। यह दुख शब्दों में नहीं समा सकता। हर सुबह उसी सवाल से शुरू होती है क्या यह सब टाला जा सकता था? 

नई पीढ़ी के नाम एक सिसकती हुई सलाह

आज का युवा सप्ताहांत को सुकून और परिवार के साथ बिताने के बजाय देर रात की पार्टियों, शराब और तेज रफ्तार गाड़ियों में खो रहा है। मौज-मस्ती गलत नहीं है, लेकिन उसकी भी एक सीमा होनी चाहिए। क्या इतनी देर रात तक पार्टी करना जरूरी है कि माता-पिता की नींद डर और चिंता में टूट जाए?

जीवन की कीमत भूल रही युवा पीढ़ी 

माता-पिता का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी पैसा कमाने में आगे निकल गई है, लेकिन जीवन की कीमत भूलती जा रही है। जब एक युवा मरता है, तो वह अकेला नहीं जाता उसके साथ पूरा परिवार टूट जाता है, मां-बाप जिंदगी भर का दर्द ढोते हैं।

यह सिर्फ हमारे घर की कहानी नहीं 

यह समस्या किसी एक परिवार की नहीं रही। अखबारों और टीवी चैनलों पर रोज सड़क हादसों की खबरें आम हो चुकी हैं। हर खबर के पीछे एक उजड़ा घर, एक बुझा चिराग और कई टूटे सपने होते हैं। सबसे पीड़ादायक बात यह है कि आज की पीढ़ी न समझना चाहती है, न सुनना। उन्हें लगता है कि वे जो कर रहे हैं वही सही है, जबकि उसकी कीमत पूरा समाज चुका रहा है।

प्रशासन से सीधी और कठोर मांग

प्रखर के माता-पिता ने प्रशासन से भी साफ शब्दों में अपील की है शहरों और गांवों में रातभर चलने वाली पार्टियों पर सख्त रोक लगे। डीजे और तेज आवाज वाले आयोजनों पर कड़ाई हो। शराब की दुकानों का समय रात 9 बजे तक सीमित किया जाए। रात 11 बजे से सुबह 4 बजे तक ढाबों, क्लबों और रेस्टोरेंट्स पर प्रतिबंध लगाया जाए। उनका कहना है कि गांवों में होने वाली अवैध पार्टियां अक्सर प्रशासन की नजर से दूर रह जाती हैं, जिन पर विशेष निगरानी जरूरी है।

समाज और राजनीति से भी उम्मीद

माता-पिता चाहते हैं कि समाजसेवी संगठन, राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि मिलकर जनजागरण अभियान चलाएं। कानून का उद्देश्य स्वतंत्रता देना है, लेकिन अनुशासन के बिना स्वतंत्रता विनाश बन जाती है।

अंत में एक सवाल 

हमारा बेटा तो चला गया। अब कुछ नहीं बदलेगा। लेकिन अगर हमारी यह पुकार एक भी युवा को संभलने पर मजबूर कर दे, अगर एक भी मां-बाप अपने बेटे को सुरक्षित घर लौटते देख सकें तो शायद हमारे दर्द को थोड़ा सा अर्थ मिल जाएगा। यह सिर्फ एक पिता-माता का शोक नहीं, यह पूरे समाज की चेतावनी है।

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