नीलेश आदिवासी हत्याकांड में राजनीति तेज, जीतू ने पूछा भूपेंद्र के यहां क्यों गए सीएम

सागर के नीलेश आदिवासी की हत्या का मामला फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रहा है। इसकी निष्पक्षता को लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

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Sourabh Bhatnagar
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इस मामले में कांग्रेस मुखर है और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के साथ सीएम मोहन यादव को भी लपेटने की कोशिश हो रही है। 

दरअसल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद राजनीतिक हलचल और भी बढ़ गई है।

SIT द्वारा जांच के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव का भूपेंद्र सिंह के सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होना भी विपक्ष के निशाने पर आ गया है। बता दें कि 12 दिसंबर 2025 को मामले में SIT का गठन किया गया था। इसके बाद 10 जनवरी 2026 को सागर के खुरई में सीएम एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

कांग्रेस ने इसे जांच को प्रभावित करने वाला कदम बताते हुए सरकार से सवाल पूछे हैं। देखें जीतू पटवारी का ट्वीट…

जीतू पटवारी की तीखी प्रतिक्रिया

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने इस मामले में सरकार को घेरते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।

जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाया कि क्या SIT नीलेश आदिवासी और पंकज आदिवासी केस में निष्पक्ष जांच कर पाएगी या फिर राजनीतिक दबाव के कारण सच्चाई को दबा दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इसी दबाव के कारण SIT अब तक जांच पूरी नहीं कर पाई है और सुप्रीम कोर्ट से बार-बार समय मांग रही है।

पटवारी ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि आखिर ये 'बड़े हाथ' किसके हैं जो इस जांच को अटकाने की कोशिश कर रहे हैं। जीतू ने आगे कहा कि मध्य प्रदेश की जनता को इसका स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।

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नीलेश आदिवासी हत्याकांड - क्या किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा था?

सागर (Sagar News) जिले के मालथौन कस्बे में 25 जुलाई 2025 को 42 वर्षीय नीलेश आदिवासी ने आत्महत्या कर ली थी। परिवार का आरोप है कि नीलेश को कुछ स्थानीय लोगों ने परेशान किया था।

साथ ही राजनीतिक दबाव के चलते उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया। इस मामले में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी चल रहे हैं। 

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नीलेश आदिवासी की पत्नी रेवा ने क्या कहा

 नीलेश आदिवासी की मौत के मामले में उसकी पत्नी रेवा ने बताया कि नितिन जैन, राघवेंद्र परिहार और अजीत राय उनके घर पहुंचे थे। उन्होंने नीलेश से पूछा कि उनकी जमीन पर किसने कब्जा किया है, तो नीलेश ने मनोज जैन का नाम लिया।

इन लोगों ने नीलेश को मनोज जैन के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए उकसाया और नीलेश को लेकर रात भर गायब रहे। ये लोग राघवेंद्र परिहार के पास ही ठहरे रहे।

दो दिन बाद राघवेंद्र परिहार ने उन्हें खाटू श्याम भेजने का दबाव डाला, लेकिन रेवा ने मना कर दिया। फिर इन लोगों ने उन्हें अजीत राय के ढाबे से 5 हजार रुपए देकर इंदौर बस में बैठा दिया।

इंदौर पहुंचते ही बेटे का फोन आया कि पिता को शराब पिलाकर गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ झूठी रिपोर्ट लिखवाई गई है।

रेवा के मुताबिक, राघवेंद्र परिहार, नितिन जैन और अजीत ने नीलेश को सागर ले जाकर 10 लाख रुपए का लालच दिया था। नीलेश ने साफ मना किया कि वे किसी पर झूठा मुकदमा नहीं करेंगे, सिर्फ मनोज जैन से जमीन चाहिए। दबाव बढ़ने पर नीलेश ने कहा कि ज्यादा तंग किया तो आत्महत्या कर लूंगा।

आत्महत्या से ठीक एक दिन पहले, 24 जुलाई की रात 2 बजे नीलेश घर लौटे। रेवा ने पूछा तो बताया कि मनोज जैन ने दुकान पर बुलाया था, जहां राघवेंद्र परिहार, अजीत राय, नितिन, मनोज जैन और तीन अन्य ने मिलकर उसकी पिटाई की।

धमकी दी कि घर गिरवा देंगे, घरवालों को गोली मार देंगे। नीलेश रात भर जागते रहे और 25 की दोपहर में आत्महत्या कर ली।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे SIT गठन के निर्देश 

सुप्रीम कोर्ट ने सागर के नीलेश आदिवासी आत्महत्या मामले में SIT गठन के निर्देश 10 दिसंबर 2025 को दिए थे।​​ कोर्ट ने मध्य प्रदेश के DGP को 48 घंटे के भीतर तीन सदस्यीय SIT बनाने का आदेश दिया था। जिसमें एक सीनियर IPS (बाहरी कैडर), एक युवा IPS (बिना MP कनेक्शन) और एक महिला अधिकारी शामिल हों।

फांसी से पहले का वीडियो

नीलेश के दो वीडियो सामने आए थे, जिसमें वह खुद इस बात की पुष्टि करते हैं कि उनके नाम से झूठी रिपोर्ट लिखवाई गई थी। नीलेश ने वीडियो में बताया था कि उन्हें झूठा आरोप लगवाने के लिए बहुत दबाव डाला गया था।

नीलेश के परिवार का आरोप और पुलिस की भूमिका

नीलेश के परिवार ने आरोप लगाया था कि पुलिस इस मामले में गंभीरता से जांच नहीं कर रही है। परिवार का कहना है कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में कोई भी तत्परता नहीं दिखाई थी। परिवार ने एसपी कार्यालय में आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पहले सिर्फ मर्ग कायम हुआ, बाद में दर्ज की गई FIR

शुरुआत में नीलेश आदिवासी की मौत को आत्महत्या बताया गया था। हालांकि, परिवार ने आरोप लगाए कि नीलेश को लगातार मानसिक प्रताड़ना और दबाव में रखा गया था। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया।

पहले पुलिस ने मर्ग (असामान्य मृत्यु) कायम किया और जांच शुरू की। फिर परिजनों के बयानों के आधार पर मालथौन थाने में आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए। कुल मिलाकर तीन केस दर्ज हुए, जिनमें दो आपराधिक मामले और एक मर्ग केस शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को इस मामले में CBI जांच से इनकार करते हुए राज्य स्तर पर SIT गठित करने का आदेश दिया था।

गोविंद सिंह राजपूत का बयान

मालथौन के स्थानीय भाजपा नेता गोविंद सिंह राजपूत ने इस मामले में अपनी सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि उनका परिवार पिछले 65 सालों से सरपंच रहा है और उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब राजनीतिक रंजिश के कारण हुआ है। राजपूत ने कहा कि नीलेश पर उनके खिलाफ झूठी रिपोर्ट लिखवाने के लिए दबाव डाला गया था, जबकि वे उनसे मिले भी नहीं थे।

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