छात्रा के साथ डिनर करना चाहते थे प्रोफेसर साहब, फिर एक चिठ्ठी से ढीली पड़ गईं हसरतें
Sandeep Kumar | Jul 31, 2026, 17:07 IST
छात्रा के साथ डिनर करना चाहते थे प्रोफेसर साहब
एमपी के एक विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगे हैं। पूरा मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन्हें पद से हटा दिया है। आइए जानते हैं क्या पूरा मामला...
समझें क्या है पूरा मामला
- सागर यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग में विवाद सामने आया।
- विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद भारद्वाज पर आरोप लगे हैं।
- शोधार्थी को डिनर के लिए दबाव देने का आरोप है।
- शिकायत वापसी के लिए हस्ताक्षर कराने का दावा किया गया।
- विश्वविद्यालय ने जांच समिति बनाकर कार्रवाई शुरू की है।
महिला रिसर्चर के उत्पीड़न का मामला
विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से विभागाध्यक्ष पद से हटा दिया है। शिकायत वापस लेने के लिए रिसर्चर से जबरन हस्ताक्षर कराने का भी आरोप लगा है। मामले की जांच के लिए आंतरिक जांच समिति गठित की गई है।
शिकायत की शुरुआत कैसे हुई
आरोप है कि प्रो. भारद्वाज एक शोधार्थी को वाट्सएप पर मैसेज कर डिनर पर चलने का दबाव बनाते थे। हाल ही में व्हिसल ब्लोअर अरविंद भट्ट ने भी लिखित शिकायत देकर एचओडी (HOD – Head of Department) के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
20 जुलाई 2026 को विभागाध्यक्ष की ओर से भी जवाबी आरोप लगाए गए। उन्होंने रिसर्चर पर अनुशासनहीनता और अनुपस्थिति का आरोप लगाया। साथ ही फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट पेश करने का आरोप भी लगाया गया।
शिकायत वापसी में जबरन हस्ताक्षर का आरोप
रिसर्चर ने बताया कि उन्हें बंद कमरे में डराया-धमकाया गया। आरोप है कि बिना विषय-वस्तु पढ़ाए उनसे सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। रिसर्चर ने दो सहायक प्राध्यापकों डॉ. शिवानी मीना और डॉ. दीपिका वशिष्ठ पर धमकी देने का आरोप लगाया।
आरोप है कि पुलिस शिकायत, मानहानि केस और करियर बर्बाद करने की धमकी देकर जबरन हस्ताक्षर लिए गए। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि शिकायत वापसी वाले पत्र में उस शोधार्थी के भी हस्ताक्षर थे, जिसने शिकायत की ही नहीं थी। इससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश
प्रो. बोस ने स्पष्ट किया कि रिसर्चर की सुरक्षा सबसे जरूरी है। साथ ही विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखना भी प्राथमिकता है। डीन की सिफारिश और आईसीसी (ICC – Internal Complaints Committee) की चल रही जांच के आधार पर आगे कार्रवाई हुई।
विभागाध्यक्ष हटाए गए
प्रशासन के मुताबिक यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके। साथ ही जांच के दौरान किसी तरह का दबाव न बने, यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
क्या बोले जिम्मेदार ?
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