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5 पॉइंट में समझें पूरा मामला....
- मुरैना में ओवरब्रिज की मांग को लेकर नागरिक हड़ताल कर रहे थे।
- हड़ताल समाप्त कराने के लिए भाजपा सांसद शिवमंगल सिंह तोमर मौके पर पहुंचे।
- सांसद शिवमंगल सिंह तोमर ने मंच से महिला नायब तहसीलदार को ढीठ कहा।
- सार्वजनिक मंच से अधिकारी के लिए की गई टिप्पणी का वीडियो वायरल हो गया।
- जनप्रतिनिधि की भाषा और प्रशासनिक गरिमा पर सवाल उठ रहे हैं।
मध्य प्रदेश के मुरैना-श्योपुर संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद शिवमंगल सिंह तोमर का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वे एक प्रशासनिक अधिकारी के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते दिख रहे हैं, जो सार्वजनिक जीवन की मर्यादा पर सवाल खड़े करते हैं। मामला सिर्फ एक बयान का नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक तंत्र के रिश्तों की संवेदनशीलता से जुड़ा है।
बानमौर से उठा विवाद
यह घटना मुरैना जिले के बानमौर कस्बे की है, जो नेशनल हाईवे-44 पर स्थित है। सड़क पार करते समय लगातार हो रहे हादसों से परेशान स्थानीय लोग लंबे समय से ओवरब्रिज की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर नागरिकों ने हड़ताल शुरू कर दी थी।
हड़ताल खत्म कराने पहुंचे सांसद
स्थानीय लोगों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए सांसद शिवमंगल सिंह तोमर मौके पर पहुंचे। उनकी मौजूदगी में प्रदर्शन तो खत्म हो गया। मंच से कही गई एक बात ने पूरे घटनाक्रम को विवाद में बदल दिया।
मुरैना : महिला अधिकारी के बारे में ये क्या बोल गए BJP सांसद, सुनिए VIDEO #ShivmangalSinghTomar#MadhyaPradesh#Morena@shivmangal4bjp@BJP4MP@BJP4Indiapic.twitter.com/mDz5bEOxu9
— TheSootr (@TheSootr) January 6, 2026
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महिला नायब तहसीलदार पर टिप्पणी
हड़ताल स्थल पर सांसद ने बानमौर में पदस्थ महिला नायब तहसीलदार वंदना यादव को बुलवाया था। समय पर न पहुंचने से नाराज सांसद ने सार्वजनिक मंच से उन्हें ढीठ कहा। यही नहीं, उन्होंने कलेक्टर से फोन पर बातचीत में यह भी कहा कि महिला है, कुछ कर नहीं सकते।
मंच से कलेक्टर को फोन
सांसद ने मंच से ही मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ को फोन लगाया। बातचीत के दौरान नायब तहसीलदार के लिए इस्तेमाल की गई भाषा कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
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सवालों के घेरे में सांसद की मर्यादा
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या एक जनप्रतिनिधि को किसी प्रशासनिक अधिकारी, खासकर महिला अफसर, के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना शोभा देता है? सार्वजनिक मंच से कही गई बात केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, उसका असर समाज और प्रशासन दोनों पर पड़ता है।
कलेक्टर की चुप्पी पर भी सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में एक और सवाल उठ रहा है। जब सांसद ने कलेक्टर से बातचीत में अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया, तो क्या कलेक्टर को इसका विरोध नहीं करना चाहिए था? प्रशासनिक गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी किसकी है, यह बहस भी तेज हो गई है।
पुराने विवादों की याद
यह पहला मौका नहीं है, जब सांसद शिवमंगल सिंह तोमर की कार्यशैली चर्चा में आई हो। इससे पहले भी उनके व्यवहार और बयानों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में ताजा मामला उनकी सार्वजनिक छवि पर फिर से सवाल खड़े कर रहा है।
जनता तक क्या संदेश जाता है?
जनप्रतिनिधि का हर शब्द जनता के लिए एक संदेश होता है। प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति असंयमित भाषा न सिर्फ व्यवस्था का मनोबल तोड़ती है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर करती है।
हड़ताल का खत्म होना भले ही राहत की बात हो, लेकिन महिला अधिकारी पर की गई टिप्पणी ने पूरे घटनाक्रम को विवादास्पद बना दिया है। सवाल सिर्फ एक बयान का नहीं, बल्कि सत्ता, संवेदनशीलता और सार्वजनिक मर्यादा के संतुलन का है। अब देखना होगा कि इस मामले पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
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