पूर्व RTO सौरभ शर्मा की नई कानूनी चाल! सुप्रीम कोर्ट के सहारे ED पर पलटवार

Neel Tiwari | Jun 22, 2026, 17:20 IST
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सौरभ शर्मा की नई कानूनी चाल
सौरभ शर्मा की नई कानूनी चाल

पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा जेल में बंद है। उस पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है। उसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया है। उसने विशेष अदालत के संज्ञान को चुनौती दी है। ईडी की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए गए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सौरभ शर्मा की याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।
  • सुप्रीम कोर्ट के परविंदर सिंह बनाम ईडी फैसले का हवाला दिया गया।
  • दावा किया गया कि आरोपी को सुने बिना विशेष अदालत ने संज्ञान लिया।
  • याचिका में संज्ञान आदेश को अवैध बताते हुए पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाए गए।
  • हाईकोर्ट ने सुनवाई 13 जुलाई को तय की।

जमानत रद्द होने के बाद SC के आदेश का सहारा

सौरभ शर्मा आरटीओ भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी है और जेल में बंद है। उसने विशेष अदालत के संज्ञान आदेश को चुनौती दी है और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

उसका कहना है कि ईडी की शिकायत पर गलत तरीके से संज्ञान लिया गया। नियमित और अस्थायी जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। हाईकोर्ट में नई याचिका दायर की गई है और सोमवार को सुनवाई हुई। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में मामला सूचीबद्ध रहा।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले को बनाया आधार

सौरभ शर्मा की ओर से सुप्रीम कोर्ट के हालिया परविंदर सिंह बनाम प्रवर्तन निदेशालय (ED) मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया गया।

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(1) के तहत किसी भी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आरोपी को सुनना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि निष्पक्ष सुनवाई के संवैधानिक अधिकार का हिस्सा है।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि आरोपी को सुने बिना संज्ञान लिया जाता है तो ऐसा आदेश कानूनी रूप से टिक नहीं सकता।

विशेष अदालत के संज्ञान को बताया अवैध

याचिका में सौरभ शर्मा का मुख्य तर्क यह है कि विशेष अदालत ने उसे सुनवाई का अवसर दिए बिना ही ईडी की शिकायत पर संज्ञान ले लिया था। इसलिए संज्ञान आदेश ही कानून के विपरीत है। याचिका में कहा गया है कि संज्ञान आदेश दोषपूर्ण है और अवैध है। इसके आधार पर आगे की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। ईडी की कार्रवाई को भी कानूनी जांच के दायरे में बताया गया है।

इसी आधार पर हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि अदालत इस तर्क से सहमत होती है तो मामले में महत्वपूर्ण कानूनी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। इसके साथ ही सौरभ शर्मा के वकील के द्वारा उसे 18 महीने से हिरासत में रखने को गलत बताते हुए जमानत याचिका की सुनवाई का भी निवेदन किया गया है।

आपको बता दें कि सौरभ शर्मा के ऊपर दर्ज अन्य मामले में उसे जमानत मिल चुकी है केवल ED की कार्यवाही के कारण ही वह जेल में अब तक बंद है।

अब 13 जुलाई में होगी अगली सुनवाई

प्रारंभिक सुनवाई के बाद जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने राज्य सरकार और प्रवर्तन निदेशालय को जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय दिया है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की है। मामला करोड़ों की कथित संपत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है और अब बहस जमानत से आगे बढ़ गई है। विवाद विशेष अदालत के संज्ञान आदेश पर केंद्रित है और सवाल सुप्रीम कोर्ट के मानकों के पालन का है। आने वाली सुनवाई में पूरे मामले की दिशा तय हो सकती है।

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