सीनियर सेक्रेटरी कमेटी का पुनर्गठन, ACS संजय दुबे और PS राठौर को मिली नई जिम्मेदारी
Amresh Kushwaha | Jul 28, 2026, 11:09 IST
सीनियर सेक्रेटरी कमेटी का फिर पुनर्गठन
मध्य प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ सचिव समिति का पुनर्गठन किया है। एसीएस संजय दुबे सदस्य और पीएस अमित राठौर विशेष आमंत्रित सदस्य बनाए गए हैं। समिति अब विधेयकों और नीतियों की भी जांच करेगी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में सीनियर सेक्रेटरी कमेटी का पुनर्गठन हुआ है।
- एक हफ्ते में यह दूसरा आदेश जारी किया गया।
- नए मुख्य सचिव के आने से यह बदलाव जरूरी हुआ।
- संजय दुबे सदस्य और अमित राठौर विशेष आमंत्रित सदस्य बने।
- समिति का कार्यक्षेत्र भी अब काफी बढ़ा दिया गया है।
पहला आदेश 20 जुलाई को जारी हुआ था। ठीक 7 दिन बाद, यानी 27 जुलाई को नया आदेश जारी किया गया। इतनी जल्दी बदलाव की वजह साफ है। नए मुख्य सचिव ने अभी हाल में पदभार संभाला है। इसी वजह से समिति में नया बदलाव करना पड़ा।
समिति में बदलाव क्यों जरूरी
इसी बीच अशोक बर्णवाल प्रदेश के नए मुख्य सचिव बने हैं। मुख्य सचिव का पद ही समिति का अध्यक्ष पद होता है। इसलिए समिति की पूरी संरचना पर असर पड़ा।
इन बदलावों के चलते समिति को नए सिरे से गठित करना जरूरी हो गया था। इसीलिए सामान्य प्रशासन विभाग ने यह नया आदेश जारी किया है। आदेश में समिति की भूमिका और कार्यक्षेत्र भी साफ किया गया है।
समिति में अब कौन-कौन शामिल
इसके अलावा वित्त विभाग और विधि एवं विधायी कार्य विभाग भी शामिल हैं। इन तीनों विभागों के सचिव समिति के स्थायी सदस्य रहेंगे। यह व्यवस्था पहले से चली आ रही है।
अब समिति में एक नया नामित सदस्य भी जोड़ा गया है। यह जिम्मेदारी अपर मुख्य सचिव आईएएस संजय दुबे को मिली है। वे ACS (ACS यानी Additional Chief Secretary), नगरीय विकास एवं आवास विभाग हैं। उन्हें समिति का सदस्य बनाया गया है।
एक विशेष आमंत्रित सदस्य की भी नियुक्ति हुई है। यह जिम्मेदारी अमित राठौर को मिली है। वे PS (PS यानी Principal Secretary), वाणिज्यिक कर विभाग हैं। वे जरूरत पड़ने पर समिति की बैठकों में शामिल होंगे।
कार्यक्षेत्र में बड़ा विस्तार
अब यह समिति सभी विधायी प्रस्तावों का परीक्षण करेगी। नए विधेयकों और कानून संशोधनों की प्रारंभिक जांच भी यही समिति करेगी। पहले यह काम अलग स्तर पर होता था।
विधायी मामलों की जांच के समय संसदीय कार्य विभाग का सचिव भी जुड़ेगा। उन्हें इस दौरान समिति का अतिरिक्त सदस्य माना जाएगा। इससे कानूनी प्रक्रिया और मजबूत होगी।
प्रदेश की नई नीतियों की समीक्षा भी अब यही समिति करेगी। बड़े नीतिगत बदलावों पर समिति अपनी राय और अनुशंसा देगी। सरकार इसी अनुशंसा के आधार पर आगे फैसला लेगी।
मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव भी अन्य जरूरी विषय भेज सकते हैं। ऐसे विषय भी अब समिति के सामने रखे जाएंगे। इन विषयों पर अंतिम निर्णय से पहले समिति की राय ली जाएगी। इस तरह समिति की भूमिका पहले से कहीं बड़ी हो गई है।
क्यों अहम है पुनर्गठन
नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के बाद ऐसे बदलाव आम तौर पर होते हैं। पुराने अधिकारियों की नई पोस्टिंग के साथ समितियों में भी फेरबदल होता है। यह प्रशासनिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। हालांकि इस बार कार्यक्षेत्र के बड़े विस्तार ने इसे खास बना दिया है। विधायी प्रस्तावों और नीतिगत फैसलों की जिम्मेदारी अब सीधे इस समिति के पास होगी। इससे समिति का महत्व पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।
आने वाले समय में इस समिति के फैसलों पर भी नजर रहेगी। खासकर विधेयकों और नीतिगत बदलावों को लेकर समिति की भूमिका अहम होगी। सरकार के कामकाज में यह समिति अब सीधी भूमिका निभाएगी।
यह पूरा घटनाक्रम राज्य प्रशासन में जारी बदलावों की एक कड़ी है। मुख्य सचिव के बदलने का असर अक्सर कई विभागों और समितियों पर दिखता है। आने वाले हफ्तों में और भी प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
आम नागरिकों के लिए भी यह खबर मायने रखती है। यह समिति ही तय करती है कि कौन से कानून और नीतियां आगे बढ़ेंगी। इसलिए इसकी संरचना और कार्यक्षेत्र दोनों जरूरी विषय हैं। प्रशासनिक हलकों में इस पुनर्गठन को लेकर चर्चा तेज है। अधिकारी इसे नए मुख्य सचिव के कामकाज की शुरुआती झलक मान रहे हैं। आने वाले दिनों में समिति की पहली बैठक पर भी नजर रहेगी।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर संवैधानिक प्रक्रिया और नियमों के तहत हुए बदलाव को सामने रखती है। इसमें किसी व्यक्ति या पद पर कोई आरोप नहीं है, यह सिर्फ प्रशासनिक पुनर्गठन है। ऐसी खबरें नागरिकों को सरकार की कार्यप्रणाली समझने में मदद करती हैं।
FAQ
- मध्य प्रदेश की वरिष्ठ सचिव समिति का पुनर्गठन क्यों हुआ?
नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के पदभार संभालने के बाद समिति में बदलाव जरूरी हो गया था। पुराने सदस्य डॉ. राजेश राजौरा को महानिदेशक, डीजी प्रशासन अकादमी पदस्थ किया गया, जिससे समिति में जगह खाली हुई। इसी वजह से सामान्य प्रशासन विभाग ने 27 जुलाई को नया आदेश जारी किया।
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