गंदे नाले के पानी से उगाई जा रही हैं सब्जियां, हाईकोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

जबलपुर में सीवेज के गंदे पानी से उगाई जा रही सब्जियां अब स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गई हैं। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट ने इस गंभीर समस्या का खुलासा किया है। रिपोर्ट में इसको लेकर चेतावनी भी दी गई है। इस मुद्दे पर एमपी हाईकोर्ट में सुनवाई भी हुई है।

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Amresh Kushwaha
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NEWS IN SHORT

  • जबलपुर में सीवेज के पानी से उगाई जा रही सब्जियां।

  • मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने गंदे पानी से जुड़े गंभीर मुद्दे को उजागर किया।

  • हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से तात्कालिक कार्रवाई की मांग की, अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी।

  • नगर निगम पर 17.80 करोड़ रुपये का जुर्माना, दंड की वसूली जिम्मेदारी कलेक्टर की।

NEWS IN DETAIL

मध्यप्रदेश में गंदे नाले (सीवरेज) के पानी से सब्जियां उगाने के मामले में हाईकोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने अपनी रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।  

रिपोर्ट में सामने आया कि जबलपुर के लगभग सभी नालों के पानी में बड़ी मात्रा में सीवेज मिला हुआ है। इससे यह पानी बहुत ज्यादा दूषित हो चुका है। पीने या सिंचाई के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।

प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सुझावों को तुरंत लागू करें

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में इस गंभीर मामले पर बुधवार, 14 जनवरी को सुनवाई हुई। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट ने समस्या की गहराई को उजागर किया।

सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ ने सरकार को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सुझावों को तुरंत लागू किया जाए। रिपोर्ट पेश की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय की गई है।

गंभीर स्वास्थ्य संकट का अलर्ट

प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है। यदि नालों का गंदा पानी वॉटर पाइप में मिला, तो यह गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सीवेज को सीधे नालों में जाने से रोका जाए। इसके अलावा, नाले के पानी के उपयोग पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए।

IMP FACTS

सीवेज पानी की गुणवत्ता पर बड़ा खुलासा

नवंबर 2025 में कृषि, स्वास्थ्य और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की संयुक्त टीम ने जांच की थी। टीम ने ओमती नाला, मोती नाला और खूनी नाला से पानी के सैंपल लिए थे।

रिपोर्ट में पाया गया कि इन नालों का पानी किसी भी उपयोग के लिए अयोग्य था। पानी में बीओडी, टोटल कॉलीफॉर्म और फीकल कॉलीफॉर्म की मात्रा बहुत अधिक थी। यह पानी पीने, नहाने या खेती के लिए बिलकुल भी सुरक्षित नहीं था।

नगर निगम पर 17.80 करोड़ का जुर्माना

इस मामले में एक और अहम पहलू सामने आया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जबलपुर नगर निगम पर 17.80 करोड़ रुपए का दंड लगाया था। यह दंड जुलाई 2020 से 31 मार्च 2025 के बीच नदियों और नालों में सीवेज मिलाने के कारण था। हालांकि, नगर निगम ने अब तक यह राशि जमा नहीं की है। अब इस दंड की वसूली की जिम्मेदारी जबलपुर के जिला कलेक्टर पर है। हाईकोर्ट ने इस पर जवाब तलब किया है।

नालों में जा रहा 98.86 मिलियन लीटर सीवेज

रिपोर्ट के अनुसार, जबलपुर में प्रतिदिन 174 मिलियन लीटर सीवेज उत्पन्न होता है। शहर में 12 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं, लेकिन सिर्फ 75.14 मिलियन लीटर सीवेज का उपचार हो पा रहा है। इसका मतलब है कि लगभग 98.86 मिलियन लीटर दूषित पानी बिना उपचार के सीधे नालों में जा रहा है। इससे स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है।

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