ज्ञान भारतम मिशन के सर्वे में मिली मुगलकालीन सोने की तलवार और 50 फरमान
Pawan Modiya | Jul 28, 2026, 18:26 IST
शिवपुरी में तलवार
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में सर्वे के दौरान शाहजहां के दौर की सोने के हत्थे वाली दुर्लभ तलवार मिली है। साथ ही मुगलकालीन 50 फरमान और हस्तलिखित कुरान भी मिली है। ये सभी दस्तावेज अब संरक्षित और डिजिटल किए जाएंगे।
समझें क्या है पूरा मामला
- शिवपुरी के करैरा में पुरानी पांडुलिपियों का सर्वे चल रहा था।
- सर्वे टीम को शाहजहां के दौर की सोने के हत्थे वाली तलवार मिली।
- तलवार पर फारसी भाषा में सोने से खास इबारत लिखी है।
- साथ ही मुगल काल के करीब पचास शाही फरमान भी मिले हैं।
- एक हस्तलिखित कुरान शरीफ भी इसी संग्रह में मिली है।
इसी दौरान सर्वे टीम को एक अनमोल तलवार मिली। यह तलवार मुगल बादशाह शाहजहां के दौर की है। तलवार का हत्था शुद्ध सोने का बना है। इस पर फारसी भाषा में खास इबारत भी लिखी है। यह खोज इतिहासकारों के लिए भी हैरान करने वाली है।
यह तलवार करैरा किले के पुराने कमांडेंट के परिवार में मिली। कमांडेंट का नाम सैयद सालार था। तलवार अब उनकी नौवीं पीढ़ी के पास सुरक्षित है। परिवार के वकील इत्रत जैदी ने इसे संभाल कर रखा था। सालों तक यह तलवार परिवार के निजी संग्रह में रही। पुरातत्वविदों का मानना है कि यह बेहद दुर्लभ हथियार है। यह मुगलकालीन बचे हथियारों में सबसे खास मानी जा रही है।
तलवार पर फारसी में इबारत
लिखावट के अनुसार शाहजहां ने खुद यह तलवार भेंट की थी। यह तलवार करैरा किले के कमांडर सैयद सालार को दी गई थी। यह भेंट एक शाही इनाम के तौर पर दी गई थी। उस दौर में ऐसे इनाम बड़ी उपलब्धि माने जाते थे। यह सम्मान सैन्य सेवा और वफादारी के बदले दिया जाता था। इस लिखावट ने तलवार की असली पहचान भी साबित कर दी है।
सोथबी की तलवार से मेल
50 मुगलकालीन फरमान मिले
जानकारों का कहना है कि ये दस्तावेज बहुत खास गवाही देते हैं। इनसे पता चलता है कि मुगल दरबार कैसे काम करता था। इनसे यह भी साफ होता है कि प्रांतीय इलाकों में हुकूमत कैसे चलती थी। दिल्ली दरबार से दूर इलाकों तक प्रशासन कैसे पहुंचता था। यह बात भी इन फरमानों से समझ आती है।
परिवार ने नहीं बेची विरासत
अब होगा संरक्षण, डिजिटलाइजेशन
एपिग्राफिक अध्ययन का मतलब है पुरानी लिखावट का गहराई से अध्ययन। इससे इतिहासकारों को मुगल काल को समझने में मदद मिलेगी। शिवपुरी की यह खोज आने वाले समय में और जानकारी दे सकती है। फिलहाल यह पूरा संग्रह विशेषज्ञों की निगरानी में है।
जानकारों के अनुसार ऐसी खोजें आम तौर पर बहुत कम होती हैं। इसीलिए करैरा की यह खोज देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस पर और शोध होने की उम्मीद है। इतिहास प्रेमियों के लिए यह खबर बेहद दिलचस्प मानी जा रही है। मध्य प्रदेश के इतिहास जगत के लिए भी यह गर्व की बात है।
ये खबरें भी पढ़ें...
महाकाल मंदिर के अन्नक्षेत्र में अब इडली-सांभर भी परोसा जाएगा
बैरिकेड तोड़ भोपाल में घुसे 2 हजार किसान, CM हाउस घेरने का ऐलान
MPPSC राज्य सेवा परीक्षा मेंस की कॉपियां देखने में लग जाएंगे 8 माह
सेना में जाति के नाम पर रेजिमेंट क्यों बनीं, एमपी से है खास कनेक्शन
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari