प्रशासनिक इकाइयों को नया आकार लेने से रोक रही पुनर्गठन आयोग की सुस्ती
Sanjay Sharma | Aug 29, 2025, 22:01 IST
Administrative Reorganization Commission
मध्य प्रदेश सरकार ने जिस आयोग को जिले, तहसील और विकासखंड स्तर की इकाइयों के नए सिरे से सीमांकन यानी पुनर्गठन की जिम्मेदारी है वहीं अब देर कर रहा है।
BHOPAL. चार दशक बाद मध्य प्रदेश सरकार की मंशा प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की है। बढ़ती आबादी के अनुरूप संसाधनों को जुटाने की दिशा में सरकार की मंशा की राह में अब पुनर्गठन आयोग की सुस्ती रोड़ा बन गई है।
सरकार ने जिस आयोग को जिले, तहसील और विकासखंड स्तर की इकाइयों के नए सिरे से सीमांकन यानी पुनर्गठन की जिम्मेदारी है वहीं अब देर कर रहा है। बीते एक साल में आयोग केवल 20 जिलों तक ही पहुंच सका है। जबकि अभी भी 44 जिले बाकी है।
जिस गति से आयोग जिलों तक पहुंच रहा है उसे देखते हुए शेष जिलों तक जाने में उसे चार साल का समय और लग सकता है। जिन जिलों में आयोग पहुंचा है वहां भी लोगों से केवल औपचारिक चर्चा ही हो पाई है। जनप्रतिनिधियों और जानकारों से इन इकाइयों के पुनर्गठन को लेकर न तो कोई प्रस्ताव मांगे गए हैं न उनसे सुझाव लिए गए।
मध्य प्रदेश में लंबे समय से प्रशासनिक इकाई यानी जिले, तहसील और विकासखंडों के पुनर्गठन की जरूरत थी। साल 2000 से 2025 के बीच नए जिले बनने से प्रशासनिक इकाइयों का कार्यक्षेत्र गड़बड़ा गया था। वहीं स्थानीय लोगों को भी इसमें भौगोलिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
इसको देखते हुए आमजन भी प्रशासनिक इकाइयों के नए सिरे से सीमांकन की मांग कर रहे थे। इसको देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग का गठन किया था। मार्च 2024 में आयोग ने अपना काम शुरू किया था। अब तक आयोग के सदस्य प्रदेश के 20 जिलों में स्थानीय लोगों से मिलकर बैठक कर चुके हैं। वहीं आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में केवल सामान्य भ्रमण किया गया है।
ये खबर भी पढ़िए :
बार-पब संचालक भूपेंद्र रघुवंशी ने जिस इति तिवारी से हनी ट्रैप की बात कही, वह थाने पहुंची, बोली नहीं मांगे रुपए
पुनर्गठन आयोग में सबसे पहले सदस्य के रूप में रिटायर्ड एसीएस मनोज श्रीवास्तव की नियुक्ति की गई थी। उनके बाद सेवानिवृत्त आईएएस शिवनारायण मिश्रा को आयोग का अध्यक्ष और आईएएस मुकेश शुक्ला को सदस्य बनाया गया।
इनकी नियुक्ति में भी चार से छह माह का अंतराल रहा। इस बीच पहले सदस्य मनोज श्रीवास्तव ने राज्य निर्वाचन आयोग में नियुक्ति के चलते आयोग से विदा ले ली। अब आयोग एक अध्यक्ष, एक सदस्य और एक सचिव के सहारे काम कर रहा है।
ये खबर भी पढ़िए :
OBC के 27% आरक्षण में सरकार, विपक्ष सभी भले साथ हो, लेकिन इसका हल निकले बिना कोई हल नहीं
पुनर्गठन आयोग के सदस्य पहले चरण में जिलों में जाकर स्थानीय लोगों से सामान्य चर्चा करेंगे। वे जिलों की भौगोलिक स्थिति और वर्तमान प्रशासनिक इकाइयों के कार्यक्षेत्र की समीक्षा के बाद रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद दूसरे दौर में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और लोगों से औपचारिक बैठक कर प्रशासनिक इकाइयों के नए सिरे से पुनर्गठन को लेकर चर्चा होगी।
पहले चरण की समीक्षा और दूसरे चरण की रिपोर्ट, जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार कर आयोग इकाइयों के नए स्वरूप का ड्राफ्ट सरकार को सौंपेगा। हांलाकि साल भर बीतने के बाद भी आयोग पहले चरण का चौथाई हिस्सा ही पूरा कर पाया है। वहीं दूसरे चरण के समापन में दो से तीन साल लगने का अनुमान है।
ये खबर भी पढ़िए :
घर के बाहर डेयरी बूथ लगाना स्वतंत्रता और जीवन जीने के अधिकार के विपरीत : राजस्थान हाई कोर्ट
सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की जिस मंशा के साथ आयोग का गठन किया था उसे उसी अनुरूप सशक्त नहीं बनाया। आयोग में तीन सदस्यों में से अब केवल दो ही बचे हैं। वहीं सचिव के रूप में एक आईएएस अधिकारी और कुछ आउटसोर्सकर्मी हैं।
आयोग को लिपिक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं जिससे दस्तावेजी कार्रवाई कछुआ चाल बनी हुई है। आयोग का संचालन विकास आयुक्त मुख्यालय के भवन के एक हिस्से में हो रहा है जहां सदस्यों को बैठने के लिए पर्याप्त कमरे हैं और न ही टेबल-कुर्सी दी गई हैं। इस तंगहाल स्थिति में आयोग के काम में तेजी की उम्मीद करना बेमानी है।
ये खबर भी पढ़िए :
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें
मध्य प्रदेश में साल 1982 में संभाग, जिले, तहसील और विकासखंडों का पुनर्गठन हुआ था। अब 43 साल बाद प्रदेश में प्रशासनिक इकाइयों के नए सिरे से सीमांकन की तैयारी हो रही है। इसी वजह से लोगों में भी इसको लेकर खासी उत्सुकता है।
कई जिलों की तहसील और गांवों को नजदीकी जिलों में जोड़ना प्रशासनिक दृष्टि से जरूरी बताया जा रहा है तो कहीं लोग वर्तमान तहसील की जगह दूसरी तहसील में शामिल होना सुविधाजनक बता रहे हैं। इसी तरह विकासखंड और जिला स्तर पर भी बदलाव की मांग जोर पकड़ रही है। लोगों की ऐसी मांगें बीते दो- तीन दशक से उठ रही हैं।
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧
सरकार ने जिस आयोग को जिले, तहसील और विकासखंड स्तर की इकाइयों के नए सिरे से सीमांकन यानी पुनर्गठन की जिम्मेदारी है वहीं अब देर कर रहा है। बीते एक साल में आयोग केवल 20 जिलों तक ही पहुंच सका है। जबकि अभी भी 44 जिले बाकी है।
जिस गति से आयोग जिलों तक पहुंच रहा है उसे देखते हुए शेष जिलों तक जाने में उसे चार साल का समय और लग सकता है। जिन जिलों में आयोग पहुंचा है वहां भी लोगों से केवल औपचारिक चर्चा ही हो पाई है। जनप्रतिनिधियों और जानकारों से इन इकाइयों के पुनर्गठन को लेकर न तो कोई प्रस्ताव मांगे गए हैं न उनसे सुझाव लिए गए।
आमजन कर रहे पुनर्गठन की मांग
इसको देखते हुए आमजन भी प्रशासनिक इकाइयों के नए सिरे से सीमांकन की मांग कर रहे थे। इसको देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग का गठन किया था। मार्च 2024 में आयोग ने अपना काम शुरू किया था। अब तक आयोग के सदस्य प्रदेश के 20 जिलों में स्थानीय लोगों से मिलकर बैठक कर चुके हैं। वहीं आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में केवल सामान्य भ्रमण किया गया है।
ये खबर भी पढ़िए :
बार-पब संचालक भूपेंद्र रघुवंशी ने जिस इति तिवारी से हनी ट्रैप की बात कही, वह थाने पहुंची, बोली नहीं मांगे रुपए
नियुक्ति- त्यागपत्र का काम पर असर
इनकी नियुक्ति में भी चार से छह माह का अंतराल रहा। इस बीच पहले सदस्य मनोज श्रीवास्तव ने राज्य निर्वाचन आयोग में नियुक्ति के चलते आयोग से विदा ले ली। अब आयोग एक अध्यक्ष, एक सदस्य और एक सचिव के सहारे काम कर रहा है।
ये खबर भी पढ़िए :
OBC के 27% आरक्षण में सरकार, विपक्ष सभी भले साथ हो, लेकिन इसका हल निकले बिना कोई हल नहीं
पहला चरण भी नहीं हो सका पूरा
पहले चरण की समीक्षा और दूसरे चरण की रिपोर्ट, जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार कर आयोग इकाइयों के नए स्वरूप का ड्राफ्ट सरकार को सौंपेगा। हांलाकि साल भर बीतने के बाद भी आयोग पहले चरण का चौथाई हिस्सा ही पूरा कर पाया है। वहीं दूसरे चरण के समापन में दो से तीन साल लगने का अनुमान है।
ये खबर भी पढ़िए :
घर के बाहर डेयरी बूथ लगाना स्वतंत्रता और जीवन जीने के अधिकार के विपरीत : राजस्थान हाई कोर्ट
कर्मचारी और संसाधनों की कमी
आयोग को लिपिक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं जिससे दस्तावेजी कार्रवाई कछुआ चाल बनी हुई है। आयोग का संचालन विकास आयुक्त मुख्यालय के भवन के एक हिस्से में हो रहा है जहां सदस्यों को बैठने के लिए पर्याप्त कमरे हैं और न ही टेबल-कुर्सी दी गई हैं। इस तंगहाल स्थिति में आयोग के काम में तेजी की उम्मीद करना बेमानी है।
ये खबर भी पढ़िए :
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें
40 साल बाद बदलाव की आस
कई जिलों की तहसील और गांवों को नजदीकी जिलों में जोड़ना प्रशासनिक दृष्टि से जरूरी बताया जा रहा है तो कहीं लोग वर्तमान तहसील की जगह दूसरी तहसील में शामिल होना सुविधाजनक बता रहे हैं। इसी तरह विकासखंड और जिला स्तर पर भी बदलाव की मांग जोर पकड़ रही है। लोगों की ऐसी मांगें बीते दो- तीन दशक से उठ रही हैं।
thesootr links
- मध्यप्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- जॉब्स और एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari