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Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में जयपुर के बापू नगर इलाके में एक निजी आवास के बाहर डेयरी बूथ लगाने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इसे जीवन जीने के अधिकार और स्वतंत्रता के विपरीत बताते हुए याचिका स्वीकार की और डेयरी बूथ की अनुमति रद्द कर दी। यह निर्णय उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, जो अपने घरों के बाहर व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने के इच्छुक होते हैं।
क्या था मामला?
जयपुर के बापू नगर में एक नागरिक अजय शिवपुरी ने राजस्थान सरकार के उस आदेश को चुनौती दी, जिसके तहत उनके निजी घर के बाहर डेयरी बूथ लगाने की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकारी आवंटित डेयरी बूथों पर न केवल दूध और दूध से बने पदार्थ, बल्कि अन्य किराने का सामान भी बेचा जाता है। कई डेयरी बूथ किराना स्टोर और छोटे रेस्टोरेंट के रूप में कार्य करते हैं, जो आवासीय क्षेत्रों के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं।
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हाई कोर्ट ने क्यों लिया यह निर्णय?
हाई कोर्ट ने इस मामले को व्यापक प्रभाव वाला मानते हुए इसे जीवन जीने के अधिकार (Right to Life) और स्वतंत्रता (Freedom) से जुड़ा हुआ बताया। जस्टिस समीर जैन ने यह अंतरिम आदेश दिया कि ऐसे डेयरी बूथों से न केवल सार्वजनिक परेशानी होती है, बल्कि यह आवासीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अधिकारों का उल्लंघन भी है। अदालत ने इस बात को भी महत्वपूर्ण माना कि बिना एनओसी (No Objection Certificate) के सरकारी अधिकारियों से मंजूरी लेकर इस तरह के कार्यों को अनुमति दी गई।
कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति
इस मामले में अदालत ने एडवोकेट अजय प्रताप सिंह को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया। कोर्ट ने उन्हें बापू नगर और गांधीनगर क्षेत्र का सर्वे करने और वहां स्थापित डेयरी बूथों के नियम और गाइडलाइंस का पता लगाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कमिशनर को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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क्या होगा अगला कदम?
इस मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी। अदालत ने सरकारी विभागों, जैसे बिजली कंपनी, पुलिस और पीडब्ल्यूडी से एनओसी (NOC) लेने के बिना डेयरी बूथों के स्थापित करने को लेकर सवाल उठाया। कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक स्थलों पर व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने के लिए सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए।
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सार्वजनिक जगहों पर व्यावसायिक गतिविधियां
यह मामला केवल एक डेयरी बूथ की अनुमति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि सार्वजनिक स्थानों पर या आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां कितनी उचित और कानूनी हैं। उच्च न्यायालय का यह आदेश खासतौर पर उन नागरिकों के लिए अहम हो सकता है, जो अपने घरों के पास व्यापार करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सरकारी अनुमतियां और नियमों का पालन करना जरूरी होता है।
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