सोम डिस्टिलरीज की एक्सपायरी शराब खपाने की तैयारी, आबकारी विभाग पर भी लगे आरोप!
Amresh Kushwaha | Apr 22, 2026, 14:35 IST
som distilleries expired liquor scam madhya pradesh excise department
मध्य प्रदेश में सोम डिस्टिलरीज पर एक्सपायरी शराब पर नए लेबल लगाकर बाजार में खपाने के आरोप लग रहे हैं। इसमें आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत की बातें भी सामने आ रही हैं...
मध्यप्रदेश के शराब कारोबार में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है। दिग्गज शराब कंपनी सोम डिस्टिलरीज (Som Distilleries) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला केवल लाइसेंस तक सीमित नहीं है। इस बार जनता की सेहत से खिलवाड़ और विभाग के अधिकारियों की साठगांठ (Collusion) के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी केके मिश्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बेहद चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव अनुराग जैन को संबोधित करते हुए लिखा है कि आपके सख्त रुख की वजह से मध्य प्रदेश में सोम डिस्टिलरीज पर लगाम लगी है।
वहीं, जानकारी मिली है कि आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर सोम के मालिक अपना पुराना और बचा-खुचा स्टॉक ठिकाने लगाने की फिराक में हैं। सुनने में आया है कि एक्सपायरी डेट वाली बोतलों पर नए लेबल लगाकर उन्हें दोबारा बाजार में बेचने की तैयारी की जा रही है। वहीं, विभाग के ही एडिशनल कमिश्नर लेवल के अधिकारी इसमें उनकी मदद कर रहे हैं।
मेरा आपसे आग्रह है कि सोम डिस्टिलरीज के सारे स्टॉक को तत्काल आबकारी विभाग के अधिकारियों की जानकारी बिना जब्त किया जाए। साथ ही मध्य प्रदेश में अमानक शराब बेचने के मंसूबों पर रोक लगाया जाए। यदि इसको लेकर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश में फिर से कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
लाइसेंस खत्म होने के बाद डिस्टिलरीज में रखे शराब के स्टॉक को लेकर भी हाईकोर्ट ने दिशा-निर्देश दिए हैं। नियमानुसार, लाइसेंस समाप्त होने के बाद सारा स्टॉक डिस्टिलरीज अधिकारी के नियंत्रण में रहता है। आबकारी आयुक्त की अनुमति मिलने के बाद 30 दिनों के भीतर इसे अन्य लाइसेंसधारियों को बेचा जा सकता है।
इसके अलावा, सरकार इसे तय कीमत पर खुद भी खरीद सकती है। यह पूरी प्रक्रिया मध्य प्रदेश डिस्टिलरी नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से होनी अनिवार्य है।
अब सारा दारोमदार आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के फैसले पर है। चूंकि लाइसेंस की अवधि बीत चुकी है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी को अब नए सिरे से औपचारिकताएं (Formalities) पूरी करनी होंगी।
सोम डिस्टिलरीज का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड और हालिया विवादों को देखते हुए प्रशासनिक और कानूनी हलकों में पारदर्शिता (Transparency) को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या विभाग नियमों का सख्ती से पालन करेगा या मिलीभगत के आरोपों के बीच कोई नया मोड़ आएगा? यह आने वाला वक्त बताएगा।
मध्यप्रदेश में नकली परमिट और अवैध शराब परिवहन के गंभीर मामले में प्रशासनिक ने 04 फरवरी 2026 को कार्रवाई की थी। द सूत्र के जरिए उठाए गए मामले के बाद आबकारी विभाग हरकत में आया और सोम डिस्टिलरीज समूह के सभी प्रमुख लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए थे। यह कार्रवाई अपर सत्र न्यायालय देपालपुर के जरिए दोष सिद्धि के बाद की गई थी।
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एक्सपायरी शराब खपाने की तैयारी
वहीं, जानकारी मिली है कि आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर सोम के मालिक अपना पुराना और बचा-खुचा स्टॉक ठिकाने लगाने की फिराक में हैं। सुनने में आया है कि एक्सपायरी डेट वाली बोतलों पर नए लेबल लगाकर उन्हें दोबारा बाजार में बेचने की तैयारी की जा रही है। वहीं, विभाग के ही एडिशनल कमिश्नर लेवल के अधिकारी इसमें उनकी मदद कर रहे हैं।
मेरा आपसे आग्रह है कि सोम डिस्टिलरीज के सारे स्टॉक को तत्काल आबकारी विभाग के अधिकारियों की जानकारी बिना जब्त किया जाए। साथ ही मध्य प्रदेश में अमानक शराब बेचने के मंसूबों पर रोक लगाया जाए। यदि इसको लेकर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश में फिर से कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
क्या बोले केके मिश्रा- पढ़िए...
*माननीय मुख्य सचिव-मप्र, आपके कड़े निर्देशों और प्रयासों से मध्य प्रदेश में शराब व्यवसायी “सोम” पर अंकुश लगा है। लेकिन जानकारी मिली है कि आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों की मिली भगत से “सोम डिस्टलरी” के मालिक अपना बचा हुआ स्टॉक ठिकाने लगाने की तैयारी कर रहे हैं, एक्सपायरी डेट की…
— KK Mishra (@KKMishraINC) April 22, 2026
बचे हुए स्टॉक को लेकर क्या कहते हैं नियम?
इसके अलावा, सरकार इसे तय कीमत पर खुद भी खरीद सकती है। यह पूरी प्रक्रिया मध्य प्रदेश डिस्टिलरी नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से होनी अनिवार्य है।
आबकारी आयुक्त के निर्णय पर टिकीं सबकी निगाहें
सोम डिस्टिलरीज का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड और हालिया विवादों को देखते हुए प्रशासनिक और कानूनी हलकों में पारदर्शिता (Transparency) को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या विभाग नियमों का सख्ती से पालन करेगा या मिलीभगत के आरोपों के बीच कोई नया मोड़ आएगा? यह आने वाला वक्त बताएगा।
4 फरवरी को लाइसेंस हुआ था निलंबित
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